नई दिल्ली,7 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए पीआईई फूड्स को अपने मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट स्वीटनर और मोंक फ्रूट स्वीटनर ड्रॉप्स की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है। खाद्य नियामक ने यह फैसला कंपनी के संचालन,लाइसेंसिंग,लेबलिंग और विज्ञापन से जुड़े कई गंभीर उल्लंघन सामने आने के बाद लिया है। एफएसएसएआई का कहना है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी खाद्य कारोबारियों को निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। यदि कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एफएसएसएआई के अनुसार,निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि पीआईई फूड्स अपने मोंक फ्रूट आधारित उत्पादों का विपणन ऐसे लाइसेंस के आधार पर कर रही थी,जिसमें आवश्यक रीलेबलर अनुमोदन शामिल नहीं था। नियामक ने स्पष्ट किया कि किसी भी खाद्य उत्पाद के विपणन और बिक्री के लिए निर्धारित लाइसेंसिंग शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। यदि किसी कंपनी के लाइसेंस में आवश्यक अनुमोदन शामिल नहीं हैं,तो वह संबंधित उत्पादों का निर्माण,पैकेजिंग या विपणन नहीं कर सकती।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री कर रही थी,जबकि उसके एफएसएसएआई लाइसेंस में ई-कॉमर्स व्यवसाय के लिए आवश्यक स्वीकृति उपलब्ध नहीं थी। एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की गई जानकारी में कहा कि किसी भी खाद्य व्यवसाय संचालक को ऑनलाइन माध्यम से उत्पाद बेचने के लिए अलग से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करना होता है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऑनलाइन बिक्री के दौरान भी खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े सभी मानकों का पालन किया जाए।
खाद्य नियामक ने उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी कई कमियाँ पाई हैं। एफएसएसएआई के अनुसार,संबंधित उत्पादों के लेबल पर वे अनिवार्य जानकारियाँ उपलब्ध नहीं थीं, जिन्हें नियमों के तहत प्रदर्शित करना आवश्यक होता है। इसके अलावा उत्पादों पर “100 प्रतिशत मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट” और “प्राकृतिक सामग्री” जैसे दावे किए गए थे। नियामक का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर किए जाने वाले दावों के लिए निर्धारित वैज्ञानिक और नियामकीय मानकों का पालन करना आवश्यक होता है। यदि ऐसे दावों के समर्थन में पर्याप्त स्वीकृति या प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं,तो उन्हें भ्रामक माना जा सकता है।
एफएसएसएआई ने यह भी पाया कि कंपनी अपने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर “डॉक्टर द्वारा अनुशंसित” जैसे प्रचारात्मक दावों का उपयोग कर रही थी। नियामक के अनुसार,इस प्रकार के दावों के लिए भी स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं और बिना आवश्यक अनुमति या प्रमाण के ऐसे दावे करना खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन और दावे विनियम, 2018 का उल्लंघन माना जाता है। साथ ही यह खाद्य सुरक्षा एवं मानक लेबलिंग और प्रदर्शन विनियम,2020 के भी अनुरूप नहीं पाया गया।
इन सभी उल्लंघनों को गंभीर मानते हुए एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत पीआईई फूड्स को निर्देश दिया है कि वह अपने मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट स्वीटनर और मोंक फ्रूट स्वीटनर ड्रॉप्स की बिक्री तत्काल प्रभाव से बंद करे। नियामक ने स्पष्ट किया है कि कंपनी तब तक इन उत्पादों की बिक्री दोबारा शुरू नहीं कर सकेगी,जब तक वह सभी आवश्यक नियामकीय शर्तों को पूरा करते हुए वैध एफएसएसएआई केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त नहीं कर लेती।
एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि बिक्री फिर से शुरू करने से पहले कंपनी को मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट के उपयोग के लिए आवश्यक नियामकीय मंजूरी प्राप्त करनी होगी। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट को गैर-निर्दिष्ट खाद्य सामग्री की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मामलों में किसी भी खाद्य सामग्री के उपयोग से पहले नियामक की स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध उत्पाद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हों और उनके संबंध में किए गए दावे वैज्ञानिक आधार पर सही हों।
एफएसएसएआई ने अपने बयान में दोहराया कि उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी देश के उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न खाद्य उत्पादों,निर्माण इकाइयों और कंपनियों का निरीक्षण किया जाता है। यदि जाँच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया जाता है,तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाती है। नियामक का कहना है कि खाद्य व्यवसाय संचालकों को लाइसेंसिंग,उत्पादन,पैकेजिंग,लेबलिंग, विज्ञापन और ऑनलाइन बिक्री से जुड़े सभी नियमों का पालन करना चाहिए,ताकि उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण प्राकृतिक और कम कैलोरी वाले स्वीटनर की माँग तेजी से बढ़ी है। मोंक फ्रूट आधारित उत्पाद भी इसी श्रेणी में लोकप्रिय हो रहे हैं। ऐसे में यह और अधिक आवश्यक हो जाता है कि इन उत्पादों के निर्माण और विपणन में पारदर्शिता बनी रहे तथा उपभोक्ताओं को सही और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराई जाए। यदि किसी उत्पाद के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर या भ्रामक दावे किए जाते हैं,तो इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं और उनकी खरीद संबंधी निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
यह पहली बार नहीं है,जब एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाया हो। इससे पहले भी नियामक ने विभिन्न कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस निलंबित किए हैं। हाल ही में स्विट्ज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के विनिर्माण संयंत्र के निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों के गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर उसका खाद्य कारोबार लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई ने यह संकेत दिया था कि नियामक खाद्य उद्योग में गुणवत्ता और सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को स्वीकार नहीं करेगा।
पीआईई फूड्स के खिलाफ की गई ताजा कार्रवाई भी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। एफएसएसएआई का स्पष्ट संदेश है कि बाजार में किसी भी खाद्य उत्पाद की बिक्री से पहले सभी वैधानिक स्वीकृतियाँ प्राप्त करना,सही लेबलिंग करना और विज्ञापन संबंधी नियमों का पालन करना प्रत्येक खाद्य व्यवसाय संचालक की जिम्मेदारी है। नियामक का मानना है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करता है,बल्कि खाद्य उद्योग में पारदर्शिता और विश्वास को भी मजबूत बनाता है। आने वाले समय में भी एफएसएसएआई ऐसे मामलों में निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई जारी रखेगा,ताकि देश में खाद्य सुरक्षा के मानकों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
