जियानी इन्फेंटिनो

फीफा अध्यक्ष पद पर जियानी इन्फेंटिनो को न्यूजीलैंड फुटबॉल का झटका, समर्थन वापस लेने का ऐलान

ऑकलैंड,14 अगस्त (युआईटीवी)- न्यूजीलैंड फुटबॉल ने फीफा अध्यक्ष पद के लिए जियानी इन्फेंटिनो की उम्मीदवारी को दिया गया अपना समर्थन आधिकारिक तौर पर वापस लेने का फैसला किया है। न्यूजीलैंड फुटबॉल ने यह घोषणा 2027 में होने वाली फीफा कांग्रेस से पहले की है। इसके साथ ही संगठन ने फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज योजना की स्वतंत्र समीक्षा कराने की माँग भी उठाई है। न्यूजीलैंड फुटबॉल का यह कदम जियानी इन्फेंटिनो के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है,क्योंकि वह अगले वर्ष होने वाले चुनाव में एक बार फिर फीफा अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

न्यूजीलैंड फुटबॉल ने अपने बयान में कहा कि संगठन ने इस मुद्दे पर काफी सोच-विचार करने के बाद अपना रुख तय किया है। उसके अनुसार,फीफा के कुछ फैसलों और गतिविधियों की वजह से अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में भरोसा कमजोर हुआ है और विभाजन की स्थिति बढ़ी है। संगठन का मानना है कि वैश्विक फुटबॉल प्रशासन में विश्वास और विश्वसनीयता बहाल करने के लिए स्वतंत्र समीक्षा बेहद जरूरी है। न्यूजीलैंड फुटबॉल ने कहा कि यह केवल किसी एक योजना या फैसले का सवाल नहीं है,बल्कि वैश्विक फुटबॉल के संचालन में पारदर्शिता,जवाबदेही और मजबूत प्रशासन के व्यापक सिद्धांतों से जुड़ा विषय है।

न्यूजीलैंड फुटबॉल ने सभी फीफा सदस्य संघों से मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता की वकालत करने का आह्वान किया। संगठन के अनुसार,वैश्विक खेल के प्रशासन में लोगों और सदस्य संघों का भरोसा बनाए रखने के लिए इन सिद्धांतों का पालन जरूरी है। न्यूजीलैंड फुटबॉल का मानना है कि मौजूदा स्थिति सभी सदस्य संघों के लिए इस बात पर विचार करने का अवसर है कि फीफा की निर्णय लेने की प्रक्रिया को किस तरह और अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

जियानी इन्फेंटिनो के नेतृत्व को लेकर यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब वह अगले वर्ष होने वाले फीफा अध्यक्ष पद के चुनाव में फिर से उम्मीदवार बनने की इच्छा जता चुके हैं। न्यूजीलैंड फुटबॉल का समर्थन वापस लेना उनके लिए इसलिए महत्वपूर्ण है,क्योंकि फीफा अध्यक्ष के चुनाव में विभिन्न सदस्य संघों का समर्थन राजनीतिक रूप से अहम भूमिका निभाता है। किसी क्षेत्रीय संघ या सदस्य देश का सार्वजनिक रूप से समर्थन वापस लेना फीफा के भीतर नेतृत्व को लेकर बढ़ती असहमति का संकेत माना जा सकता है।

विवाद का एक प्रमुख केंद्र फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज योजना भी रही है। जियानी इन्फेंटिनो ने विश्व कप के व्यावसायिक अधिकारों को अलग करने और उसमें 20 प्रतिशत निजी निवेश बेचकर लगभग 7.2 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का प्रस्ताव रखा था। इस योजना का उद्देश्य फीफा की व्यावसायिक क्षमता और आय को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाना बताया गया था। हालाँकि,प्रस्ताव सामने आने के बाद इसे लेकर आलोचना तेज हो गई। विरोध और सवालों के बीच फीफा को अंततः इस योजना को वापस लेना पड़ा।

फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज से जुड़े विवाद के बाद न्यूजीलैंड फुटबॉल ने अब इस पूरे मामले की स्वतंत्र समीक्षा की माँग की है। संगठन का कहना है कि समीक्षा का उद्देश्य केवल किसी प्रस्ताव की जाँच करना नहीं होना चाहिए,बल्कि इससे जुड़े निर्णयों, प्रक्रियाओं और भविष्य में आवश्यक बदलावों की पहचान भी की जानी चाहिए। न्यूजीलैंड फुटबॉल का मानना है कि स्वतंत्र समीक्षा से फीफा के कामकाज को लेकर उठे सवालों का निष्पक्ष तरीके से आकलन किया जा सकता है और इससे भविष्य के लिए बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलेगी।

न्यूजीलैंड फुटबॉल का यह बयान ओशिनिया फुटबॉल परिसंघ की कार्यकारी समिति की बैठक के बाद आया। बैठक के दौरान परिसंघ ने फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज प्रस्ताव को वापस लेने के फीफा के फैसले का स्वागत किया। साथ ही परियोजना से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करने की फीफा की प्रतिबद्धता का भी समर्थन किया गया। इससे संकेत मिलता है कि ओशिनिया क्षेत्र में फीफा की व्यावसायिक और प्रशासनिक नीतियों को लेकर चर्चा गंभीर रूप ले चुकी है।

न्यूजीलैंड फुटबॉल ने कहा कि ओशिनिया फुटबॉल परिसंघ पिछले एक दशक में फीफा के नेतृत्व में ओशिनिया क्षेत्र में फुटबॉल के विकास में हुई प्रगति को स्वीकार करता है। क्षेत्र में फुटबॉल के विकास के लिए बुनियादी ढाँचे,प्रशिक्षण,प्रतियोगिताओं और अन्य कार्यक्रमों में निवेश को महत्वपूर्ण माना गया है। संगठन ने कहा कि इन उपलब्धियों को स्वीकार करने के साथ-साथ मौजूदा विवादों से सीख लेना भी जरूरी है।

न्यूजीलैंड फुटबॉल ने फीफा से आग्रह किया कि वह स्वतंत्र समीक्षा को केवल औपचारिक प्रक्रिया के रूप में न देखे,बल्कि इसके जरिए आवश्यक बदलावों की पहचान करे और उन्हें लागू भी करे। संगठन के अनुसार,यदि समीक्षा में किसी प्रक्रिया या व्यवस्था में सुधार की जरूरत सामने आती है,तो उसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इससे फीफा के प्रशासन में भरोसा और पारदर्शिता बढ़ सकती है।

ओशिनिया फुटबॉल परिसंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने सदस्य संघों,फीफा,अन्य परिसंघों और दुनिया भर के फुटबॉल हितधारकों के साथ रचनात्मक बातचीत और करीबी सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया के हर हिस्से में फुटबॉल का विकास जारी रहे और क्षेत्रीय संघों तथा वैश्विक संस्था के बीच सहयोग मजबूत बना रहे।

न्यूजीलैंड फुटबॉल के इस फैसले का असर फीफा अध्यक्ष पद के आगामी चुनाव की राजनीति पर भी पड़ सकता है। इन्फेंटिनो को अब सदस्य संघों के बीच अपने समर्थन को बनाए रखने और आलोचनाओं का जवाब देने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। खासकर फॉरवर्ड एंटरप्राइज योजना को लेकर उठे सवाल और पारदर्शिता की माँग उनके नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं।

हालाँकि,न्यूजीलैंड फुटबॉल ने फीफा के नेतृत्व में ओशिनिया में पिछले एक दशक के दौरान हुए विकास को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। संगठन ने यह स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में फुटबॉल को आगे बढ़ाने के लिए फीफा और अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग जारी रखना चाहता है। उसका विरोध फीफा के पूरे विकास कार्यक्रम से नहीं,बल्कि प्रशासन, जवाबदेही और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े उन सवालों से है,जिनके कारण अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में भरोसे को नुकसान पहुँचने की बात कही गई है।

फीफा के सामने अब यह चुनौती है कि वह फॉरवर्ड एंटरप्राइज योजना से जुड़े विवाद और सदस्य संघों की चिंताओं को किस तरह दूर करता है। स्वतंत्र समीक्षा के परिणाम और उससे निकलने वाले सुझाव भविष्य में फीफा की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इन्फेंटिनो अपनी संभावित चुनावी मुहिम में सदस्य संघों के बीच समर्थन को किस तरह मजबूत करते हैं।

न्यूजीलैंड फुटबॉल का समर्थन वापस लेना फिलहाल फीफा अध्यक्ष पद की दौड़ में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। संगठन ने अपने फैसले के जरिए यह संदेश दिया है कि वैश्विक फुटबॉल के संचालन में पारदर्शिता,जवाबदेही और भरोसे को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अब आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि फीफा स्वतंत्र समीक्षा की माँग और सदस्य संघों की चिंताओं को किस गंभीरता से लेता है। वहीं इन्फेंटिनो के लिए यह फैसला इस बात का संकेत है कि अगले अध्यक्षीय चुनाव से पहले उन्हें न केवल अपने नेतृत्व का बचाव करना होगा,बल्कि सदस्य संघों के बीच भरोसा बनाए रखने की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा।