नई दिल्ली,14 अगस्त (युआईटीवी)- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि और आपराधिक मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को बड़ी राहत दी। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और जारी किए गए समन को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत आवश्यक मंजूरी हासिल नहीं की गई थी। प्रक्रिया में इस महत्वपूर्ण कमी को देखते हुए अदालत ने उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया।
यह मामला वर्ष 2022 में राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान महाराष्ट्र में दिए गए एक बयान से जुड़ा हुआ था। यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने वीर सावरकर को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कथित तौर पर सावरकर को ‘अंग्रेजों का नौकर’ बताया था और यह भी कहा था कि वह अंग्रेजों से पेंशन लेते थे। राहुल गांधी की इन टिप्पणियों को लेकर महाराष्ट्र में अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने अदालत का रुख किया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से समाज में वैमनस्य और नफरत फैलने की स्थिति पैदा हो सकती है।
नृपेंद्र पांडे की शिकायत में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 505 के तहत कार्रवाई की माँग की गई थी। धारा 153ए विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी या वैमनस्य को बढ़ावा देने से संबंधित थी,जबकि धारा 505 सार्वजनिक उपद्रव और उससे संबंधित परिस्थितियों में दिए गए बयानों से जुड़ी थी। शिकायतकर्ता की ओर से यह दावा किया गया था कि राहुल गांधी की टिप्पणी जानबूझकर समाज में नफरत और तनाव पैदा करने के उद्देश्य से की गई थी।
शिकायत में महात्मा गांधी के संदर्भ का भी उल्लेख किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि महात्मा गांधी ने वीर सावरकर को देशभक्त माना था और ऐसे में उनके बारे में राहुल गांधी की टिप्पणी आपत्तिजनक थी। हालाँकि,शुरुआती स्तर पर इस मामले को कानूनी तौर पर आगे बढ़ाने में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले।
जून 2023 में मजिस्ट्रेट अदालत ने नृपेंद्र पांडे की शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इस फैसले को सेशंस अदालत में चुनौती दी। सेशंस अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली और मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट अदालत में भेज दिया। इसके बाद मामला फिर से निचली अदालत में पहुँचा और आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई।
दिसंबर 2024 में निचली अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ माना। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 505 के तहत कार्रवाई करते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया। इस आदेश के बाद कांग्रेस नेता ने निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को समाप्त करने की मांग की थी।
राहुल गांधी को इस स्तर पर भी तत्काल राहत नहीं मिली। 4 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने उच्च न्यायालय के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान मामले की प्रक्रिया और राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी मंजूरी के मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया गया।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए पाया कि राहुल गांधी पर मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी। अदालत ने इस प्रक्रिया संबंधी कमी को महत्वपूर्ण माना और इसी आधार पर उनके खिलाफ जारी समन तथा आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। इस फैसले के साथ ही इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर विराम लग गया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को राहुल गांधी के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालाँकि,अदालत का फैसला मुख्य रूप से आवश्यक कानूनी मंजूरी और प्रक्रिया में कमी से जुड़ा है। शीर्ष अदालत ने इसी आधार पर आपराधिक कार्यवाही और समन को रद्द किया है। इस मामले में राहुल गांधी द्वारा वीर सावरकर को लेकर की गई टिप्पणी लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रही है।
वीर सावरकर को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर भारतीय जनता पार्टी और अन्य राजनीतिक दलों की ओर से पहले भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आती रही है। वहीं कांग्रेस लगातार राहुल गांधी के बयान को राजनीतिक विचार और ऐतिहासिक घटनाओं की उनकी व्याख्या के संदर्भ में देखती रही है। इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी काफी चर्चा पैदा की थी।
सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के फैसले के बाद अब इस विशेष मामले में राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत की आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई है। शीर्ष अदालत के निर्णय ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक मामले में केवल आरोप लगाए जाना पर्याप्त नहीं है,बल्कि कानून में निर्धारित आवश्यक प्रक्रियाओं और मंजूरियों का पालन भी अनिवार्य है। राहुल गांधी के खिलाफ वीर सावरकर टिप्पणी से जुड़े इस मामले में इसी कानूनी प्रक्रिया की कमी अंततः उनके पक्ष में महत्वपूर्ण आधार बनी और सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही तथा समन को रद्द कर दिया।
