राँची,7 अगस्त (युआईटीवी)- झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग को लेकर शुक्रवार को राजधानी राँची एक बार फिर छात्र आंदोलन का केंद्र बन गई। झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में कई छात्र संगठनों ने विधानसभा मार्च का आह्वान किया। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आयोजित इस प्रदर्शन को लेकर सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्र राँची के बिरसा चौक पर जुटने लगे। प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और विधानसभा की ओर जाने वाले पूरे मार्ग पर पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है।
यह विधानसभा मार्च वामपंथी छात्र संगठनों आइसा,आरवाईए,एआईएसएफ तथा झारखंड जनाधिकार महासभा के संयुक्त आह्वान पर आयोजित किया गया। आंदोलन में विभिन्न जिलों से छात्र और युवा शामिल होने के लिए राजधानी पहुँचे। प्रदर्शन में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हुईं और उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग को लेकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने दोपहर 12 बजे बिरसा चौक से विधानसभा की ओर मार्च निकालने की घोषणा की,जिसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
छात्र संगठनों का आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियाँ सामने आती रही हैं,जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार को ठोस और पारदर्शी कदम उठाने होंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से परीक्षा कैलेंडर का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है,जिसके कारण अभ्यर्थियों को मानसिक,आर्थिक और शैक्षणिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारी विशेष रूप से 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की माँग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं और इसकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। इसी कारण छात्र संगठनों ने पूरे मामले की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय से कराने की माँग उठाई है। साथ ही अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट सार्वजनिक करने की माँग भी प्रमुख रूप से की जा रही है,ताकि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि परीक्षाओं से संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक होंगी तो अभ्यर्थियों का विश्वास भी बहाल होगा।
इसके अलावा छात्र संगठनों ने सरकार से यह भी माँग की है कि परीक्षा कैलेंडर का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि समय पर परीक्षाएँ और परिणाम घोषित नहीं होने से युवाओं का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है और रोजगार की प्रक्रिया लगातार प्रभावित होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है,इसलिए आयोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रस्तावित इस प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की है। बिरसा चौक से विधानसभा तक के पूरे क्षेत्र में 6 अगस्त से 12 अगस्त तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई है। इस अवधि के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन,जुलूस या भीड़ एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन का उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को सुचारु रूप से संचालित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
सुरक्षा के मद्देनजर विधानसभा मार्ग और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है,ताकि प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सके। यातायात व्यवस्था को भी नियंत्रित करने के लिए विशेष योजना बनाई गई है। पुलिस अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है और कानून का पालन करने का आग्रह किया है।
इस बीच मौसम ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने राँची और आसपास के क्षेत्रों में बारिश तथा वज्रपात की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। खराब मौसम के कारण यातायात प्रभावित होने की आशंका है,वहीं बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियाँ अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। प्रशासन ने लोगों से मौसम संबंधी सलाह का पालन करने और अनावश्यक जोखिम से बचने की अपील की है।
छात्र आंदोलन के बीच एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि परीक्षा सुधारों को लेकर आंदोलन कर रहे विभिन्न छात्र संगठनों के बीच रणनीति को लेकर मतभेद दिखाई दे रहे हैं। पिछले लगभग दो सप्ताह से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन कर रहे मूल छात्र समूह जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने शुक्रवार के विधानसभा मार्च से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। मंच की कोर कमेटी ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और वे किसी भी राजनीतिक दल अथवा उससे जुड़े छात्र संगठन के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।
रिफॉर्म्स मंच का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना है। इसलिए वे अपने आंदोलन की स्वतंत्र पहचान बनाए रखना चाहते हैं। मंच ने घोषणा की है कि वह 10 अगस्त को अपना अलग विधानसभा महा-घेराव आयोजित करेगा,जिसमें राज्यभर के प्रतियोगी छात्रों को शामिल होने का आह्वान किया गया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुँचाया जाएगा।
राजनीतिक और गैर-राजनीतिक छात्र समूहों के अलग-अलग कार्यक्रमों के बावजूद दोनों पक्षों की मूल मांगें लगभग समान हैं। सभी छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्ध भर्ती,निष्पक्ष जाँच और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार परीक्षा विवाद सामने आने से राज्य के लाखों युवाओं का भरोसा भर्ती एजेंसियों पर कमजोर हुआ है,जिसे बहाल करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं।
फिलहाल राँची में छात्र आंदोलन और विधानसभा सत्र के चलते पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है। एक ओर छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार परीक्षा सुधारों और छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है तथा संवाद और समाधान की दिशा में कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।
