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राज्यसभा में आज पेश होगा लोक परीक्षा संशोधन विधेयक,पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के लिए बढ़ेंगी सजा और जुर्माने की राशि

नई दिल्ली,30 जुलाई (युआईटीवी)- देशभर में लगातार सामने आ रहे प्रश्न-पत्र लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। लोकसभा से पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इस विधेयक के माध्यम से सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली,संगठित पेपर लीक गिरोहों और परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले अपराधों के खिलाफ कानून को और अधिक कठोर बनाना चाहती है। प्रस्तावित संशोधनों में त्वरित जाँच,विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से शीघ्र सुनवाई,अपीलों का समयबद्ध निपटारा और दोषियों के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त सजा तथा भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने सदन को जानकारी दी कि लोकसभा से पारित इस विधेयक पर राज्यसभा में विचार और पारित कराने के लिए कार्य संचालन नियमों के नियम 123 के तहत विशेष छूट प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि इस निर्णय के अनुरूप अनुपूरक कार्यसूची भी जारी कर दी गई है,ताकि विधेयक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सदन में प्रस्तुत कर उस पर चर्चा कराई जा सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि सदस्यों को संशोधन प्रस्ताव देने के लिए विशेष समय दिया गया था और गुरुवार दोपहर तक प्राप्त सभी वैध संशोधन प्रस्तावों को स्वीकार किया गया है।

सरकार की ओर से केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह राज्यसभा में इस महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक को प्रस्तुत करेंगे। माना जा रहा है कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराकर सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत करना चाहती है। हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों के सामने आने के बाद इस विषय को लेकर व्यापक चिंता व्यक्त की जाती रही है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मौजूदा कानून को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है।

प्रस्तावित संशोधन विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सजा और जुर्माने के प्रावधानों को कठोर बनाना है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने,प्रश्न-पत्र लीक करने या ऐसी किसी संगठित आपराधिक गतिविधि में शामिल पाया जाता है,तो उसे न्यूनतम पांच वर्ष के कारावास की सजा दी जाएगी। गंभीर मामलों में यह सजा बढ़ाकर दस वर्ष तक की जा सकेगी। इसके साथ ही आर्थिक दंड को भी काफी बढ़ाया गया है। वर्तमान व्यवस्था में जहाँ अधिकतम जुर्माना दस लाख रुपये तक था,वहीं संशोधन के बाद इसे बढ़ाकर पचास लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि कठोर दंड से ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

विधेयक में केवल सजा बढ़ाने तक ही बदलाव सीमित नहीं है,बल्कि जाँच और न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक तेज और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इसके तहत परीक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों की जाँच प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों में कराई जाएगी,ताकि वर्षों तक मुकदमे लंबित न रहें और दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके। इसके अतिरिक्त अपीलों के निपटारे के लिए भी समयबद्ध व्यवस्था प्रस्तावित की गई है,जिससे न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र लीक होने तथा संगठित गिरोहों द्वारा परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इन घटनाओं ने लाखों मेहनती अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है और सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। ऐसे में आवश्यक हो गया था कि कानून को और अधिक सख्त बनाया जाए ताकि अपराधियों के मन में कानून का भय उत्पन्न हो और परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को बनाए रखा जा सके।

सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने सदन को यह भी बताया कि लोकसभा से पारित विधेयक की प्रति मंगलवार अपराह्न लगभग साढ़े तीन बजे राज्यसभा सदस्यों के पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध करा दी गई थी। हालाँकि,उन्होंने स्वीकार किया कि सदस्यों के पास विधेयक का अध्ययन करने और उसमें संशोधन प्रस्ताव तैयार करने के लिए अपेक्षाकृत कम समय उपलब्ध था। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई, ताकि सभी सदस्य अपनी राय और संशोधन प्रस्ताव समय पर प्रस्तुत कर सकें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो सदस्य इस विधेयक में संशोधन करना चाहते थे,उन्हें गुरुवार दोपहर तक अपने प्रस्ताव राज्यसभा सचिवालय को सौंपने का अवसर दिया गया। यह अतिरिक्त समय इसलिए दिया गया ताकि सचिवालय सभी संशोधन प्रस्तावों की विधिवत जाँच कर सके,उनकी सूची तैयार कर सके और उसे समय रहते सभी सदस्यों के बीच प्रसारित किया जा सके। इससे सदन में चर्चा के दौरान सभी प्रस्तावों पर सुव्यवस्थित तरीके से विचार किया जा सकेगा।

संसदीय प्रक्रिया के तहत इस घोषणा के साथ ही राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा और उसके पारित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यदि राज्यसभा भी इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दे देती है,तो यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर दंड ही पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को भी तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी। डिजिटल निगरानी,सुरक्षित प्रश्न-पत्र वितरण प्रणाली,साइबर सुरक्षा, बायोमेट्रिक सत्यापन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। हालाँकि,उनका यह भी कहना है कि कठोर कानून अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का मजबूत आधार तैयार करेगा।

हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने देशभर में व्यापक विरोध और चिंता को जन्म दिया था। लाखों अभ्यर्थियों ने परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं और इनका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत करना है।

यदि यह विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो जाता है,तो सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त हो जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि कठोर दंड,त्वरित जाँच,फास्ट-ट्रैक अदालतों में शीघ्र सुनवाई और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से पेपर लीक तथा अन्य परीक्षा संबंधी अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही इससे लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों को एक निष्पक्ष,पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।