वॉशिंगटन,25 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और चीन ने अपने बीच जारी व्यापारिक संघर्षविराम को दो महीने के लिए आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। अब दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापारिक व्यवस्था 10 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी। पहले यह समझौता 10 नवंबर,2026 को समाप्त होने वाला था। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 23 सितंबर को चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग के साथ बातचीत के बाद इस विस्तार की जानकारी दी। दोनों देशों के बीच यह सहमति ऐसे समय बनी है,जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वॉशिंगटन पहुँचे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी उच्चस्तरीय बैठक हो रही है।
व्यापारिक संघर्षविराम की अवधि बढ़ाने का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों को व्यापक आर्थिक समझौते पर बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देना है। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच हुई बातचीत में इस बात पर विचार किया गया कि अलग-अलग छोटे समझौतों के बजाय दोनों देश किसी बड़े आर्थिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि 10 जनवरी 2027 तक ऐसा व्यापक समझौता हो ही जाएगा। उनका कहना है कि अमेरिका मौजूदा व्यवस्था को आगे बढ़ाने और बड़े समझौते की दिशा में काम करने,दोनों विकल्पों के लिए तैयार है।
मौजूदा व्यापारिक संघर्षविराम की पृष्ठभूमि पिछले साल दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई अमेरिका-चीन वार्ता से जुड़ी है। इस व्यवस्था के तहत दोनों देशों ने अतिरिक्त शुल्क बढ़ाने और जवाबी व्यापारिक कदमों को कुछ समय के लिए रोकने पर सहमति बनाई थी। इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा से जुड़े व्यापार तथा अमेरिकी कृषि उत्पादों की चीन द्वारा खरीद जैसे मुद्दों पर भी समझ बनी थी। अब संघर्षविराम को जनवरी तक बढ़ाने से दोनों पक्षों को इन प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और लंबित मुद्दों पर बातचीत जारी रखने का अवसर मिलेगा।
स्कॉट बेसेंट और हे लिफेंग के बीच सितंबर में लगातार बातचीत हुई है। दोनों के बीच 20 सितंबर को न्यूयॉर्क में भी विस्तृत चर्चा हुई थी। इसके बाद 23 सितंबर को वॉशिंगटन में दोनों अधिकारियों की एक और बैठक हुई। इसी बैठक के बाद व्यापारिक संघर्षविराम को दो महीने आगे बढ़ाने की घोषणा की गई। यह बातचीत डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक से पहले दोनों देशों के बीच लंबित आर्थिक मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश का हिस्सा थी।
कृषि उत्पादों की खरीद भी अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। स्कॉट बेसेंट के अनुसार, चीन अमेरिका से सोयाबीन की खरीद से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है,लेकिन कुछ अन्य अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत केवल शुल्क या व्यापारिक प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि उत्पादों, बाजार पहुँच और अन्य आर्थिक प्रतिबद्धताओं को लेकर भी जारी रहने वाली है।
हालाँकि,व्यापारिक संघर्षविराम की अवधि बढ़ना दोनों देशों के बीच सभी मतभेदों के समाप्त होने का संकेत नहीं है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार के अलावा तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता,महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे भी हैं। दोनों देश इन क्षेत्रों में एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जबकि साथ ही ऐसे तंत्र बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं,जिनसे किसी बड़े विवाद या गलतफहमी को बढ़ने से रोका जा सके।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई भी दोनों देशों के बीच बातचीत के नए प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो गया है। स्कॉट बेसेंट ने चीन के साथ एआई से जुड़े जोखिमों और गंभीर घटनाओं की स्थिति में सीधे संवाद के लिए एक संचार तंत्र बनाने पर चर्चा की है। इसका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तेजी से संपर्क स्थापित करना है,जब किसी एआई प्रणाली से जुड़ी घटना राष्ट्रीय सुरक्षा या अन्य गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। दोनों पक्ष एआई को लेकर संवाद शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं,हालाँकि उन्नत एआई तकनीक और चिप्स से जुड़े मतभेद अभी बने हुए हैं।
इस बीच शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर व्यापक ध्यान खींचा है। डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच व्यापार और आर्थिक मुद्दों के अलावा तकनीक, सुरक्षा और अन्य अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर भी चर्चा हो रही है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक तनाव बढ़ने के बाद शुल्क,निर्यात प्रतिबंध और तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने संबंधों को प्रभावित किया है। ऐसे में मौजूदा संघर्षविराम को आगे बढ़ाने का फैसला तत्काल तौर पर बातचीत का रास्ता खुला रखने के रूप में देखा जा रहा है।
शी जिनपिंग ने भी अमेरिका पहुँचने के बाद दोनों देशों के संबंधों में स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया है। चीनी राष्ट्रपति की ओर से यह संदेश दिया गया है कि अमेरिका और चीन को अपने मतभेदों के बावजूद संबंधों को स्थिर बनाए रखने और सहयोग के अवसर तलाशने चाहिए। यह संकेत ऐसे समय आया है,जब दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ रणनीतिक मतभेद भी बने हुए हैं।
आने वाले महीनों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ता का मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि मौजूदा संघर्षविराम को किसी व्यापक आर्थिक समझौते में बदला जा सकता है या नहीं। 10 जनवरी 2027 की नई समयसीमा दोनों देशों को बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देती है,लेकिन इससे किसी बड़े समझौते की गारंटी नहीं मिलती। फिलहाल दोनों पक्षों ने व्यापारिक तनाव को तत्काल बढ़ने से रोकने के साथ-साथ लंबित आर्थिक और तकनीकी मुद्दों पर बातचीत जारी रखने का रास्ता चुना है।
