नई दिल्ली,11 अगस्त (युआईटीवी)- देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी एचसीएलटेक ने कर्मचारियों से जुड़े डेटा के कथित लीक को लेकर सोमवार को महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया। कंपनी ने कहा कि एक हैकर समूह की ओर से कर्मचारियों से संबंधित डेटा सार्वजनिक किए जाने के दावों के बाद की गई शुरुआती जांच में उसके किसी भी आईटी सिस्टम में सेंधमारी या अनधिकृत प्रवेश के प्रमाण नहीं मिले हैं। कंपनी के मुताबिक,अब तक की जाँच में न तो उसके आंतरिक सिस्टम प्रभावित होने के संकेत मिले हैं और न ही किसी ग्राहक की परियोजना या डिजिटल वातावरण पर इस कथित घटना का असर सामने आया है।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि हाल में कुछ मीडिया रिपोर्टों में एक हैकर समूह के दावे का उल्लेख किया गया था। इन रिपोर्टों में कंपनी के कर्मचारियों से संबंधित कुछ डेटा के संभावित रूप से सार्वजनिक होने की बात कही गई थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद एचसीएलटेक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जाँच शुरू की। कंपनी ने कहा कि साइबर सुरक्षा से जुड़े किसी भी दावे की जाँच उसकी स्थापित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।
एचसीएलटेक के अनुसार,प्रारंभिक जाँच से संकेत मिलता है कि कथित तौर पर सामने आया डेटा सीमित मात्रा में हो सकता है और पहली नजर में यह कई वर्ष पुराना प्रतीत होता है। कंपनी ने हालाँकि,यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित डेटा में कितने कर्मचारियों की जानकारी शामिल हो सकती है या उसमें किस प्रकार की सूचनाएँ मौजूद थीं। विस्तृत जाँच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
कंपनी ने अपने बयान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि अभी तक उसके किसी भी सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश या साइबर सुरक्षा उल्लंघन का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसका मतलब है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर कंपनी के आंतरिक आईटी ढाँचे में किसी सक्रिय सेंधमारी की पुष्टि नहीं हुई है। एचसीएलटेक ने यह भी कहा कि उसके ग्राहकों की परियोजनाओं और उनके डिजिटल वातावरण पर भी किसी तरह का असर सामने नहीं आया है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत जाँच अभी जारी है। साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी घटना की वास्तविक प्रकृति,डेटा के स्रोत और उसके सार्वजनिक होने की परिस्थितियों को समझने के लिए तकनीकी स्तर पर कई पहलुओं की जाँच की जाती है। एचसीएलटेक भी कथित डेटा से संबंधित जानकारी की समीक्षा कर रही है। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि यदि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है,तो नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप उसका खुलासा किया जाएगा।
एचसीएलटेक ने अपने बयान में साइबर सुरक्षा को कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताया। कंपनी ने कहा कि उसे सौंपी गई सूचनाओं की सुरक्षा के लिए वह पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण विषय बन चुका है,क्योंकि इन कंपनियों के पास कर्मचारियों,ग्राहकों और कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी बड़ी मात्रा में डिजिटल जानकारी होती है।
एचसीएलटेक का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब देश की बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियाँ साइबर हमलों और डेटा लीक से जुड़े दावों को लेकर लगातार सतर्कता बरत रही हैं। हाल ही में देश की एक अन्य प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को भी इसी तरह के दावों के बाद स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था। उस मामले में भी कंपनी ने अपनी जाँच के आधार पर कहा था कि उसके सिस्टम या ग्राहकों के डिजिटल वातावरण में सेंधमारी का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अपनी जाँच के दौरान यह भी बताया था कि साइबर खुफिया अलर्ट में जिन सूचनाओं का उल्लेख किया गया था, वे चार वर्ष से अधिक पुरानी थीं। कंपनी के अनुसार,कथित तौर पर सामने आई जानकारी केवल बुनियादी कर्मचारी विवरण तक सीमित थी। उसने स्पष्ट किया था कि ग्राहक डेटा,ग्राहक प्रणालियाँ और कंपनी के परिचालन सिस्टम इस मामले से प्रभावित नहीं हुए।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मामले में कथित हमलावर की ओर से कुछ तकनीकों के इस्तेमाल का दावा भी किया गया था। इनमें पासवर्ड स्प्रेइंग और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन फटीग जैसी तकनीकों का उल्लेख था। हालाँकि,कंपनी की जाँच में इन दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि साइबर हमले से जुड़े ऑनलाइन दावों और वास्तविक तकनीकी सेंधमारी के बीच अंतर करना बेहद महत्वपूर्ण है।
एचसीएलटेक के मामले में भी कंपनी ने फिलहाल किसी तरह की सेंधमारी की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में कंपनी का शुरुआती रुख यही है कि कथित रूप से सार्वजनिक हुई जानकारी सीमित और पुरानी हो सकती है। हालाँकि,अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। कंपनी द्वारा नियामकीय आवश्यकताओं के तहत भविष्य में कोई और जानकारी साझा किए जाने की संभावना भी बनी हुई है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण चुनौती यह होती है कि किसी पुराने कर्मचारी डेटाबेस या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी को नया डेटा लीक बताकर पेश किया जा सकता है। इसलिए किसी हैकर समूह के दावे की स्वतंत्र तकनीकी जाँच आवश्यक होती है। केवल किसी समूह की ओर से डेटा सार्वजनिक करने का दावा कर देने से यह साबित नहीं होता कि संबंधित कंपनी के मौजूदा सिस्टम में सेंधमारी हुई है।
आईटी कंपनियों के लिए कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी भी संवेदनशील हो सकती है। नाम,संपर्क विवरण,कर्मचारी पहचान संबंधी जानकारी या अन्य बुनियादी विवरण पुराने डेटाबेस में मौजूद हो सकते हैं। यदि ऐसी जानकारी सार्वजनिक होती है तो उसका इस्तेमाल फिशिंग,पहचान की नकल या अन्य साइबर धोखाधड़ी के प्रयासों में किया जा सकता है। यही वजह है कि कंपनियाँ ऐसे दावों को लेकर जाँच और निगरानी को गंभीरता से लेती हैं।
इस बीच एचसीएलटेक के शेयरों में इस खबर के बीच सकारात्मक रुख देखने को मिला। खबर लिखे जाने के समय कंपनी के शेयर राष्ट्रीय शेयर बाजार पर 0.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,365 रुपये के स्तर पर कारोबार करते नजर आए। बाजार में कंपनी के शेयरों की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है,खासकर ऐसे समय में जब साइबर सुरक्षा से जुड़े दावे सामने आए हैं।
कंपनी की ओर से फिलहाल ग्राहकों को लेकर भी राहत की बात कही गई है। एचसीएलटेक ने स्पष्ट किया है कि अब तक किसी ग्राहक की परियोजना या डिजिटल वातावरण पर प्रभाव का कोई संकेत नहीं मिला है। सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों के लिए यह पहलू विशेष रूप से महत्वपूर्ण है,क्योंकि ग्राहक प्रणालियों की सुरक्षा और डेटा की गोपनीयता उनके कारोबारी संबंधों की बुनियाद होती है।
अब सबकी नजर एचसीएलटेक की विस्तृत जाँच के अंतिम निष्कर्ष पर है। यदि जांच में कोई नया तथ्य सामने आता है,तो कंपनी नियामकीय नियमों के तहत उसकी जानकारी साझा करेगी। फिलहाल कंपनी का आधिकारिक रुख यह है कि उसके सिस्टम में किसी तरह की सेंधमारी का प्रमाण नहीं मिला है और कथित तौर पर सामने आया डेटा सीमित तथा पुराना हो सकता है।
कुल मिलाकर,एचसीएलटेक ने कर्मचारियों के डेटा से जुड़े कथित लीक को लेकर बाजार और अपने हितधारकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि शुरुआती जाँच में कंपनी के आईटी सिस्टम या ग्राहकों के डिजिटल वातावरण के प्रभावित होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। हालाँकि,जाँच अभी जारी है,इसलिए अंतिम निष्कर्ष आने तक मामले पर नजर बनी रहेगी। बढ़ते साइबर खतरों के दौर में यह घटना एक बार फिर बताती है कि डेटा सुरक्षा,लगातार निगरानी और किसी भी संभावित सुरक्षा दावे की तत्काल जाँच आईटी कंपनियों के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो गई है।
