वॉशिंगटन,12 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका ने चीन की तेजी से बढ़ती कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता, तकनीकी जासूसी और संवेदनशील तकनीकों के संभावित दुरुपयोग को लेकर अपने निर्यात नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अमेरिका के दो सीनेटरों ने चार अलग-अलग विधेयकों का एक व्यापक द्विदलीय पैकेज पेश किया है। इसका उद्देश्य चीन समेत अमेरिकी विरोधी देशों द्वारा अमेरिकी तकनीक,बौद्धिक संपदा और संवेदनशील उत्पादों तक पहुँच बनाने की संभावित कोशिशों पर निगरानी बढ़ाना और मौजूदा कानूनों में मौजूद खामियों को बंद करना है।
इस पैकेज को ओहायो के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड और वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वॉर्नर ने पेश किया है। दोनों सांसदों का कहना है कि अमेरिका को भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीकों में अपनी बढ़त बनाए रखने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी विरोधी अमेरिकी कंपनियों और शोध संस्थानों की उपलब्धियों का गलत तरीके से फायदा न उठा सकें। प्रस्तावित कानूनों में चीन की एआई क्षमता का नियमित आकलन करने,निर्यात नियंत्रण से जुड़े मामलों में कार्रवाई की समयसीमा बढ़ाने, विदेशी कंपनियों से जुड़े संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की समीक्षा करने और अमेरिकी वाणिज्य विभाग की विशेषज्ञ क्षमता बढ़ाने के प्रावधान शामिल हैं।
जॉन हस्टेड ने कहा कि अमेरिका को तकनीक की वैश्विक दौड़ में आगे रहना और जीतना जारी रखना चाहिए,लेकिन चीन की रणनीति को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर आधारित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार,चीन की ओर से चोरी और शोषण की रणनीतियों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका को देखते हुए अमेरिका को अपने कानूनों और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित द्विदलीय पैकेज चीन की गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने,मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने और अमेरिकी कंपनियों,कर्मचारियों तथा नवाचारों को संभावित चीनी जासूसी से बचाने में मदद करेगा।
इस पैकेज का सबसे प्रमुख हिस्सा चीन की एआई क्षमता पर नियमित रिपोर्ट तैयार करने से जुड़ा है। प्रस्तावित ‘चाइना एआई पावर रिपोर्ट एक्ट’ के तहत अमेरिकी वाणिज्य मंत्री और विदेश मंत्री को चीन की उन्नत एआई क्षमताओं का व्यापक मूल्यांकन करना होगा। कानून बनने के 180 दिनों के भीतर पहली रिपोर्ट तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके बाद तीन वर्षों तक हर साल इस तरह की रिपोर्ट पेश करनी होगी। इस व्यवस्था का मकसद अमेरिकी नीति निर्माताओं को चीन की तकनीकी प्रगति और उससे जुड़े संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की लगातार जानकारी उपलब्ध कराना है।
प्रस्तावित रिपोर्ट में चीन के एआई क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। इनमें एआई चिप्स,सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र,अत्याधुनिक विनिर्माण उपकरण, डेटा सेंटर,कंप्यूटिंग क्षमता,एआई मॉडल,शोध कार्यक्रम और ह्यूमनॉइड रोबोट जैसी तकनीकें शामिल होंगी। इसके अलावा चीन की उन गतिविधियों का भी आकलन किया जाएगा, जिनके जरिए वह अमेरिकी निर्यात नियंत्रण नियमों को दरकिनार करने या संवेदनशील अमेरिकी बौद्धिक संपदा हासिल करने की कोशिश कर सकता है।
रिपोर्ट केवल चीन की तकनीकी क्षमता का अलग से आकलन नहीं करेगी,बल्कि उसकी तुलना अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की क्षमताओं से भी की जाएगी। इससे अमेरिकी सरकार को यह समझने में मदद मिल सकती है कि एआई,सेमीकंडक्टर और संबंधित तकनीकों में चीन किस स्तर तक पहुँच चुका है और अमेरिका तथा उसके साझेदारों के सामने कौन-कौन सी रणनीतिक चुनौतियाँ मौजूद हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक,रिपोर्ट को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा,ताकि नीति विशेषज्ञ,उद्योग जगत और आम जनता भी चीन की तकनीकी क्षमता से संबंधित व्यापक तस्वीर को समझ सकें। हालाँकि,संवेदनशील खुफिया जानकारी की जरूरत होने पर इसके साथ एक गोपनीय परिशिष्ट भी जोड़ा जा सकेगा। इस व्यवस्था के जरिए सार्वजनिक पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी गोपनीयता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
मार्क वॉर्नर ने कहा कि अमेरिका को उन तकनीकों में नेतृत्व बनाए रखना होगा जो भविष्य की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को आकार देने वाली हैं। उनके अनुसार,अमेरिका चीन या किसी अन्य विदेशी विरोधी को अमेरिकी नवाचार का फायदा उठाने और बाद में उन्हीं तकनीकों का अमेरिका के खिलाफ इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दे सकता। उन्होंने प्रस्तावित विधेयकों को व्यावहारिक सुधार बताते हुए कहा कि इनका उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना,तकनीकी बढ़त को सुरक्षित रखना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अमेरिका की स्थिति बेहतर करना है।
चार विधेयकों में दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव निर्यात नियंत्रण कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की समयसीमा बढ़ाने से जुड़ा है। प्रस्तावित ‘एक्सपोर्ट कंट्रोल रिफॉर्म एक्ट’ के तहत दीवानी या आपराधिक मामलों को दर्ज करने की समयसीमा पाँच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष करने का प्रावधान है। सांसदों का तर्क है कि संवेदनशील तकनीकों की तस्करी या उन्हें अवैध तरीके से विदेशी संस्थाओं तक पहुँचाने वाले नेटवर्क का पता लगाने में अक्सर लंबा समय लग जाता है। खास तौर पर चीन से जुड़े जटिल तकनीकी तस्करी नेटवर्क की जाँच पाँच वर्ष के भीतर पूरी करना कई बार मुश्किल हो सकता है। ऐसे में समयसीमा दोगुनी करने से जाँच एजेंसियों को अधिक समय मिल सकेगा।
तीसरे प्रस्तावित कानून को ‘एडवर्सरीज एक्ट’ कहा गया है। इसके तहत वाणिज्य विभाग के उद्योग एवं सुरक्षा ब्यूरो को इस बात की समीक्षा करनी होगी कि उन विदेशी कंपनियों की अमेरिका स्थित सहयोगी इकाइयाँ नियंत्रित तकनीक या उत्पाद हासिल कर सकती हैं या नहीं,जिनकी मूल विदेशी कंपनियाँ अमेरिकी ‘एंटिटी लिस्ट’ या ‘मिलिट्री एंड यूजर लिस्ट’ में शामिल हैं।
इस समीक्षा की शुरुआत कानून लागू होने के 90 दिनों के भीतर करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य ऐसी संभावित खामी की पहचान करना है,जिसके जरिए किसी विदेशी विरोधी देश से जुड़ी कंपनी अपनी अमेरिकी सहयोगी इकाई के माध्यम से उन तकनीकों या उत्पादों तक पहुँच हासिल कर सकती है,जिन पर सीधे तौर पर निर्यात नियंत्रण लागू है।
इस विधेयक में विदेशी नियंत्रण वाली सूचना और संचार प्रौद्योगिकी सेवाओं से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों की समीक्षा का भी प्रस्ताव है। वाणिज्य विभाग को ऐसे जोखिमों का आकलन करने और जरूरत पड़ने पर अमेरिकी कानूनों में बदलाव की सिफारिश करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे अमेरिकी डिजिटल और तकनीकी बुनियादी ढाँचे में विदेशी प्रभाव से जुड़े जोखिमों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चौथे प्रस्ताव का संबंध वाणिज्य विभाग के उद्योग एवं सुरक्षा ब्यूरो की विशेषज्ञ क्षमता बढ़ाने से है। ‘बीआईएस स्ट्रेंथ एक्ट’ के तहत ब्यूरो को अस्थायी आधार पर सिविल सेवा के बाहर से विशेषज्ञों की भर्ती करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। किसी भी समय अधिकतम 25 विशेषज्ञ नियुक्त किए जा सकेंगे और प्रत्येक नियुक्ति की अवधि पाँच वर्ष तक सीमित होगी। यह विशेष भर्ती अधिकार भी पाँच वर्ष बाद समाप्त हो जाएगा।
इस प्रावधान का उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञों को सरकारी व्यवस्था में अस्थायी रूप से शामिल करना है,जिनके पास उन्नत तकनीक,निर्यात नियंत्रण,सेमीकंडक्टर,एआई,साइबर सुरक्षा या अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में विशेष ज्ञान हो सकता है। अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि तकनीक की तेजी से बदलती प्रकृति को देखते हुए सरकारी एजेंसियों के पास पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता होना जरूरी है।
इन चारों प्रस्तावित विधेयकों की एक खास बात यह है कि इनके प्रतिनिधि सभा में भी द्विदलीय संस्करण मौजूद हैं। इससे इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति ने 21 जनवरी 2026 को ‘चाइना एआई पावर रिपोर्ट एक्ट’ के अपने संस्करण को 47-0 के सर्वसम्मत मत से मंजूरी दी थी। यह मतदान इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों के बीच व्यापक सहमति का संकेत देता है।
अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। एआई,सेमीकंडक्टर,उन्नत कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर जैसी तकनीकों को आर्थिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा जा रहा है। अमेरिका पहले ही चीन को कुछ उन्नत तकनीकों के निर्यात पर कई तरह के प्रतिबंध लागू कर चुका है। अब प्रस्तावित चार बिलों के जरिए इन नियंत्रणों को अधिक प्रभावी बनाने और उनके संभावित रास्तों को बंद करने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे पैकेज का व्यापक उद्देश्य केवल चीन की तकनीकी प्रगति पर नजर रखना नहीं है, बल्कि अमेरिका की अपनी तकनीकी क्षमता और औद्योगिक आधार को सुरक्षित रखना भी है। सांसदों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई और अत्याधुनिक तकनीक में बढ़त हासिल करने वाला देश वैश्विक अर्थव्यवस्था,रक्षा और रणनीतिक मामलों में भी महत्वपूर्ण प्रभाव रखेगा। इसलिए अमेरिकी कानून निर्माता तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ संवेदनशील तकनीक के गलत हाथों में पहुँचने से रोकने पर भी जोर दे रहे हैं।
द्विदलीय समर्थन को देखते हुए इन प्रस्तावों पर आगे अमेरिकी संसद में व्यापक चर्चा होने की संभावना है। यदि ये कानून बनते हैं,तो चीन की एआई क्षमताओं की निगरानी, निर्यात नियंत्रण लागू करने की अमेरिकी क्षमता और विदेशी कंपनियों से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की समीक्षा के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। साथ ही,विशेषज्ञों की अस्थायी नियुक्ति के प्रावधान से अमेरिकी वाणिज्य विभाग को तेजी से बदलती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में अतिरिक्त क्षमता मिल सकती है। इस तरह चारों विधेयक मिलकर अमेरिका की तकनीकी बढ़त और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।
