सोल,21 सितंबर (युआईटीवी)- उत्तर कोरिया ने रविवार को पूर्वी समुद्री क्षेत्र की ओर दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं,लेकिन सोमवार सुबह तक देश की सरकारी मीडिया ने इन परीक्षणों को लेकर कोई जानकारी प्रसारित नहीं की। उत्तर कोरिया आमतौर पर अपने मिसाइल परीक्षणों और सैन्य गतिविधियों की जानकारी अगले दिन सरकारी मीडिया के जरिए देता रहा है,लेकिन हाल के महीनों में इस परंपरा में लगातार बदलाव देखने को मिला है। कई मिसाइल लॉन्च के बाद सरकारी मीडिया की ओर से तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई,जिससे देश की सैन्य गतिविधियों को लेकर आधिकारिक सूचना और बाहरी आकलनों के बीच अंतर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने रविवार को किए गए दोनों मिसाइल लॉन्च का कोई उल्लेख नहीं किया। दोनों मिसाइलें कुछ घंटे के अंतराल पर दागी गई थीं। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने वॉनसान क्षेत्र से दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें पूर्वी समुद्र की दिशा में लॉन्च कीं। पहली मिसाइल दोपहर करीब तीन बजे दागी गई,जबकि दूसरी मिसाइल शाम लगभग 5 बजकर 50 मिनट पर लॉन्च की गई। दोनों प्रक्षेपणों के बीच करीब तीन घंटे का अंतर रहा।
दक्षिण कोरियाई सेना के प्रारंभिक आकलन के अनुसार,पहली मिसाइल ने लगभग 450 किलोमीटर की दूरी तय की। दूसरी मिसाइल 600 किलोमीटर से अधिक दूरी तक गई। दक्षिण कोरिया की सेना ने इन लॉन्च की निगरानी की और संबंधित गतिविधियों की जानकारी अमेरिका के साथ साझा की। दोनों देशों की सेनाएं उत्तर कोरिया की मिसाइल और परमाणु गतिविधियों पर लगातार नजर रखती हैं,क्योंकि प्योंगयांग पहले भी विभिन्न प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है।
हालिया मिसाइल लॉन्च को लेकर उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया की चुप्पी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले कुछ समय से मिसाइल परीक्षणों की आधिकारिक रिपोर्टिंग का तरीका अनियमित हुआ है। पिछले महीने किए गए तीन मिसाइल लॉन्च के बारे में भी सरकारी मीडिया ने कोई जानकारी नहीं दी थी। इससे पहले 12 सितंबर को किए गए एक मिसाइल लॉन्च की जानकारी सरकारी मीडिया ने दो दिन बाद दी थी। यह परीक्षण दक्षिण कोरिया,अमेरिका और जापान के संयुक्त सैन्य अभ्यास के समाप्त होने के एक दिन बाद किया गया था।
उत्तर कोरिया लंबे समय से दक्षिण कोरिया और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है। प्योंगयांग का कहना है कि इस तरह के सैन्य अभ्यास उसकी सीमाओं के आसपास सैन्य दबाव बढ़ाने का हिस्सा हैं। इसके विपरीत दक्षिण कोरिया और अमेरिका इन अभ्यासों को अपनी संयुक्त रक्षा क्षमता मजबूत करने और संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारी के लिए जरूरी बताते हैं। जापान की भागीदारी से क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग का दायरा और बढ़ गया है।
रविवार को हुए मिसाइल परीक्षणों का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ये लॉन्च संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय सामान्य बहस की शुरुआत से ठीक पहले हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा का उच्चस्तरीय सत्र मंगलवार को अमेरिकी समय के अनुसार शुरू होना है। ऐसे समय में उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधि ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा स्थिति की ओर खींचा है।
इसके अलावा,इन मिसाइल परीक्षणों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित बैठक भी चर्चा में है। दोनों नेताओं की वॉशिंगटन में गुरुवार को मुलाकात होने की उम्मीद है। चीन उत्तर कोरिया का प्रमुख पड़ोसी और ऐतिहासिक सहयोगी है,जबकि अमेरिका दक्षिण कोरिया और जापान के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने में जुटा है। ऐसे में प्योंगयांग की सैन्य गतिविधियों का समय क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन घटनाक्रमों के बीच उत्तर कोरिया की ओर से लगातार यह संकेत दिए जाते रहे हैं कि वह अपनी सैन्य क्षमताओं के विकास को रोकने के लिए तैयार नहीं है। हालिया मिसाइल परीक्षणों को भी इसी व्यापक सैन्य नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालाँकि,इन परीक्षणों के पीछे उत्तर कोरियाई नेतृत्व की तत्काल रणनीतिक मंशा को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इसके उद्देश्य के बारे में किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।
मिसाइल लॉन्च से दो दिन पहले उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की प्रभावशाली बहन किम यो-जोंग ने अमेरिका के नेतृत्व में हुए बहुराष्ट्रीय ‘पैसिफिक वैनगार्ड’ समुद्री सैन्य अभ्यास की आलोचना की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया इस तरह की सैन्य गतिविधियों का जवाब उसी स्तर पर या उससे अधिक ताकत के साथ देगा। उनके बयान के बाद हुए मिसाइल परीक्षणों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता को और बढ़ा दिया है।
उत्तर कोरिया हाल के दिनों में दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान की भागीदारी वाले प्रमुख सैन्य अभ्यासों के खिलाफ अपनी बयानबाजी भी तेज कर चुका है। प्योंगयांग इन अभ्यासों को अपनी सुरक्षा के लिए उकसावे वाली गतिविधि के तौर पर पेश करता है। वहीं, तीनों देश उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों के मद्देनजर आपसी सैन्य समन्वय बढ़ा रहे हैं।
सरकारी मीडिया की ओर से मिसाइल परीक्षणों की जानकारी नहीं दिए जाने का एक और पहलू उत्तर कोरिया की सूचना नीति से जुड़ा है। आमतौर पर देश का सरकारी मीडिया सैन्य परीक्षणों को नेतृत्व की उपलब्धि के रूप में पेश करता रहा है। कई मौकों पर मिसाइल परीक्षणों की तस्वीरें और विस्तृत जानकारी भी जारी की जाती रही हैं,लेकिन हाल के महीनों में कुछ परीक्षणों को लेकर देरी या पूरी तरह चुप्पी देखी गई है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या प्योंगयांग अपनी कुछ सैन्य गतिविधियों को सार्वजनिक करने के समय और तरीके में बदलाव कर रहा है।
फिलहाल दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगी उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। दो मिसाइलों का अलग-अलग समय पर किया गया प्रक्षेपण और उनकी अलग-अलग दूरी तक उड़ान यह दिखाती है कि प्योंगयांग विभिन्न प्रकार की मिसाइल क्षमताओं का परीक्षण जारी रखे हुए है। आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया का सरकारी मीडिया इन परीक्षणों पर कोई आधिकारिक जानकारी देता है या नहीं,इस पर भी नजर रहेगी। साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा और अमेरिका-चीन शीर्ष स्तर की प्रस्तावित बैठक के बीच उत्तर कोरिया का अगला कदम क्षेत्रीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
