दिल्ली,22 अगस्त (युआईटीवी)- नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नियमों के विरोध में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि इसका लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। आंदोलन में शामिल लोगों ने आरक्षण के राजनीतिकरण को समाप्त करने और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता देने की माँग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए,जिसमें गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिले और वे अपनी प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ सकें।
जंतर-मंतर पर पहुँचे प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने कई सवाल रखे। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि वे दूर-दराज के इलाकों से अपनी आवाज उठाने के लिए दिल्ली पहुँचे हैं। उनका आरोप है कि उन्हें प्रदर्शन स्थल पर टेंट लगाने और मंच बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल किया कि यदि अन्य आंदोलनों में लोगों को धूप और मौसम से बचाने के लिए व्यवस्थाएँ करने की अनुमति दी जाती है,तो उनके आंदोलन में ऐसी व्यवस्था करने से क्यों रोका जा रहा है।
प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि उनकी मुख्य माँग आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करना है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का राजनीतिकरण बंद होना चाहिए और इसका लाभ उस व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए,जिसे वास्तव में इसकी जरूरत है। उन्होंने गांव और ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे आगे चलकर डॉक्टर,इंजीनियर और अन्य पेशेवर बन सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा और प्रतिभा के मुद्दे को भी अपनी मांगों से जोड़ा। आंदोलन में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि देश में प्रतिभाओं का लगातार दमन किया जा रहा है और दूसरी ओर विकसित भारत बनाने की बात की जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि योग्य और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे,तो देश कैसे विकसित होगा। प्रदर्शनकारी ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या वर्ग के खिलाफ जाना नहीं है,बल्कि इसे राष्ट्रहित से जुड़ा आंदोलन बताया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों की क्षमता और मेहनत को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक,देश में ऐसे विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए जो अपनी प्रतिभा के दम पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा और रोजगार के अवसरों में वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने टेंट और मंच लगाने की अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए लोग दूर-दूर से पहुँचे हैं और उन्हें धूप से बचाने के लिए छाया की व्यवस्था करना जरूरी है। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों से कहा जा रहा है कि टेंट नहीं लगाने दिए जाएँगे और मंच भी नहीं बनाया जा सकता। प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि टेंट और मंच की व्यवस्था करने वाले लोगों को भी धमकाया जा रहा है।
प्रदर्शनकारी ने सवाल किया कि यदि दूसरे आंदोलनों के दौरान ऐसी व्यवस्थाओं की अनुमति दी जाती है,तो उनके आंदोलन के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोग अपने अधिकारों और मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए हैं। ऐसे में उन्हें बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या गरीब होने के कारण उन्हें टेंट लगाने और धूप से बचने की व्यवस्था करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
वहीं,एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि उन्हें प्रदर्शन के लिए अनुमति मिल चुकी है। उन्होंने अधिक-से-अधिक लोगों से आंदोलन में पहुँचने की अपील की। उनका कहना था कि अपने अधिकारों और मांगों के लिए लोगों को आगे आना होगा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से भी अपील की कि आंदोलन में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों को रोका नहीं जाना चाहिए।
प्रदर्शन में आरक्षण को आर्थिक आधार से जोड़ने की माँग भी प्रमुखता से सामने आई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गरीबी किसी जाति या धर्म को देखकर नहीं आती। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है तो उसके बच्चों को शिक्षा और रोजगार में आगे बढ़ने के लिए सहायता मिलनी चाहिए,चाहे वह किसी भी जाति या धर्म से संबंधित हो।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि आरक्षण में सुधार की माँग बहुत पहले उठाई जानी चाहिए थी,लेकिन लंबे समय तक इस मुद्दे पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। अब लोगों को अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आग्रह किया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया जाए,जिसमें वास्तविक जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिले।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को अवसर उपलब्ध कराना है। ऐसे में इस व्यवस्था की प्रभावशीलता और इसके लाभार्थियों को लेकर समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उनके मुताबिक,यदि किसी व्यवस्था का लाभ जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुँच रहा है,तो उसमें बदलाव पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
जंतर-मंतर पर जुटे लोगों ने यूजीसी के नियमों का भी विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों को लेकर अपनी आपत्तियाँ जाहिर कीं और कहा कि विद्यार्थियों तथा शिक्षकों से जुड़े मामलों में ऐसे फैसले लिए जाने चाहिए,जिनसे शिक्षा की गुणवत्ता और अवसर दोनों बेहतर हों। हालाँकि,प्रदर्शनकारियों की विभिन्न मांगों पर सरकार या संबंधित संस्थाओं की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बार-बार शिक्षा,प्रतिभा और आर्थिक स्थिति को अपनी मांगों का आधार बताया। उनका कहना है कि देश को विकसित बनाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में सभी योग्य विद्यार्थियों को अवसर मिलना जरूरी है। ग्रामीण और गरीब परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को बेहतर स्कूल,उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों तक पहुंच मिलने से देश की प्रतिभा का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। आरक्षण व्यवस्था में बदलाव,इसके राजनीतिकरण को समाप्त करने और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता देने की माँग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज बुलंद की है। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर टेंट और मंच जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं की अनुमति देने की माँग भी की है। अब इस पूरे मामले में सरकार और संबंधित संस्थानों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता,तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
