गुरुग्राम हादसे के बाद सिया ने उठाए कानून व्यवस्था पर सवाल (तस्वीर क्रेडिट@SonOfBharat7)

गुरुग्राम हादसे के बाद सिया ने उठाए कानून व्यवस्था पर सवाल,बोलीं- बाइकर की जान जाने के बाद ही होगी कार्रवाई?

नई दिल्ली,15 सितंबर (युआईटीवी)- गुरुग्राम में सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों की जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले सप्ताह गोल्फ कोर्स रोड पर कार की चपेट में आने वाली बाइकर सिया ने घटना को लेकर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कानून व्यवस्था तब तक नहीं जागेगी,जब तक किसी बाइकर पर हमला नहीं हो जाता या उसकी जान नहीं चली जाती। सिया ने शहर में दोपहिया वाहन चालकों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों और नियमों को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि अगर प्रशासन बाइकरों की सुरक्षा को लेकर इतना चिंतित है,तो उसे सड़क पर लापरवाही से वाहन चलाने वाले चार पहिया वाहन चालकों पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए।

सिया ने अधिकारियों से अपील की कि सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि किसी सड़क हादसे के बाद केवल पीड़ित से सावधानी बरतने की उम्मीद करना पर्याप्त नहीं है। उन वाहन चालकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए,जिनकी लापरवाही से दूसरे लोगों की जान खतरे में पड़ती है।

गोल्फ कोर्स रोड पर हुई घटना को याद करते हुए सिया ने बताया कि वह अपनी लेन में साइकिल चला रही थीं और सड़क पर पूरी सावधानी बरत रही थीं। उनके मुताबिक,एक कार बेहद तेज रफ्तार में उनके बिल्कुल करीब से गुजरी। उस समय उन्होंने कार को देखा और शुरुआत में इसे सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज कर दिया। उन्हें लगा कि संभव है चालक ने उन्हें देखा न हो या फिर वह किसी जल्दबाजी में हो,लेकिन इसके बाद जो हुआ,उसने उन्हें हैरान कर दिया।

सिया के मुताबिक,कार चालक पहले उनके आगे गया और फिर रुककर उन्हें इशारे करने लगा। इसके बाद वह दोबारा पीछे आया और सिया को टक्कर मारकर वहाँ से निकल गया। सिया का कहना है कि अगर कोई वाहन तेज रफ्तार से किसी साइकिल या बाइक के पास से गुजरता है,तो सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि वह आगे निकल जाए और अपनी दिशा में चला जाए,लेकिन उनके अनुसार,इस मामले में चालक का व्यवहार इससे बिल्कुल अलग था।

उन्होंने बताया कि जब कार की खिड़कियाँ नीचे की गईं,तब उन्हें आगे की सीटों पर दो लोग दिखाई दिए। उन्हें जानकारी मिली कि वाहन की पिछली सीट पर भी दो लोग बैठे हुए थे। हालाँकि,कार की खिड़कियों पर गहरा काला शीशा लगा होने के कारण पीछे बैठे लोगों को स्पष्ट रूप से देख पाना संभव नहीं था। सिया ने कहा कि वह उस समय साइकिल चला रही थीं और उनका पूरा ध्यान सड़क पर था,इसलिए कार के अंदर बैठे प्रत्येक व्यक्ति को ध्यान से देखना भी उनके लिए संभव नहीं था।

सिया ने घटना के दौरान पहने गए सुरक्षा उपकरणों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपकरणों की वजह से उन्हें गंभीर चोटों से बचने में मदद मिली। सिया के अनुसार,उन्होंने घुड़सवारी के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष जूते और दस्ताने पहने हुए थे। इन उपकरणों की एक खासियत यह होती है कि गिरने की स्थिति में शरीर को जमीन पर घर्षण के साथ अटकने से बचाने में मदद मिलती है।

उन्होंने बताया कि हादसे के दौरान उनका हाथ सबसे पहले जमीन से टकराया था। अगर उन्होंने सुरक्षा जूते और दस्ताने नहीं पहने होते, तो चोट कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। उनके मुताबिक,ऐसी स्थिति में कंधे या पैर की हड्डी तक टूटने की आशंका थी। सिया ने इसी उदाहरण के जरिए लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि सड़क पर सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। उनका कहना है कि जिस तरह घुड़सवारी के दौरान लोग सुरक्षा के लिए जरूरी सामान पहनते हैं,उसी तरह साइकिल या बाइक चलाते समय भी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हालाँकि,सिया की नाराजगी केवल हादसे तक सीमित नहीं है। उन्होंने गुरुग्राम में दोपहिया वाहन और बाइक चालकों के लिए बनाए जाने वाले नियमों पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि प्रशासन अक्सर बाइकरों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगाने और उन्हें नियमों का पालन करने की सलाह देने पर जोर देता है,लेकिन सड़क पर तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाने वाले चार पहिया वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जानी चाहिए।

सिया ने सवाल उठाया कि अगर किसी बाइकर की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है,तो ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती जो दूसरे लोगों की जिंदगी खतरे में डालकर वाहन चलाते हैं। उनका मानना है कि सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल बाइक या साइकिल चलाने वालों की नहीं हो सकती। कार और अन्य चार पहिया वाहन चलाने वाले लोगों को भी अपनी गति,लेन और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

सिया ने यह भी कहा कि घटना के बाद से इस मामले को लेकर लोगों के बीच लगातार चर्चा हो रही है। उनके अनुसार,सोमवार से ही हादसे और कार चालक के कथित व्यवहार को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे गंभीर सवाल यह है कि किसी व्यक्ति को कथित तौर पर टक्कर मारने के बाद मौके से चले जाने के बावजूद आरोपी के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है।

सिया ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने उन्हें टक्कर मारी,वह उन्हें सड़क पर छोड़कर वहाँ से चला गया। इसके बावजूद उनके अनुसार,संबंधित व्यक्ति अभी भी बाहर है और मीडिया के सामने अपना पक्ष रख रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी व्यक्ति पर सड़क हादसे में दूसरे इंसान को नुकसान पहुँचाने का आरोप है,तो पुलिस उसे गिरफ्तार करने की दिशा में क्या कदम उठा रही है।

उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर आरोपी को इतनी लंबी अवधि तक खुले में रहने का मौका क्यों मिल रहा है। सिया के सवाल का केंद्र यही है कि सड़क हादसों में पीड़ित की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आरोपी की भूमिका की भी निष्पक्ष और तेजी से जाँच होनी चाहिए। उनके मुताबिक,अगर किसी चालक की लापरवाही किसी दूसरे व्यक्ति की जान या सुरक्षा के लिए खतरा बनती है,तो कानून के तहत उसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है।

सिया की बात ने सड़क पर दोपहिया और साइकिल चालकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस को फिर सामने ला दिया है। शहरों में बढ़ते यातायात के बीच तेज रफ्तार,गलत तरीके से ओवरटेक करना और कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं के बेहद करीब से वाहन निकालना गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। साइकिल चालक और बाइक सवार कार की तुलना में काफी अधिक असुरक्षित होते हैं,इसलिए उनके आसपास वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।

गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सड़क पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यातायात नियमों का पालन और उनका प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन दोनों जरूरी हैं। सिया की माँग इसी दिशा में है कि सड़क सुरक्षा को केवल प्रतिबंध लगाने के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए,बल्कि लापरवाही से वाहन चलाने वालों के खिलाफ भी सख्त और समान कार्रवाई होनी चाहिए।

उनका कहना है कि हादसे के बाद केवल पीड़ित को सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है। व्यवस्था को यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़क पर नियम तोड़ने वालों को उनकी गलती का एहसास हो और कानून के तहत उचित कार्रवाई भी हो। सिया का सवाल सीधे तौर पर इसी जवाबदेही से जुड़ा है कि क्या किसी गंभीर हादसे या मौत के बाद ही प्रशासन सक्रिय होगा या उससे पहले ही लापरवाह वाहन चालकों पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।