28 सितंबर से तीन दिवसीय बैंक हड़ताल,वित्त मंत्रालय ने बुलाई बैठक (तस्वीर क्रेडिट@VKSHARM38870321)

28 सितंबर से तीन दिवसीय बैंक हड़ताल,वित्त मंत्रालय ने बुलाई बैठक; पाँच दिन तक सेवाएँ प्रभावित होने की आशंका

नई दिल्ली,21 सितंबर (युआईटीवी)- देशभर में 28 सितंबर से प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों,इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और नाबार्ड के मुख्य कार्यकारियों की बैठक बुलाई है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाओं को सामान्य बनाए रखने और ग्राहकों को जरूरी सेवाएँ उपलब्ध कराने की तैयारियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। बैठक में संभावित व्यवधान से निपटने के लिए वैकल्पिक और आकस्मिक व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जा सकती है।

प्रस्तावित हड़ताल ऐसे समय हो रही है,जब बैंकों के लिए छमाही समापन की अवधि भी नजदीक है। इस वजह से बैंकिंग परिचालन पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वित्तीय सेवा विभाग की बैठक में इस बात पर चर्चा हो सकती है कि हड़ताल के दौरान आवश्यक बैंकिंग सेवाएँ किस तरह जारी रखी जाएँ और ग्राहकों को होने वाली असुविधा को न्यूनतम कैसे किया जाए। खास तौर पर नकद लेनदेन, चेक प्रोसेसिंग और शाखाओं के स्तर पर होने वाले जरूरी काम प्रभावित न हों,इसके लिए उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने किया है। यह बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की सात यूनियनों का संयुक्त संगठन है। यूनियनों की ओर से कई मांगें रखी गई हैं,जिनमें पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना प्रमुख मुद्दा है। बैंक यूनियनें लंबे समय से शनिवार और रविवार को अवकाश देकर सप्ताह में पाँच दिन बैंकिंग कार्य व्यवस्था लागू करने की माँग कर रही हैं। इसी माँग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने इससे पहले 11 सितंबर को भी राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आयोजन किया था।

पिछली हड़ताल के दौरान देश के कई हिस्सों में बैंक शाखाओं की सामान्य सेवाओं पर असर पड़ा था। कई स्थानों पर काउंटर सेवाएँ,नकद लेनदेन और चेक क्लियरेंस प्रभावित हुए थे। हालाँकि,मुंबई में बैंकिंग गतिविधियाँ काफी हद तक सामान्य बनी रही थीं,लेकिन मध्य प्रदेश, गोवा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में बैंकिंग सेवाओं में व्यवधान की जानकारी सामने आई थी। छोटे शहरों और कस्बों में शाखा स्तर की सेवाओं पर इसका असर विशेष रूप से देखने को मिला था।

इस बार प्रस्तावित हड़ताल की तारीखों को लेकर ग्राहकों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत है। इसके बाद 28, 29 और 30 सितंबर को हड़ताल प्रस्तावित है। इस तरह 26 सितंबर से 30 सितंबर तक लगातार पाँच दिनों तक सामान्य बैंक शाखा परिचालन प्रभावित रहने की स्थिति बन सकती है। हालाँकि,डिजिटल बैंकिंग और एटीएम जैसी कई सेवाएँ उपलब्ध रह सकती हैं,लेकिन शाखाओं पर निर्भर ग्राहकों के लिए नकद निकासी,जमा, चेक से जुड़े काम और अन्य सेवाओं को लेकर परेशानी की आशंका बनी हुई है।

बैंक यूनियनों की माँग केवल पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह तक सीमित नहीं है। कर्मचारी संगठनों ने पेंशन लाभों में सुधार और पेंशनभोगियों के लिए समान महँगाई भत्ता फॉर्मूला लागू करने की माँग भी उठाई है। इसके अलावा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प देने की माँग भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। यूनियनों का दावा है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस देश के करीब 90 प्रतिशत बैंकिंग कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रस्तावित हड़ताल को लेकर यूनियनों ने 26 अगस्त को औपचारिक नोटिस दिया था। इसके बाद मांगों को लेकर यूनियन प्रतिनिधियों, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और सरकारी अधिकारियों के बीच सुलह बैठकों का दौर चला। इन बैठकों का उद्देश्य हड़ताल को टालने और कर्मचारियों की मांगों पर समाधान तलाशने का था। हालाँकि,पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की माँग को लेकर बातचीत में अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

वित्त मंत्रालय की ओर से बुलाई गई बैठक को इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के अधिकारी हड़ताल के दौरान सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध विकल्पों पर चर्चा करेंगे। साथ ही छमाही समापन के समय बैंकिंग व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े,इसके लिए आकस्मिक योजना को भी अंतिम रूप दिया जा सकता है।

लगातार पाँच दिनों तक शाखा सेवाओं के प्रभावित होने की संभावित स्थिति में ग्राहकों के लिए पहले से बैंकिंग कार्य निपटाना महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेष रूप से जिन लोगों को चेक जमा करने,नकद लेनदेन, दस्तावेज जमा करने या शाखा से जुड़े अन्य जरूरी काम करने हैं,उनके लिए हड़ताल की अवधि को ध्यान में रखना जरूरी होगा। दूसरी ओर,बैंकिंग संस्थानों के लिए भी डिजिटल माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक सेवाएँ उपलब्ध रखने और ग्राहकों को जरूरी जानकारी समय पर देने की चुनौती होगी।

फिलहाल हड़ताल को लेकर बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। वित्त मंत्रालय की बैठक और संबंधित पक्षों के बीच आगे होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट हो सकता है कि प्रस्तावित हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाओं को किस तरह संचालित किया जाएगा। यदि हड़ताल तय कार्यक्रम के अनुसार होती है,तो सप्ताहांत के साथ इसके जुड़ने के कारण बैंक शाखाओं के सामान्य कामकाज पर लगातार कई दिनों तक असर पड़ने की संभावना रहेगी।