यूक्रेन का दावा- रूस के साइबेरिया में 2500 किलोमीटर दूर तेल रिफाइनरी पर हमला (तस्वीर क्रेडिट@AmirMCH5)

यूक्रेन का दावा- रूस के साइबेरिया में 2500 किलोमीटर दूर तेल रिफाइनरी पर हमला,कहा- अब सुरक्षित नहीं रणनीतिक पिछला क्षेत्र

साइबेर‍िया,12 अगस्त (युआईटीवी)- यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में लंबी दूरी के हमलों को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा सामने आया है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसकी रक्षा सेनाओं ने रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनिंग सुविधा को निशाना बनाया है। यूक्रेनी मंत्रालय के मुताबिक,जिस ठिकाने पर हमला किया गया,वह यूक्रेन से 2500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर स्थित है। यूक्रेन ने इस कार्रवाई को अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है और दावा किया है कि अब रूस के उन इलाकों में भी रणनीतिक ठिकाने उसकी पहुँच के दायरे में आ रहे हैं,जिन्हें अब तक युद्ध से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता रहा है।

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए इस कार्रवाई की जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता ने एक नया स्तर हासिल कर लिया है। उसके अनुसार,यूक्रेन की रक्षा सेनाओं ने रूस के तेल रिफाइनिंग उद्योग की एक और महत्वपूर्ण सुविधा को निशाना बनाया है। मंत्रालय ने दावा किया कि इस बार हमला साइबेरिया के टोबोल्स्क शहर में किया गया,जो यूक्रेन से 2500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर है।

यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने इस हमले को केवल एक सैन्य कार्रवाई के तौर पर नहीं,बल्कि रूस के खिलाफ उसकी रणनीतिक क्षमता में विस्तार के संकेत के रूप में पेश किया है। मंत्रालय का कहना है कि रूस के रणनीतिक ठिकानों तक यूक्रेन की पहुँच लगातार बढ़ रही है। उसके अनुसार,युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने अपने कई महत्वपूर्ण सैन्य और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अग्रिम मोर्चे से काफी दूर रखा था,लेकिन यूक्रेन की लंबी दूरी की हमलावर क्षमता बढ़ने के साथ अब उन ठिकानों पर भी खतरा बढ़ गया है।

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि रूस के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि उसके पास पूरी तरह सुरक्षित रणनीतिक पिछला क्षेत्र नहीं बचा है। मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन की लगातार बढ़ती लंबी दूरी की हमला करने की क्षमता के कारण रूस के युद्ध प्रयासों को समर्थन देने वाला अधिक से अधिक बुनियादी ढाँचा अब उसकी पहुँच में आ रहा है। यूक्रेन का कहना है कि तेल रिफाइनिंग और ऊर्जा से जुड़ा बुनियादी ढाँचा रूस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है,क्योंकि इसका संबंध ईंधन आपूर्ति और व्यापक युद्ध मशीनरी से भी है।

मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में इस तरह के हमले जारी रह सकते हैं। यूक्रेन के अनुसार,उसका उद्देश्य रूस को यह संदेश देना है कि युद्ध को जारी रखने की कीमत लगातार बढ़ रही है। यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह और अधिक गहरे तथा लंबी दूरी के हमले करने की क्षमता का इस्तेमाल करता रहेगा। उसके मुताबिक,अंततः शांति ही एकमात्र रास्ता है और रूस को यह समझना होगा कि युद्ध जारी रखने की लागत बढ़ती जाएगी।

हालाँकि,यूक्रेन के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध नहीं है। रूस की ओर से टोबोल्स्क स्थित कथित तेल रिफाइनिंग सुविधा पर इस विशेष हमले को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं दी गई है। युद्ध के दौरान दोनों पक्ष अक्सर एक-दूसरे के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले के दावे करते रहे हैं,इसलिए ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इसी बीच रूस और यूक्रेन के बीच हमलों का सिलसिला लगातार जारी है। मंगलवार को रूस ने भी यूक्रेन के विभिन्न इलाकों में सैन्य ठिकानों और ड्रोन नियंत्रण केंद्रों को निशाना बनाने का दावा किया। रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक,डोनेट्स्क,खार्किव और सूमी क्षेत्रों में यूक्रेनी सैन्य इकाइयों के अस्थायी ठिकानों और मानवरहित हवाई वाहनों यानी ड्रोन के नियंत्रण केंद्रों पर हवाई हमले किए गए।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रूसी सशस्त्र बलों की टोही कार्रवाई के दौरान यूक्रेनी सैनिकों के अस्थायी तैनाती स्थलों और एक मानवरहित हवाई वाहन नियंत्रण केंद्र की पहचान की गई थी। इसके बाद रूसी एयरोस्पेस बलों के विमानों ने इन ठिकानों को निशाना बनाया। मंत्रालय के अनुसार,हमलों में एफएबी-250 हवाई बमों और एलएमयूआर एयर-लॉन्च मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

रूस ने यह भी बताया कि इस्तेमाल किए गए एफएबी-250 बमों में यूनिवर्सल ग्लाइडिंग और करेक्शन मॉड्यूल लगाए गए थे। ऐसे मॉड्यूल पारंपरिक बमों को अपेक्षाकृत अधिक दूरी से लक्ष्य तक पहुँचाने और उनकी दिशा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। रूसी मंत्रालय के दावे के अनुसार, इन हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेनी सैन्य ठिकानों और ड्रोन नियंत्रण से जुड़े बुनियादी ढाँचे के खिलाफ किया गया।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में पिछले कुछ समय से लंबी दूरी के हमलों का महत्व लगातार बढ़ा है। यूक्रेन लंबे समय से रूस के भीतर सैन्य और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता विकसित करने पर जोर देता रहा है। इसके पीछे उसका उद्देश्य रूसी सैन्य आपूर्ति,ईंधन और अन्य रणनीतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाना बताया जाता है। वहीं रूस भी यूक्रेन के सैन्य बुनियादी ढाँचे,हथियार भंडार और ड्रोन से जुड़े केंद्रों पर हमले करने का दावा करता रहा है।

साइबेरिया में 2500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक कथित हमला यूक्रेन की लंबी दूरी की क्षमता के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इस दावे की पुष्टि होती है,तो यह रूस के उन औद्योगिक और ऊर्जा केंद्रों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौती पैदा कर सकता है,जो युद्ध के अग्रिम मोर्चे से बहुत दूर स्थित हैं। इससे रूस को अपने रणनीतिक बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।

ऊर्जा क्षेत्र पर हमले का प्रभाव केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं रहता। तेल रिफाइनिंग सुविधाएँ ईंधन उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा होती हैं। इसलिए ऐसी किसी भी सुविधा को नुकसान पहुँचने से स्थानीय स्तर पर ईंधन उत्पादन,परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालाँकि,टोबोल्स्क में कथित हमले से कितना नुकसान हुआ और उत्पादन पर कोई प्रभाव पड़ा या नहीं,इस बारे में अभी विस्तृत स्वतंत्र जानकारी सामने नहीं आई है।

यूक्रेन की ओर से आए इस दावे के बीच युद्ध का व्यापक परिदृश्य भी लगातार जटिल बना हुआ है। दोनों देश अपने-अपने सैन्य अभियानों को जारी रखते हुए एक-दूसरे के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। यूक्रेन जहाँ रूस की गहराई में हमले करने की अपनी क्षमता को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में पेश कर रहा है,वहीं रूस यूक्रेनी सैन्य ठिकानों और ड्रोन संचालन से जुड़े केंद्रों को निशाना बनाने का दावा कर रहा है।

इस घटनाक्रम से एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध केवल अग्रिम मोर्चों तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों पक्षों की लंबी दूरी की मारक क्षमता में बढ़ोतरी ने हजारों किलोमीटर दूर स्थित सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को भी संभावित खतरे के दायरे में ला दिया है। यूक्रेन का दावा है कि उसकी बढ़ती क्षमता रूस पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाएगी,जबकि रूस लगातार अपने सैन्य अभियानों के जरिए यूक्रेनी क्षमताओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में साइबेरिया के टोबोल्स्क में कथित हमला युद्ध के बदलते स्वरूप और लंबी दूरी की सैन्य तकनीक की बढ़ती भूमिका का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है।