ईरान ने छठे दिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का प्रस्ताव रखा,सातवें दिन अमेरिका से परमाणु वार्ता की पेशकश; ट्रंप ने किया खारिज (तस्वीर क्रेडिट@Resumen_Final)

ईरान का बड़ा प्रस्ताव: छठे दिन खुलेगा हॉर्मुज जलडमरूमध्य,सातवें दिन अमेरिका से परमाणु वार्ता की पेशकश; ट्रंप ने किया खारिज

वाशिंगटन,28 सितंबर (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत बहाल करने को लेकर सात दिनों की एक प्रस्तावित योजना सामने रखी है। ईरान के मुताबिक,अगर अमेरिका कुछ शर्तें पूरी करता है तो छठे दिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है और सातवें दिन दोनों देशों के बीच व्यापक समझौते के लिए बातचीत शुरू हो सकती है। हालाँकि,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। वॉशिंगटन का कहना है कि तेहरान ने बातचीत शुरू होने से पहले ही अमेरिका से कई बड़ी रियायतों की माँग कर दी है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को अमेरिकी समाचार कार्यक्रम में इस प्रस्ताव का विवरण देते हुए कहा कि तेहरान की योजना स्पष्ट है। उनके अनुसार, अगर अमेरिका सैन्य संघर्ष समाप्त करता है, ईरान की नाकेबंदी हटाता है, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों तक पहुँच बहाल करता है और ईरान को अपना तेल बेचने की अनुमति देता है, तो तेहरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान जिन कदमों की मांग कर रहा है, उन्हें कुछ दिनों के भीतर पूरा किया जा सकता है।

अराघची के मुताबिक, ईरान ने सात दिन की योजना के तहत पहले चरण में अमेरिकी कदमों की माँग की है। इसके बाद छठे दिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और सातवें दिन परमाणु मुद्दे पर व्यापक बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव है। उनका कहना है कि इस योजना के जरिए संघर्ष को रोकने, समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने और कूटनीतिक बातचीत को फिर से शुरू करने का रास्ता तैयार किया जा सकता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित इस जलमार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव या समुद्री यातायात में रुकावट का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहता,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुँच और तेल निर्यात की अनुमति को महत्वपूर्ण शर्त मानता है। उनका कहना है कि अगर अमेरिका इन मुद्दों पर आवश्यक कदम उठाता है तो हॉर्मुज को फिर से खोलने के लिए समझौते का रास्ता मौजूद है। अराघची ने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति के लिए तैयार है और उसका प्रस्ताव बातचीत की मेज पर मौजूद है।

हालाँकि,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। ट्रंप के अनुसार,अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है जिसके तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत खोला जाए। उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय तत्काल समुद्री मार्ग खोलने की मांग पर जोर दिया। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका हॉर्मुज पर नियंत्रण की स्थिति में है और ईरान के प्रस्ताव की शर्तों को स्वीकार करने का कोई कारण नहीं है।

अमेरिकी पक्ष की ओर से संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने भी ईरान की योजना पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तेहरान ने बातचीत शुरू होने से पहले ही कई महत्वपूर्ण रियायतें माँग ली हैं। उनके अनुसार,ईरान चाहता है कि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रतिबंधों में राहत दी जाए और अरबों डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों तक उसकी पहुँच बहाल की जाए। वॉल्ट्ज ने तर्क दिया कि ईरान पहले ही अपनी मांगें पूरी करवाना चाहता है और उसके बाद बातचीत करने की बात कर रहा है।

वॉल्ट्ज ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय जहाजों के खिलाफ कार्रवाई करके पहले हुए एक समझौता ज्ञापन का उल्लंघन किया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में तेहरान के प्रस्ताव पर भरोसा करना कठिन है। वॉल्ट्ज के अनुसार,अमेरिकी राष्ट्रपति को इस बात पर भरोसा नहीं है कि ईरान वास्तविक और गंभीर बातचीत के लिए तैयार है और इससे उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस समझौता हो पाएगा।

हालाँकि,ईरान ने अमेरिकी पक्ष के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। तेहरान का कहना है कि पिछले समझौतों का उल्लंघन अमेरिका की ओर से हुआ था। ईरानी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका प्रस्ताव किसी एकतरफा रियायत पर आधारित नहीं है,बल्कि दोनों पक्षों की ओर से कदम उठाने की व्यवस्था के रूप में रखा गया है।

अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से सार्वजनिक रूप से प्रस्ताव खारिज किए जाने के बावजूद ईरान अभी अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। उनके अनुसार,दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष संवाद के बजाय मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है और उसकी ओर से बातचीत की मेज पर एक प्रस्ताव रखा जा चुका है। अगर अमेरिका इसे बिना किसी वजह के खारिज करता है तो इसकी जिम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी,ऐसा उनका कहना है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर अपना रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि तेहरान पहले के समझौता ज्ञापन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि ईरान बातचीत के दौरान किए गए वादों का पालन करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाओं और अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकता है।

पेजेश्कियन ने कहा कि परमाणु कार्यक्रम से संबंधित मुद्दों पर परमाणु अप्रसार संधि और मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय नियमों के दायरे में समझौता किया जा सकता है। हालाँकि,उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ईरानी परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया। तेहरान का कहना है कि सैन्य कार्रवाई और उसके परमाणु कार्यक्रम के बीच पैदा हुए तनाव के बावजूद कूटनीतिक समाधान की संभावना समाप्त नहीं हुई है।

ईरान के रुख में एक तरफ बातचीत का प्रस्ताव है,तो दूसरी तरफ संभावित सैन्य संघर्ष के लिए तैयार रहने का संदेश भी दिया गया है। अराघची ने कहा कि अगर युद्ध दोबारा शुरू होता है तो ईरान इसके लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीति का रास्ता अभी खुला हुआ है। उनके मुताबिक अब आगे की दिशा तय करने की जिम्मेदारी अमेरिकी नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करती है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों पक्षों के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। ईरान इसे बातचीत और आपसी कदमों से जोड़ रहा है,जबकि अमेरिका तत्काल इसे खोलने की माँग कर रहा है। यही अंतर दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित सात दिवसीय योजना को लेकर मुख्य विवाद बन गया है। ईरान का कहना है कि पहले अमेरिकी प्रतिबंधों,संपत्तियों और तेल निर्यात से जुड़े मुद्दों पर कदम उठाए जाने चाहिए,जबकि अमेरिका इन रियायतों को बातचीत से पहले देने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में परमाणु कार्यक्रम भी केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण और परमाणु गतिविधियों पर कुछ सीमाओं को लेकर चर्चा कर सकता है। हालाँकि,तेहरान यह भी कहता रहा है कि उसके परमाणु अधिकारों और मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को ध्यान में रखते हुए ही किसी व्यवस्था पर सहमति हो सकती है। दूसरी ओर,अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अधिक व्यापक आश्वासन चाहता है।

हॉर्मुज को खोलने की पेशकश ऐसे समय में आई है,जब क्षेत्रीय तनाव का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी असर पड़ रहा है। इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले ऊर्जा व्यापार के कारण इसकी सुरक्षा वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक यातायात बाधित रहने की स्थिति में तेल आपूर्ति, परिवहन लागत और ऊर्जा बाजारों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी समझौते में हॉर्मुज की स्थिति एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।

फिलहाल ईरान की सात दिवसीय योजना और अमेरिकी असहमति के बीच कूटनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। ईरान का कहना है कि वह मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। तेहरान ने बातचीत का विकल्प खुला रखा है, जबकि अमेरिका ने प्रस्ताव में शामिल शुरुआती शर्तों पर आपत्ति जताई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्ष हॉर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंधों, फ्रीज की गई संपत्तियों, तेल निर्यात और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर किसी साझा आधार तक पहुँच पाते हैं या नहीं। फिलहाल दोनों देशों के सार्वजनिक बयानों से इतना स्पष्ट है कि सैन्य टकराव की आशंका के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत की संभावना भी बनी हुई है।