नई दिल्ली,18 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय क्रिकेट टीम ने अफगानिस्तान के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3-0 से क्लीन स्वीप कर लिया। सीरीज में भारतीय टीम ने अपने प्रदर्शन के साथ कई खिलाड़ियों की भूमिका को भी स्पष्ट किया। हालाँकि,इस पूरी सीरीज में युवा बाएँ हाथ के सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली। जिम्बाब्वे दौरे पर अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने वाले वैभव को अफगानिस्तान के खिलाफ मौका मिलने की उम्मीद की जा रही थी,लेकिन टीम प्रबंधन ने अनुभवी संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की सलामी जोड़ी पर भरोसा कायम रखा।
सीरीज जीतने के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी की स्थिति को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा बल्लेबाज को टीम में अपनी जगह बनाने के लिए अपने मौके का इंतजार करना होगा। गंभीर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय टीम में चयन के लिए उम्र को आधार नहीं बनाया जाता। यदि किसी खिलाड़ी में प्रतिभा है और वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है, तो उसे अवसर मिलने की संभावना बनी रहती है।
गौतम गंभीर के मुताबिक,टीम प्रबंधन वैभव की प्रतिभा से अच्छी तरह परिचित है और उसे यह भी पता है कि वह किस स्तर का क्रिकेट खेल सकता है। हालाँकि,फिलहाल टीम में मौजूद संयोजन को देखते हुए उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ेगा। गंभीर ने कहा कि वैभव को उनकी टीम में स्थिति और भारत के लिए खेलने की कतार के बारे में स्पष्ट रूप से बताया गया है।
वैभव सूर्यवंशी के लिए अफगानिस्तान सीरीज से पहले उम्मीदें इसलिए भी बढ़ गई थीं क्योंकि उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई सीरीज में प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। युवा बल्लेबाज ने वहाँ अपनी बल्लेबाजी से टीम प्रबंधन और क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींचा और उन्हें सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था। उनके प्रदर्शन को देखते हुए यह चर्चा तेज थी कि अफगानिस्तान के खिलाफ वह अभिषेक शर्मा के साथ पारी की शुरुआत कर सकते हैं।
हालाँकि,भारतीय टीम प्रबंधन ने इस सीरीज में उस सलामी जोड़ी को बरकरार रखने का फैसला किया, जिसने 2026 टी20 विश्व कप में भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को बतौर सलामी बल्लेबाज उतारने का फैसला टीम के लिए सफल साबित हुआ। दोनों ने पूरी सीरीज में लगातार रन बनाए और भारत की 3-0 की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अभिषेक और सैमसन ने मिलकर सीरीज में 346 रन बनाए। अभिषेक शर्मा ने तीन पारियों में एक शतक और एक अर्धशतक लगाया,जबकि संजू सैमसन ने दो अर्धशतक अपने नाम किए। तीसरे और निर्णायक टी20 मुकाबले में दोनों ने भारतीय पारी की शुरुआत करते हुए पहले विकेट के लिए 142 रन की बड़ी साझेदारी की। इस साझेदारी ने टीम को मजबूत शुरुआत दी और दोनों सलामी बल्लेबाजों के बीच तालमेल को भी दिखाया।
गौतम गंभीर ने इस सलामी संयोजन को बरकरार रखने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि विश्व कप के दौरान जिस संयोजन के साथ टीम ने सफलता हासिल की थी,उसे तुरंत बदलने की जरूरत नहीं थी। उनके अनुसार,अगर किसी खिलाड़ी या टीम को लगातार कुछ मैचों में असफलता मिलती है,तो इसका मतलब यह नहीं होता कि वह खिलाड़ी या टीम अचानक खराब हो गई है।
गंभीर ने कहा कि उनका नजरिया पहले से स्पष्ट था कि विश्व कप के दौरान जो संयोजन भारत के लिए सफल रहा,टीम उसी के साथ आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुछ मैचों में विफलता के आधार पर किसी खिलाड़ी की क्षमता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि खिलाड़ियों को लंबे समय तक प्रदर्शन करने का अवसर और भरोसा मिलना जरूरी है।
मुख्य कोच ने यह भी कहा कि जिस टीम ने एक विश्व कप से दूसरे विश्व कप तक लगातार अच्छा प्रदर्शन किया हो और विश्व कप जीतने में सफलता हासिल की हो,उसे एक-दो सीरीज के नतीजों के आधार पर कमजोर नहीं माना जा सकता। इसी तरह दो या तीन असफल पारियों के बाद किसी खिलाड़ी को खराब खिलाड़ी नहीं कहा जा सकता। गंभीर के बयान से साफ है कि टीम प्रबंधन मौजूदा सलामी जोड़ी को लेकर फिलहाल आश्वस्त है।
वहीं, वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दौर धैर्य रखने का है। कम उम्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके वैभव के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती लगातार घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन को बनाए रखना होगी। टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें मौजूदा खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ अपने अवसर का भी इंतजार करना होगा।
गंभीर ने खास तौर पर कहा कि भारतीय टीम के लिए खेलने की कतार में उम्र कोई मायने नहीं रखती। इसका अर्थ यह है कि वैभव की कम उम्र उनके लिए बाधा नहीं है,लेकिन उन्हें अपनी बारी आने तक तैयार रहना होगा। टीम प्रबंधन उनकी क्षमता को पहचानता है और आगे परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर उन्हें अवसर मिल सकता है।
अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में भारत का 3-0 से जीतना टीम के मौजूदा संयोजन के सफल रहने का संकेत है। अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने जहाँ बल्ले से अपनी उपयोगिता साबित की,वहीं वैभव सूर्यवंशी को इस सीरीज से बाहर बैठकर इंतजार करना पड़ा। अब उनकी नजरें आने वाले मुकाबलों पर होंगी,जहाँ उन्हें अंतिम एकादश में जगह बनाने का अवसर मिल सकता है। फिलहाल गंभीर के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिभा को लेकर टीम प्रबंधन को वैभव पर भरोसा है,लेकिन मौजूदा टीम संयोजन में उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना होगा।
