वॉशिंगटन,12 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2028 में तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की इच्छा से इनकार नहीं किया है। हालाँकि,उन्होंने खुद स्वीकार किया कि अमेरिकी संविधान में मौजूद प्रावधानों के कारण उनके लिए ऐसा करना बेहद मुश्किल होगा। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या वह वास्तव में 2028 में फिर से चुनाव लड़ने को लेकर गंभीर हैं,तो उन्होंने कहा कि वह ऐसा करना पसंद करेंगे,लेकिन इस मामले में कानून काफी सख्त है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या ट्रंप संवैधानिक सीमा के बावजूद तीसरे कार्यकाल की कोशिश करेंगे।
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उनसे लगातार 2028 में चुनाव लड़ने को लेकर सवाल पूछा जाता है। उन्होंने कहा कि कानून इस मामले में बहुत मजबूत है। ट्रंप ने कहा, “मैं फिर से चुनाव लड़ना पसंद करूँगा,लेकिन कानून बहुत मजबूत है।” हालाँकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को बदलने या उसे चुनौती देने की किसी कोशिश पर विचार कर रहे हैं या नहीं। उनके बयान से फिलहाल इतना संकेत मिलता है कि तीसरे कार्यकाल की इच्छा उनके मन में जरूर है,लेकिन वह स्वयं भी इसके सामने मौजूद कानूनी बाधा को स्वीकार कर रहे हैं।
अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन राष्ट्रपति के कार्यकाल की सीमा तय करता है। इसके तहत कोई व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति निर्वाचित नहीं हो सकता। यह संशोधन वर्ष 1951 में लागू किया गया था। इसके पीछे तत्कालीन ऐतिहासिक परिस्थितियाँ भी महत्वपूर्ण थीं। पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट चार बार राष्ट्रपति चुने गए थे। उनके लंबे कार्यकाल के बाद राष्ट्रपति के पद पर लगातार चुने जाने की सीमा निर्धारित करने की माँग तेज हुई थी और अंततः 22वां संशोधन लागू किया गया।
डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2016 में पहली बार राष्ट्रपति चुने गए थे। इसके बाद वह 2020 का चुनाव हार गए,लेकिन वर्ष 2024 में उन्होंने दोबारा राष्ट्रपति पद हासिल किया। इस तरह वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था के तहत 2024 का चुनाव उनके लिए दूसरी निर्वाचित राष्ट्रपति अवधि माना जाता है। इसलिए 2028 में तीसरी बार निर्वाचित होने की कोशिश संविधान के 22वें संशोधन से सीधे टकराएगी।
हालाँकि,पिछले कुछ हफ्तों में ट्रंप कई मौकों पर 2028 का उल्लेख कर चुके हैं। उनके समर्थकों के बीच भी इस विषय को लेकर उत्साह दिखाई देता रहा है। पत्रकारों ने ट्रंप से ऐसे ही एक डिनर कार्यक्रम का जिक्र किया,जहाँ ‘ट्रंप 2028’ का प्रचार दिखाई दिया था और समर्थकों ने उन्हें फिर से चुनाव लड़ने के समर्थन में नारे लगाए थे। इस पर ट्रंप ने कहा कि उनसे हर कोई यह सवाल पूछता है और उस कार्यक्रम में भी लोग 2028 के नारे लगा रहे थे।
ट्रंप ने अपने जवाब में संवैधानिक प्रावधानों को चुनौती देने की किसी स्पष्ट योजना का संकेत नहीं दिया। उन्होंने न तो यह बताया कि वह 22वें संशोधन को बदलने की कोशिश करेंगे और न ही यह स्पष्ट किया कि यदि तीसरे कार्यकाल के लिए राजनीतिक अभियान चलाया जाए तो उसका स्वरूप क्या होगा। इसके बजाय उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि कानून इस मामले में काफी मजबूत है। इसलिए फिलहाल उनका बयान इच्छा और कानूनी वास्तविकता के बीच अंतर को रेखांकित करता है।
बातचीत के दौरान ट्रंप ने अपनी हालिया तुर्की यात्रा के दौरान अपनाए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीक्रेट सर्विस और सेना पर होती है और वह उनकी सलाह का पालन करते हैं। ट्रंप ने कहा कि यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था किस स्तर की होगी,इसका निर्णय संबंधित सुरक्षा एजेंसियां करती हैं और वह वही करते हैं जो उन्हें उचित लगता है।
जब उनसे पूछा गया कि उनकी यात्रा के दौरान इतने व्यापक सुरक्षा इंतजामों की जरूरत क्यों पड़ी, तो ट्रंप ने कहा कि उन्हें बहुत सारी धमकियाँ मिलती हैं। उन्होंने बाद में इस विषय पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि लोगों को ऐसी कई धमकियों के बारे में जानकारी नहीं होती। उनके अनुसार,प्रभावशाली राष्ट्रपतियों को बड़ी संख्या में धमकियाँ मिलती हैं, जबकि जिन राष्ट्रपतियों का प्रभाव कम होता है,उन्हें इस तरह की धमकियों का सामना कम करना पड़ता है।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान ईरान और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी अपना रुख दोहराया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का इस समुद्री मार्ग पर पूरा नियंत्रण है। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का नियंत्रण उसकी मजबूत नौसैनिक शक्ति के कारण है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और फारस की खाड़ी से तेल एवं अन्य ऊर्जा उत्पादों के परिवहन में इसकी बड़ी भूमिका है।
ईरान के साथ मौजूदा तनाव के बीच ट्रंप ने तेहरान के प्रति अपने अविश्वास को भी स्पष्ट किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें ईरान पर भरोसा है,तो उन्होंने सीधे कहा, “मुझे ईरान पर भरोसा नहीं है।” उनका यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय गतिविधियों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाते रहे हैं।
ट्रंप की टिप्पणियों में अमेरिकी सैन्य क्षमता पर भरोसा भी स्पष्ट दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नौसेना बेहद शानदार है और इसी वजह से वह रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम है। हालाँकि,उन्होंने मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक स्थिति को लेकर कोई विस्तृत योजना या आगे की कार्रवाई का खुलासा नहीं किया।
बातचीत की शुरुआत में ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दावा किया। उन्होंने शेयर बाजार के प्रदर्शन और रोजगार के आँकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अच्छा कर रहा है। उन्होंने शेयर बाजार के शानदार प्रदर्शन की भी बात कही। ट्रंप लगातार अपनी आर्थिक नीतियों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली नीतियों के तौर पर पेश करते रहे हैं।
कुल मिलाकर ट्रंप की ताजा टिप्पणियों में तीन प्रमुख संदेश सामने आए। पहला,वह 2028 में तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं,लेकिन उन्हें अमेरिकी कानून में मौजूद स्पष्ट संवैधानिक सीमा का भी पता है। दूसरा,वह अपनी सुरक्षा को लेकर मिलने वाली धमकियों को गंभीर मानते हैं और इस मामले में सीक्रेट सर्विस तथा सेना की सलाह पर भरोसा करते हैं। तीसरा,ईरान के प्रति उनका अविश्वास बरकरार है और वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नौसैनिक शक्ति को निर्णायक मानते हैं।
2028 के चुनाव को लेकर अभी काफी समय बाकी है,लेकिन ट्रंप के बार-बार इस वर्ष का उल्लेख करने से अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था उनके लिए तीसरे निर्वाचित कार्यकाल का रास्ता रोकती है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप इस विषय को केवल राजनीतिक संकेत और समर्थकों के उत्साह तक सीमित रखते हैं या इसे किसी व्यापक संवैधानिक और राजनीतिक बहस में बदलते हैं। फिलहाल उनका अपना बयान यही बताता है कि वह तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की इच्छा तो रखते हैं,लेकिन उन्हें यह भी मालूम है कि इसके रास्ते में अमेरिकी संविधान की मजबूत बाधा मौजूद है।
