शहीद भगत सिंह की जयंती पर पीएम मोदी ने किया नमन (तस्वीर क्रेडिट@gondane_nikhil)

शहीद भगत सिंह की जयंती पर पीएम मोदी ने किया नमन,बोले- उनका साहस युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

नई दिल्ली,28 सितंबर (युआईटीवी)- शहीद भगत सिंह की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगत सिंह का अदम्य साहस,शौर्य और राष्ट्र के सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने का जज्बा आज भी देश के युवाओं के लिए हिम्मत और हौसले का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संदेश साझा कर भगत सिंह के योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी 28 सितंबर 2026 को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दिए जाने की पुष्टि की है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि शहीद भगत सिंह ने अपने अदम्य साहस और शौर्य के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन को नई धार दी। उन्होंने कहा कि देश के सम्मान के लिए अपना सब कुछ बलिदान करने की भगत सिंह की भावना भारत के युवाओं की हिम्मत और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने भगत सिंह के साहस और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया।

वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने भगत सिंह को हर भारतीय,विशेष रूप से देश के युवाओं के लिए प्रेरणापुंज बताया। उन्होंने कहा कि निर्भीकता भगत सिंह के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। प्रधानमंत्री ने उनके जीवन के उस प्रसंग का भी उल्लेख किया,जब फाँसी से पहले भगत सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत को पत्र लिखकर अपने साथियों के साथ युद्धबंदियों जैसा व्यवहार करने की माँग की थी।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भगत सिंह चाहते थे कि उन्हें और उनके साथियों को फाँसी देने के बजाय गोली मारकर मौत दी जाए। उन्होंने इस प्रसंग को भगत सिंह के अदम्य साहस का प्रमाण बताया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भगत सिंह लोगों की पीड़ा के प्रति संवेदनशील थे और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहते थे। अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने उन्हें आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की।

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गाँव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका जीवन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी दौर से गहराई से जुड़ा रहा। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना और आगे चलकर देश के सबसे चर्चित क्रांतिकारी नेताओं में शामिल हुए। सरकारी प्रकाशनों में भी उनके जीवन,विचारों और बलिदान को स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज किया गया है।

भगत सिंह के जीवन पर जलियांवाला बाग हत्याकांड का गहरा प्रभाव पड़ा। 1919 में अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार के समय उनकी उम्र करीब 12 वर्ष थी। इस घटना ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी। बाद के वर्षों में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सक्रिय रूप से संघर्ष करने का रास्ता अपनाया। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका धीरे-धीरे व्यापक होती गई और उनके विचारों ने युवाओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया।

भगत सिंह ने युवावस्था में क्रांतिकारी संगठनों के साथ काम किया। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े और अपने साथियों के साथ ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हुए। लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और बाद में उनकी मृत्यु ने भी भगत सिंह तथा उनके साथियों को प्रभावित किया। ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या के मामले में भगत सिंह और उनके साथियों का नाम सामने आया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने उनकी तलाश तेज कर दी।

8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका। इस घटना का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था। दोनों ने घटना के बाद भागने के बजाय गिरफ्तारी दी। इस दौरान ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा भी व्यापक रूप से चर्चित हुआ। विधानसभा बम कांड के बाद भगत सिंह पूरे देश में एक प्रमुख क्रांतिकारी चेहरे के रूप में पहचाने जाने लगे।

गिरफ्तारी के बाद भगत सिंह और उनके साथियों पर मुकदमा चला। जेल में रहते हुए उन्होंने राजनीतिक बंदियों के अधिकारों और जेल की परिस्थितियों के खिलाफ भूख हड़ताल भी की। उनके विचार केवल ब्रिटिश शासन के विरोध तक सीमित नहीं थे,बल्कि वे सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के सवालों पर भी लिखते और विचार करते थे। उनके लेखन और वक्तव्यों में तर्क,सामाजिक न्याय और स्वतंत्रता से जुड़े विषयों पर जोर दिखाई देता है।

भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव को लाहौर षड्यंत्र मामले में मौत की सजा सुनाई गई। 23 मार्च 1931 को तीनों क्रांतिकारियों को फाँसी दे दी गई। उस समय भगत सिंह की उम्र केवल 23 वर्ष थी। उनकी शहादत के बाद देशभर में युवाओं के बीच उनके प्रति गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। आज भी 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को याद किया जाता है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष भी 23 मार्च को शहीद दिवस के अवसर पर तीनों क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी थी।

भगत सिंह की जयंती हर वर्ष 28 सितंबर को मनाई जाती है। इस दिन देशभर में उनके जीवन, विचारों और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अलग-अलग वर्षों में उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते रहे हैं। 2023 में प्रधानमंत्री ने भगत सिंह के बलिदान और स्वतंत्रता के लिए उनके समर्पण को पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बताया था। 2024 में भी उन्होंने भगत सिंह को उनकी जन्म-जयंती पर नमन किया था।

भगत सिंह की पहचान केवल एक क्रांतिकारी के रूप में नहीं,बल्कि एक ऐसे युवा विचारक के रूप में भी हुई,जिसने अपने समय के राजनीतिक और सामाजिक सवालों पर गंभीरता से विचार किया। उनकी उम्र बहुत कम थी,लेकिन स्वतंत्रता,न्याय और सामाजिक बदलाव से जुड़े उनके विचारों ने उन्हें भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनके जीवन का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में बीता और अंततः उन्होंने अपने साथियों के साथ देश की स्वतंत्रता के लिए प्राण न्योछावर कर दिए।

जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री की ओर से दी गई श्रद्धांजलि में भी भगत सिंह के साहस, बलिदान और युवाओं के लिए उनकी प्रेरणादायक भूमिका पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के सम्मान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की उनकी भावना आज भी युवाओं में साहस और दृढ़ता की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर देशभर में शहीद भगत सिंह के जीवन और उनके योगदान को याद किया जा रहा है।