वाशिंगटन,7 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता के दायरे को सीमित करने के उद्देश्य से दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है,जब कुछ समय पहले ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके प्रशासन के पिछले कार्यकारी आदेश को खारिज करते हुए जन्मसिद्ध नागरिकता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को बरकरार रखा था। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नए आदेशों का उद्देश्य अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में सुधार करना,कथित दुरुपयोग को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सख्ती बरतना है।
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में नए आदेशों पर हस्ताक्षर करने के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके प्रशासन के लिए निराशाजनक रहा और अब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी सरकार इस विषय पर अपनी नीति को आगे भी जारी रखेगी और आवश्यक कानूनी कदम उठाती रहेगी।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार,पहले कार्यकारी आदेश का मुख्य उद्देश्य तथाकथित “बर्थ टूरिज्म” पर रोक लगाना है। प्रशासन के अनुसार,बर्थ टूरिज्म उस स्थिति को कहा जाता है,जब कोई विदेशी नागरिक अस्थायी या गैर-आप्रवासी वीजा पर केवल इस उद्देश्य से अमेरिका आता है कि उसका बच्चा अमेरिकी धरती पर जन्म ले और जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर सके। प्रशासन का दावा है कि इस व्यवस्था का कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से लाभ उठा रहे हैं,जिससे आव्रजन प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
नए आदेश के तहत उन गतिविधियों को भी दायरे में लाया गया है,जिनमें किसी विदेशी नागरिक के ऐसे प्रवेश को सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जाता है। प्रशासन का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियाँ अमेरिकी कानूनों की भावना के अनुरूप नहीं हैं और इन पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। सरकार का मानना है कि इस कदम से जन्मसिद्ध नागरिकता का कथित दुरुपयोग कम किया जा सकेगा।
दूसरा कार्यकारी आदेश जन्म के आधार पर नागरिकता प्राप्त करने के लिए अयोग्य माने जाने वाले लोगों की परिभाषा का विस्तार करता है। व्हाइट हाउस के अनुसार,इस नई व्यवस्था में विदेशी सरकारों के कर्मचारियों के बच्चों,घोषित विदेशी आतंकवादी संगठनों के सदस्यों के बच्चों तथा ऐसे व्यक्तियों के बच्चों को शामिल किया गया है,जिन्होंने कथित रूप से धोखाधड़ी के माध्यम से अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की हो। प्रशासन का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और नागरिकता संबंधी नियमों को अधिक स्पष्ट बनाना है।
जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा अमेरिका में लंबे समय से संवैधानिक बहस का विषय रहा है। अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन वर्ष 1868 में लागू किया गया था। इस संशोधन के अनुसार,अमेरिका में जन्म लेने वाले या वहाँ की नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्ति,जो अमेरिकी कानूनों के अधीन हैं,अमेरिका और उस राज्य के नागरिक माने जाएँगे जहाँ वे निवास करते हैं। इसी संवैधानिक प्रावधान के आधार पर लंबे समय से अमेरिका में जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता प्रदान की जाती रही है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 20 जनवरी 2025 को करते ही जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर पहला कार्यकारी आदेश जारी किया था। उस आदेश में कहा गया था कि अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों या अस्थायी वीजा पर मौजूद व्यक्तियों के यहाँ जन्मे बच्चों को 14वें संशोधन और आव्रजन एवं राष्ट्रीयता अधिनियम के तहत स्वतः नागरिकता का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि संविधान के प्रावधानों की नई व्याख्या आवश्यक है और वर्तमान व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है।
हालाँकि,ट्रंप प्रशासन के इस आदेश को अदालतों में चुनौती दी गई। कई माता-पिता ने अपने और अपने बच्चों की ओर से याचिकाएँ दायर करते हुए दावा किया कि यह आदेश संविधान में दिए गए अधिकारों का उल्लंघन करता है। विभिन्न संघीय निचली अदालतों ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। परिणामस्वरूप ट्रंप प्रशासन का वह कार्यकारी आदेश कभी प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सका।
इसके बाद मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने छह के मुकाबले तीन न्यायाधीशों के बहुमत से ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया,जिसमें बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों या अस्थायी निवासियों के यहाँ जन्मे बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जन्मसिद्ध नागरिकता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को बरकरार रखा और यह स्पष्ट किया कि इस विषय पर संविधान के मौजूदा प्रावधान लागू रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद माना जा रहा था कि जन्मसिद्ध नागरिकता का विवाद कुछ समय के लिए शांत हो जाएगा,लेकिन ट्रंप प्रशासन ने अब नए कार्यकारी आदेशों के माध्यम से इस मुद्दे को फिर केंद्र में ला दिया है। प्रशासन का कहना है कि नए आदेश पहले वाले आदेश से अलग हैं और इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा,आव्रजन नियंत्रण तथा नागरिकता संबंधी पात्रता के नए पहलुओं को शामिल किया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए आदेशों को भी अदालतों में चुनौती मिलने की संभावना है। अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का आधार संविधान का 14वां संशोधन है, इसलिए कार्यकारी आदेशों के माध्यम से इसके दायरे में किसी भी प्रकार के बदलाव को न्यायिक समीक्षा का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन आदेशों के विरुद्ध नई याचिकाएँ दायर होती हैं,तो यह मामला एक बार फिर संघीय अदालतों और संभवतः सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आव्रजन नीति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा रही है। अपने पहले कार्यकाल से लेकर दूसरे कार्यकाल तक उन्होंने सीमा सुरक्षा,अवैध प्रवास पर नियंत्रण और नागरिकता संबंधी नियमों को सख्त बनाने पर लगातार जोर दिया है। नए कार्यकारी आदेश भी इसी व्यापक नीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। दूसरी ओर,विपक्षी दलों और प्रवासी अधिकारों से जुड़े संगठनों का कहना है कि जन्मसिद्ध नागरिकता अमेरिकी संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है और इसे सीमित करने का कोई भी प्रयास संवैधानिक मूल्यों के विपरीत होगा।
फिलहाल ट्रंप प्रशासन के नए आदेशों ने अमेरिका में आव्रजन नीति,संवैधानिक अधिकारों और नागरिकता संबंधी कानूनों पर बहस को फिर तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इन आदेशों को कानूनी चुनौती मिलती है या नहीं और अमेरिकी न्यायपालिका इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाती है। इतना तय है कि जन्मसिद्ध नागरिकता का प्रश्न आने वाले समय में भी अमेरिका की राजनीति,न्याय व्यवस्था और आव्रजन नीति के केंद्र में बना रहेगा।
