वॉशिंगटन,11 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना के पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है। उन्होंने तेहरान की ओर से अमेरिका से मुआवजे की मांग को भी खारिज कर दिया और इसके उलट पिछले 50 वर्षों में ईरान की कार्रवाइयों से प्रभावित लोगों के लिए ईरान से मुआवजा मांगे जाने की बात कही। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उनके बयान के बाद पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि ईरान के साथ हालिया बातचीत के बाद क्या आगे भी बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। इस पर उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ऐसा करना चाहे तो उसके पास निश्चित रूप से इसकी क्षमता मौजूद है। हालाँकि,उन्होंने संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत योजना या समयसीमा नहीं बताई। ट्रंप ने कहा कि यदि ऐसा कुछ होता है तो लोगों को उसके बारे में पता चल जाएगा। उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य विकल्प खुले रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के दौरान मुआवजे के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका की ओर से किए गए नुकसान के लिए पैसे या मुआवजे की माँग की है। ट्रंप ने इस माँग को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि मुआवजे की बात हो रही है तो पिछले कई दशकों में ईरान की कार्रवाइयों से प्रभावित लोगों के परिवारों को भी मुआवजा मिलना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में ईरान की गतिविधियों से जिन लोगों की मौत हुई या जो घायल हुए,उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने उन प्रदर्शनकारियों का भी उल्लेख किया,जिनके बारे में उनका दावा है कि ईरान में अशांति के दौरान उनकी जान गई। ट्रंप ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति,बच्चे,माँ या पिता की मौत हुई है,तो उनके परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए और ऐसी स्थिति में भुगतान ईरान को करना चाहिए।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका भविष्य की किसी भी बातचीत में इस माँग को मजबूती से रख सकता है। उन्होंने पहले भी ईरान से मुआवजा माँगने की बात कही थी और अब व्हाइट हाउस में दिए बयान के दौरान उन्होंने इसे दोहराया। हालाँकि,उन्होंने बातचीत की मौजूदा स्थिति या दोनों पक्षों के बीच किसी संभावित समझौते की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उठाई गई माँगों के बीच ट्रंप ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नियंत्रण का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला हुआ है,लेकिन वहाँ से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है। ट्रंप ने दावा किया कि इस समय इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण रखने वाला एकमात्र पक्ष अमेरिकी नौसेना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी कथित नाकाबंदी को बेहद मजबूत बताते हुए इसे स्टील की दीवार जैसा बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका उन्हीं लोगों या जहाजों को इस क्षेत्र में आने की अनुमति देता है,जिन्हें वह अनुमति देना चाहता है। उनके अनुसार,जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जा रही है,लेकिन उन्हें ईरान की ओर जाने की अनुमति नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति इस मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में यहाँ किसी भी तरह का सैन्य तनाव या समुद्री यातायात में बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाकर जहाजों की आवाजाही को बाधित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बलों ने क्षेत्र में ऐसी सुरंगों की तलाश और सफाई का काम किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बारूदी सुरंगों से मुक्त कर दिया गया है और इस समय अमेरिका का वहाँ 100 प्रतिशत नियंत्रण है। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।
ईरान को लेकर ट्रंप ने आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणियाँ कीं। उन्होंने दावा किया कि ईरान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और उसके पास अपने सैनिकों को वेतन देने में भी मुश्किल हो रही है। उन्होंने ईरान में महंगाई दर 300 प्रतिशत से अधिक होने का दावा किया। हालाँकि,उपलब्ध प्रतिलेख में इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है। इसलिए इन दावों को फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के रूप में ही देखा जा रहा है।
ट्रंप ने ईरान की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश के पास पर्याप्त धन नहीं है और वह आर्थिक रूप से बुरी स्थिति में पहुँच चुका है। उन्होंने ईरान पर पिछले 50 वर्षों से पश्चिम एशिया में अस्थिरता पैदा करने का आरोप भी लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि ईरान की गतिविधियों के कारण लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और अब उन घटनाओं के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
अमेरिका और ईरान के बीच मुआवजे का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है,जब दोनों देशों के बीच तनाव कई स्तरों पर बढ़ा हुआ है। ईरान की ओर से जहाँ अमेरिका से कथित सैन्य कार्रवाई और उससे हुए नुकसान के लिए मुआवजे की माँग किए जाने की बात सामने आई है,वहीं ट्रंप इसके उलट अमेरिका को हुए नुकसान के लिए ईरान से भुगतान की माँग कर रहे हैं। इससे दोनों पक्षों के बीच बातचीत और अधिक जटिल हो सकती है।
ट्रंप ने हालाँकि,यह स्पष्ट नहीं किया कि मुआवजे की राशि कितनी होगी या इसे किस आधार पर तय किया जाएगा। उन्होंने केवल इतना कहा कि अमेरिका पिछले पांच दशकों में ईरान की कार्रवाइयों से प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की माँग करेगा। उन्होंने उन लोगों और परिवारों का उल्लेख किया,जिन्हें उनके अनुसार ईरान की गतिविधियों के कारण नुकसान उठाना पड़ा।
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप का बयान रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी कारण से इस मार्ग पर समुद्री यातायात प्रभावित होता है तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी आ सकती है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग की अहमियत को देखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी नए तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता।
ट्रंप ने अपने बयान में सैन्य कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया। हालाँकि,उन्होंने यह भी नहीं बताया कि अमेरिका आगे क्या कदम उठाएगा। उनके इस रुख से यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन ईरान पर दबाव बनाए रखने के साथ-साथ सैन्य विकल्प को भी खुला रखना चाहता है। दूसरी ओर,ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट किए जाने की संभावना है।
कुल मिलाकर,ट्रंप के ताजा बयान ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। एक तरफ अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण का दावा कर रहा है,वहीं दूसरी ओर ईरान से मुआवजे की माँग कर रहा है। इसके साथ ही बड़े स्तर की सैन्य कार्रवाई की क्षमता होने का संकेत देकर ट्रंप ने तेहरान पर दबाव बनाए रखने का संदेश दिया है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे किस दिशा में जाती है और क्या मुआवजे,समुद्री मार्ग और सैन्य तनाव जैसे मुद्दों पर कोई समझौता हो पाता है या पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।
