वाशिंगटन,30 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अपनी नीति को आगे बढ़ाते हुए एक बार फिर बड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है। इस बार वॉशिंगटन ने ईरान की दो प्रमुख समुद्री सेवा कंपनियों और कई अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को निशाना बनाया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ये संस्थाएँ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के समर्थन से ऐसा नेटवर्क चला रही थीं,जिसके माध्यम से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से सुरक्षा और बीमा के नाम पर धन वसूला जाता था। अमेरिका का दावा है कि इस व्यवस्था से जुटाई गई धनराशि का उपयोग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गतिविधियों और ईरान की क्षेत्रीय रणनीतियों को आर्थिक सहायता देने के लिए किया जाता था।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस कार्रवाई के तहत उन आठ कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं,जो ऐसे तेल टैंकरों का संचालन करती हैं,जिन पर ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन जहाजों ने पिछले कुछ वर्षों में लाखों बैरल ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद मुख्य रूप से चीन और संयुक्त अरब अमीरात तक पहुँचाए। अमेरिका का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियाँ ईरान को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने में मदद करती हैं और उसे विदेशी मुद्रा अर्जित करने का अवसर देती हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने जिन दो ईरानी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं,उनमें पर्शियन गल्फ मरीन इंश्योरेंस कंपनी और होर्मुजसेफ मरीन सर्विसेज अथॉरिटी शामिल हैं। विभाग के अनुसार,ये दोनों संस्थाएँ समुद्री जहाजों को सुरक्षा कवरेज और बीमा सेवाएँ उपलब्ध कराने का दावा करती थीं। हालाँकि,अमेरिका का आरोप है कि जिन जोखिमों से सुरक्षा देने की बात कही जाती थी,उनमें से कई जोखिम स्वयं ईरान की गतिविधियों के कारण उत्पन्न होते थे। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि पहले जहाजों के लिए खतरे का माहौल तैयार किया जाता था और बाद में उन्हीं खतरों से सुरक्षा देने के नाम पर व्यापारिक जहाजों से शुल्क वसूला जाता था।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली बेहद चिंताजनक थी। उनके अनुसार,पहले जहाजों को जब्त किए जाने या अन्य सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ता था और बाद में उन्हीं परिस्थितियों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए उनसे धन लिया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी व्यवस्था से मिलने वाली आय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गतिविधियों को वित्तीय सहायता देती थी और क्षेत्र में ईरान की उन नीतियों को मजबूत करती थी,जिन्हें अमेरिका अस्थिरता फैलाने वाला मानता है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी इस कार्रवाई को लेकर विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार का उपयोग करके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के लिए धन जुटाने से रोकना है। उनके अनुसार ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रही है और देश में महँगाई भी ऊँचे स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में शासन को आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता है और वह विभिन्न माध्यमों से धन जुटाने की कोशिश कर रहा है। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में यह स्वीकार नहीं करेगा कि वैश्विक व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग नेटवर्क का उपयोग ऐसे उद्देश्यों के लिए किया जाए,जिनसे क्षेत्रीय अस्थिरता या हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा मिले।
ट्रेजरी विभाग के अनुसार,पर्शियन गल्फ मरीन इंश्योरेंस कंपनी उन बीमा योजनाओं की दलाली करती है,जिन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स समर्थित पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी की मंजूरी प्राप्त होती थी। अमेरिकी प्रशासन पहले ही इस अथॉरिटी पर मई में प्रतिबंध लगा चुका था। अब उससे जुड़े संस्थानों पर कार्रवाई करते हुए अमेरिका ने अपने प्रतिबंधों का दायरा और व्यापक कर दिया है।
होर्मुजसेफ मरीन सर्विसेज अथॉरिटी पर भी अमेरिका ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रेजरी विभाग का कहना है कि यह संस्था जहाजों के लिए बीमा,यातायात नियंत्रण,समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं का प्रचार करती थी। इसके अलावा अमेरिका ने दावा किया है कि यह कंपनी पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए वित्तीय प्रतिबंधों से बचने के लिए बिटकॉइन और अन्य डिजिटल संपत्तियों के रूप में भी भुगतान स्वीकार करती थी। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि डिजिटल मुद्राओं का उपयोग अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा था।
अमेरिका की ताजा कार्रवाई केवल ईरान तक सीमित नहीं है। इस प्रतिबंध सूची में चीन, हांगकांग और मार्शल आइलैंड्स में स्थित कई कंपनियाँ भी शामिल हैं। इन कंपनियों से जुड़े आठ तेल टैंकरों पर आरोप है कि उन्होंने 2022 से 2026 के बीच ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन किया। इन जहाजों का संचालन विभिन्न देशों के झंडों के तहत किया जाता रहा। कुछ जहाज बारबाडोस के ध्वज तले चलते थे,जबकि कुछ मोजाम्बिक,वनुआतु और मार्शल आइलैंड्स के झंडे के अंतर्गत संचालित किए जा रहे थे। एक जहाज का ध्वज स्पष्ट नहीं बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के बहु-देशीय पंजीकरण का उपयोग वास्तविक संचालन और स्वामित्व को छिपाने के लिए किया जाता है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने इन जहाजों को ईरान के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा बताया है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने और तेल निर्यात जारी रखने के लिए एक समानांतर समुद्री नेटवर्क विकसित किया है। इस नेटवर्क में ऐसे जहाज शामिल होते हैं,जो विभिन्न देशों के झंडों का उपयोग करते हैं,बार-बार अपना पंजीकरण बदलते हैं और कई बार अपने वास्तविक मार्ग तथा माल की जानकारी भी छिपाते हैं। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस प्रणाली के माध्यम से ईरान अपने ऊर्जा निर्यात को जारी रखता है और प्रतिबंधों के बावजूद राजस्व अर्जित करता है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी कहा कि नई कार्रवाई ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में अमेरिकी नौसेना तथा अन्य एजेंसियों द्वारा किए जा रहे प्रतिबंध प्रवर्तन अभियानों को और मजबूत करेगी। अमेरिका का कहना है कि समुद्री मार्गों के माध्यम से प्रतिबंधों को दरकिनार करने के प्रयासों पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऐसे किसी भी नेटवर्क के खिलाफ भविष्य में भी कार्रवाई जारी रहेगी।
वॉशिंगटन के अनुसार,इस वर्ष अब तक ईरान के शैडो फ्लीट से जुड़े 100 से अधिक जहाजों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि अमेरिका ईरान के तेल निर्यात और समुद्री व्यापार से जुड़े नेटवर्क पर लगातार दबाव बनाए हुए है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन प्रतिबंधों के जरिए ईरान की उन आर्थिक गतिविधियों को सीमित किया जा सकता है,जिनका उपयोग उसकी सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीतियों को वित्तीय समर्थन देने के लिए किया जाता है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है,जब पश्चिम एशिया में पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है,जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव या प्रतिबंध अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार,समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए अमेरिका की नई कार्रवाई को केवल द्विपक्षीय विवाद नहीं,बल्कि व्यापक अंतर्राष्ट्रीय रणनीति के हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है।
अमेरिका लंबे समय से ईरान पर यह आरोप लगाता रहा है कि वह प्रतिबंधों से बचने के लिए वैकल्पिक व्यापारिक और वित्तीय नेटवर्क का उपयोग करता है। दूसरी ओर,ईरान लगातार यह कहता रहा है कि अमेरिकी प्रतिबंध एकतरफा और अनुचित हैं तथा वे उसके वैध आर्थिक अधिकारों को प्रभावित करते हैं। इस पृष्ठभूमि में अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंध दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान के समुद्री व्यापार,तेल निर्यात और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर अपनी निगरानी और कार्रवाई जारी रखेगा। दूसरी ओर,इस कदम का प्रभाव अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों,ऊर्जा बाजारों और उन देशों पर भी पड़ सकता है, जो ईरानी तेल के आयात या समुद्री व्यापार से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रतिबंधों का वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की क्षेत्रीय राजनीति पर कितना व्यापक असर पड़ता है।
