चमोली,14 अगस्त (युआईटीवी)- उत्तराखंड के मायापुर,पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा और पानी भरने की घटना के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को घटनास्थल पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने टनल के अंदर जाकर बचाव कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों तथा बचाव दलों से अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि टनल में फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए उपलब्ध सभी संसाधनों तथा तकनीकी विशेषज्ञता का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए।
टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के तहत बनाई जा रही टीआरटी टनल की लंबाई करीब तीन किलोमीटर है। बताया गया कि टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण अचानक मलबा और पानी आने की स्थिति पैदा हुई। इसके बाद वहाँ काम कर रहे लोग टनल के भीतर फँस गए। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। लगातार चलाए जा रहे अभियान के दौरान अब तक 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है,जबकि तीन लोग अभी भी टनल के अंदर फँसे बताए जा रहे हैं।
घटना में अब तक सात लोगों की दुखद मृत्यु की सूचना है। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने घटनास्थल पर पहुंचकर अभियान में जुटी टीमों से सीधे जानकारी ली और बचाव कार्य में सामने आ रही चुनौतियों के बारे में भी अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि रेस्क्यू अभियान को पूरी सावधानी और गंभीरता के साथ संचालित किया जाए,ताकि अंदर फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल,राज्य आपदा मोचन बल,भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और पुलिस सहित सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान में किसी भी स्तर पर संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। टनल के भीतर की परिस्थितियों को देखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने और बचाव कार्य में आधुनिक उपकरणों का अधिकतम इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मुख्यमंत्री को अब तक हुए रेस्क्यू अभियान और घटनास्थल पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टनल में कुल 22 लोग फँसे थे,जिनमें से 19 लोगों को अब तक बाहर निकाला जा चुका है। शेष तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं। टनल के अंदर मलबा और पानी होने के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके बावजूद बचाव दल लगातार अभियान में जुटे हैं।
रेस्क्यू किए गए घायलों को तत्काल उपचार के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर पहुँचाया गया है। वहाँ स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों की टीम घायलों का उपचार कर रही है तथा उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए और उन्हें घटनाक्रम की जानकारी लगातार दी जाती रहे।
मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बचाव दलों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए,क्योंकि टनल के भीतर मलबा और पानी की स्थिति के कारण अभियान में जोखिम बना हुआ है। उन्होंने सभी टीमों से आपसी समन्वय के साथ काम करने और हर कदम सावधानीपूर्वक उठाने को कहा।
मायापुर में हुआ यह हादसा विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माण गतिविधियों से जुड़ा है। टीएचडीसी की यह परियोजना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं में शामिल है। निर्माणाधीन टनल में भूधंसाव के कारण पैदा हुई स्थिति ने बचाव दलों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। टनल के भीतर मलबा और पानी भरने के कारण फँसे लोगों तक पहुँचने के लिए बचाव दलों को लगातार प्रयास करना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी लगातार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक टनल में फँसे तीनों लोगों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता,तब तक अभियान को पूरी गंभीरता से जारी रखा जाए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से कहा कि उपलब्ध सभी विकल्पों का इस्तेमाल करते हुए बचाव अभियान को आगे बढ़ाया जाए।
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने घायलों के उपचार और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए भी आवश्यक कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रेस्क्यू अभियान के साथ-साथ पीड़ित परिवारों की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रभावित लोगों को प्रशासन की ओर से हर संभव मदद उपलब्ध हो।
घटनास्थल पर मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री एवं प्रभारी मंत्री भरत चौधरी,थराली विधायक भूपाल राम टम्टा,जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट,राज्य मंत्री हरक सिंह, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी, नगर पंचायत अध्यक्ष आरती नवानी,सभासद राजा जोशी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप,आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप,जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार,उपजिलाधिकारी राजकुमार पांडेय और चंद्रशेखर वशिष्ठ समेत प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद बचाव अभियान को लेकर अधिकारियों और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और मजबूत किया गया है। प्रशासन का पूरा ध्यान फिलहाल टनल के अंदर फँसे तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। इसके साथ ही हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के शवों और घायलों से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएँ भी पूरी की जा रही हैं।
मायापुर टनल हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माणाधीन सुरंगों में काम के दौरान आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों को सामने ला दिया है। भूधंसाव,पानी का अचानक प्रवेश और मलबा गिरने जैसी परिस्थितियाँ बचाव अभियानों को बेहद कठिन बना देती हैं। ऐसे में राहत एवं बचाव दलों के लिए तकनीकी विशेषज्ञता,आधुनिक उपकरण और आपसी समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। फिलहाल मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन और सभी बचाव एजेंसियाँ पूरी क्षमता के साथ अभियान में जुटी हैं और उम्मीद है कि टनल में फँसे शेष तीन लोगों को भी जल्द सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा।
