नई दिल्ली,18 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने स्पष्ट किया है कि हार्दिक फिलहाल वनडे क्रिकेट में 10 ओवर का पूरा गेंदबाजी कोटा पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में भारतीय टीम प्रबंधन उन्हें जल्दबाजी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापस लाने के पक्ष में नहीं है। गंभीर के मुताबिक,हार्दिक की वापसी से पहले उन्हें पर्याप्त मैच अभ्यास और अपनी फिटनेस साबित करने का मौका दिया जाएगा।
हार्दिक पांड्या आईपीएल 2026 के बाद से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर हैं। चोट के कारण वह लंबे समय से मैदान से बाहर हैं और इसी वजह से आगामी वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में उनका चयन नहीं हुआ है। हालाँकि,उन्हें ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ होने वाली 50 ओवर की सीरीज के लिए भारत ए टीम में शामिल किया गया है। उनका इस सीरीज में खेलना फिटनेस से जुड़ी अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगा। टीम प्रबंधन के लिए यह सीरीज हार्दिक की मैच फिटनेस परखने का महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है।
गौतम गंभीर ने अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज समाप्त होने के बाद हार्दिक की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि फिलहाल वह वनडे में 10 ओवर गेंदबाजी करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हार्दिक ने आईपीएल के बाद पर्याप्त क्रिकेट नहीं खेला है और ऐसे में सीधे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उतरना उनके लिए उचित नहीं होगा। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट का लगातार बढ़ता दबाव और मैचों की तीव्रता शरीर पर काफी असर डाल सकती है,इसलिए वापसी की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
गंभीर के बयान से यह भी संकेत मिला कि भारतीय टीम हार्दिक को केवल बल्लेबाज के तौर पर टीम में शामिल करने के बजाय एक पूर्ण ऑलराउंडर के रूप में तैयार देखना चाहती है। खासकर वनडे क्रिकेट में उनका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि टीम को ऐसे खिलाड़ी की जरूरत होती है जो मध्यक्रम में बल्लेबाजी के साथ नियमित रूप से गेंदबाजी भी कर सके। 50 ओवर के मुकाबले में 10 ओवर गेंदबाजी करने की क्षमता इस भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हार्दिक की गैरमौजूदगी के बीच युवा ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी भारतीय टीम प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरे हैं। नितीश को पहले एशियन गेम्स के लिए चुनी गई टीम में जगह मिली थी,लेकिन अब उन्हें उस टीम से हटाकर वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि टीम प्रबंधन उन्हें 50 ओवर के क्रिकेट में अधिक मैच समय देना चाहता है।
नितीश ने चोट के कारण आयरलैंड,इंग्लैंड और जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज में हिस्सा नहीं लिया था। अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से उन्होंने वापसी की और गेंदबाजी से प्रभावित किया। तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने छह विकेट अपने नाम किए और सीरीज के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। दूसरे और तीसरे टी20 मुकाबले में उन्होंने तीन-तीन विकेट हासिल किए। उनकी इस वापसी ने टीम प्रबंधन को एक उपयोगी तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर का विकल्प दिया है।
गौतम गंभीर ने नितीश की गेंदबाजी की विशेष रूप से तारीफ की। उन्होंने कहा कि नितीश का गेंद से प्रभावी प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए बड़ा सकारात्मक पक्ष है। टीम प्रबंधन चाहता है कि वह अधिक से अधिक अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में खेलें,क्योंकि लगातार गेंदबाजी करने से उनकी क्षमता और अनुभव दोनों में सुधार होगा। गंभीर ने यह भी कहा कि मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने के साथ तेज गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ी बहुत कम उपलब्ध हैं,इसलिए नितीश की भूमिका आने वाले समय में महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारतीय टीम के लिए यह बदलाव केवल मौजूदा सीरीज तक सीमित नहीं है। टीम प्रबंधन की नजर अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप पर भी है। दक्षिण अफ्रीका में होने वाले इस बड़े टूर्नामेंट को देखते हुए तेज गेंदबाजी ऑलराउंडरों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में हार्दिक और नितीश दोनों को तैयार रखना भारतीय टीम के लिए उपयोगी हो सकता है। गंभीर ने संकेत दिया कि यदि हार्दिक पूरी तरह फिट होकर गेंदबाजी करने की स्थिति में लौटते हैं,तो भविष्य में दोनों खिलाड़ियों को एक साथ अंतिम एकादश में उतारने की संभावना भी मौजूद है।
गंभीर के मुताबिक,हार्दिक के लौटने के बाद नितीश के साथ उनका संयोजन टीम को अतिरिक्त विकल्प दे सकता है। एक खिलाड़ी मध्यक्रम में बल्लेबाजी और तेज गेंदबाजी दोनों कर सकता है,जबकि दूसरे से भी इसी तरह का योगदान मिलने पर टीम के पास गेंदबाजी में अधिक गहराई आ सकती है। हालाँकि,यह संयोजन तभी संभव होगा जब हार्दिक अपनी पूरी गेंदबाजी क्षमता हासिल कर लें और पर्याप्त मैच अभ्यास कर लें।
भारत ए के ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ मुकाबले हार्दिक की वापसी की दिशा में अगला चरण हो सकते हैं। यदि उन्हें फिटनेस मंजूरी मिलती है और वह इन मैचों में बिना किसी परेशानी के खेल पाते हैं,तो उनके लिए टी20 और वनडे टीम में वापसी का रास्ता खुल सकता है। गंभीर ने साफ किया है कि हार्दिक के लिए मैच अभ्यास बेहद जरूरी है। लंबे ब्रेक के बाद सीधे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उतरने के बजाय पहले प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में खुद को परखना उनकी वापसी की प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
इस बीच नितीश कुमार रेड्डी को भी नियमित क्रिकेट खेलने का फायदा मिलेगा। गंभीर ने कहा कि नितीश ने भी आईपीएल के बाद ज्यादा क्रिकेट नहीं खेला है,इसलिए उनके लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज महत्वपूर्ण होगी। इससे उन्हें 50 ओवर के प्रारूप की जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने का अवसर मिलेगा। टीम प्रबंधन उनके गेंदबाजी कार्यभार और बल्लेबाजी भूमिका दोनों पर नजर रख सकता है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में कुछ नियमित खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के कारण युवा खिलाड़ियों के लिए भी अवसर पैदा हुए हैं। नमन धीर और औकिब नबी को वनडे टीम में जगह दी गई है। गंभीर ने माना कि इस तरह की परिस्थितियां टीम के लिए एक तरह से चुनौती भी हैं,लेकिन इससे नए खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलता है। उनका कहना है कि टीम के पास जितने अधिक उपयोगी विकल्प होंगे,लंबे टूर्नामेंट और अलग-अलग परिस्थितियों में उतना ही फायदा मिल सकता है।
गंभीर ने यह भी स्वीकार किया कि अलग-अलग चोटों के कारण खिलाड़ियों की उपलब्धता लगातार प्रभावित हुई है। भारतीय टीम को हाल के दौर में कई मुकाबलों में अपनी सर्वश्रेष्ठ संभावित एकादश के साथ उतरने का मौका नहीं मिला। इससे टीम संयोजन को लेकर चुनौतियाँ बढ़ी हैं। मुख्य कोच ने कहा कि वह आलोचना का सामना कर सकते हैं,लेकिन उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कप्तान शुभमन गिल को लाल गेंद और सफेद गेंद दोनों प्रारूपों में अधिक से अधिक मौकों पर मजबूत और संतुलित टीम मिले।
कप्तान शुभमन गिल के लिए लगातार बदलती टीम के साथ तालमेल बनाना भी एक चुनौती हो सकता है। चोटों के कारण जब प्रमुख खिलाड़ी उपलब्ध नहीं होते हैं,तो कप्तान को अलग-अलग संयोजनों के साथ मैदान पर उतरना पड़ता है। गंभीर का मानना है कि लंबे समय में टीम को मजबूत बनाने के लिए खिलाड़ियों की फिटनेस और नियमित उपलब्धता बेहद जरूरी है।
हार्दिक पांड्या के मामले में भी यही रणनीति अपनाई जा रही है। टीम प्रबंधन उनकी जल्द वापसी के बजाय पूरी फिटनेस और पर्याप्त मैच अभ्यास को प्राथमिकता दे रहा है। भारत ए के लिए ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ खेलने से उन्हें अपनी मैच फिटनेस जांचने का अवसर मिलेगा। इसके बाद ही उनकी वरिष्ठ टीम में वापसी को लेकर अगला फैसला लिया जा सकता है।
फिलहाल भारतीय क्रिकेट में हार्दिक और नितीश के रूप में दो तेज गेंदबाजी ऑलराउंडरों को लेकर भविष्य की योजना पर काम किया जा रहा है। हार्दिक की अंतर्राष्ट्रीय वापसी उनकी फिटनेस और गेंदबाजी क्षमता पर निर्भर करेगी,जबकि नितीश को वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में अधिक जिम्मेदारी मिल सकती है। अफगानिस्तान के खिलाफ गेंद से उनके प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन को सकारात्मक संकेत जरूर दिए हैं।
गौतम गंभीर के बयान से इतना स्पष्ट है कि हार्दिक पांड्या की वापसी के लिए कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी। पहले उन्हें मैदान पर पर्याप्त समय बिताना होगा,अपनी फिटनेस साबित करनी होगी और 50 ओवर के क्रिकेट में गेंदबाजी का जरूरी कार्यभार संभालने की क्षमता दिखानी होगी। अगर वह इस प्रक्रिया में सफल रहते हैं,तो भारतीय टीम के लिए हार्दिक और नितीश दोनों को एक साथ खिलाने का विकल्प भी खुल सकता है। आने वाले महीनों में इन दोनों ऑलराउंडरों की फिटनेस और प्रदर्शन भारतीय टीम के संतुलन तथा विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे।
