फ्रांस में स्कूलों की बदहाली के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन हिंसक (तस्वीर क्रेडिट@anadoluagency)

फ्रांस में स्कूलों की बदहाली के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन हिंसक,400 से अधिक हिरासत में

पेरिस,30 सितंबर (युआईटीवी)- फ्रांस में स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी तथा कक्षाओं में बढ़ती भीड़ के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन मंगलवार को कई शहरों में हिंसक हो गया। पिछले सप्ताह राजधानी पेरिस से शुरू हुआ प्रदर्शन अब देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल चुका है। बड़ी संख्या में छात्रों ने हाई स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए और कई जगहों पर पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई। अधिकारियों के अनुसार,मंगलवार को देशभर में 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया,जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की है। प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मियों और छात्रों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को लगभग 400 स्कूलों में प्रदर्शन या किसी न किसी तरह का व्यवधान देखने को मिला। इनमें करीब 40 स्कूलों के प्रवेश द्वार पूरी तरह बंद कर दिए गए थे। छात्रों का कहना है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों की कमी और कक्षाओं में जरूरत से ज्यादा छात्रों की संख्या के कारण पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र कक्षाओं में छात्रों की संख्या घटाने,शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की खाली जगहों को भरने तथा स्कूलों में बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने की माँग कर रहे हैं।

छात्रों की नाराजगी केवल स्टाफ की कमी तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी लंबे और थकाऊ टाइमटेबल को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। इसके अलावा हाल के दिनों में गर्मी के दौरान कई स्कूलों की कक्षाओं में अत्यधिक तापमान को लेकर भी छात्रों में असंतोष बढ़ा है। उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है और स्कूलों में छात्रों के लिए बेहतर वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

आंदोलन के हिंसक रूप लेने की खबरें कई शहरों से सामने आई हैं। उत्तरी शहर लील में प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों में आग लगा दी और पुलिस पर बोतलें, पत्थर तथा दूसरी वस्तुएं फेंकीं। इसके जवाब में पुलिस ने आँसू गैस का इस्तेमाल किया। बोर्डो, रेन्न, नांते और मार्सेय समेत कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की सूचना मिली है। कई स्थानों पर पुलिस को स्कूलों के आसपास सुरक्षा बढ़ानी पड़ी।

फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, आंदोलन के शुरुआती चरण में ही सोमवार को 164 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और लगभग 180 स्कूल इससे प्रभावित हुए थे। मंगलवार को प्रदर्शन का दायरा और बढ़ गया। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस के साथ हुई झड़पों में दर्जनों सुरक्षाकर्मी और छात्र घायल हुए हैं। हालाँकि,प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य हिंसा नहीं,बल्कि स्कूलों की समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।

यह छात्र आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है,जब फ्रांस में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी भी सरकार की बजट योजनाओं के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार की प्रस्तावित बजट योजना में सार्वजनिक खर्च में कटौती की बात शामिल है। शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग भी इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल है। ऐसे में स्कूलों से जुड़े छात्रों की शिकायतें सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के व्यापक असंतोष के साथ जुड़ती दिखाई दे रही हैं।

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने स्कूलों के आसपास हुई आगजनी और हिंसा की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि इससे छात्रों, शिक्षकों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है। सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की घटनाओं को अलग तरीके से देखा जाना चाहिए और किसी भी शिकायत को सामने रखने का तरीका ऐसा होना चाहिए,जिससे दूसरे लोगों की सुरक्षा प्रभावित न हो।

दूसरी ओर,छात्र संगठनों और कुछ शिक्षकों का कहना है कि प्रदर्शन के पीछे वास्तविक समस्याएँ हैं और सरकार को छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए। छात्र संगठन के अध्यक्ष रियाद रानी ने कहा कि कई कक्षाओं में 32 से 35 तक छात्र पढ़ रहे हैं। उनके अनुसार,शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी भी लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि छात्रों की मांग बेहतर और अधिक समान शैक्षणिक परिस्थितियाँ उपलब्ध कराने की है।

छात्र संगठनों का तर्क है कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी नहीं होने से मौजूदा शिक्षकों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कक्षाओं में अधिक छात्रों की संख्या होने से व्यक्तिगत स्तर पर छात्रों पर ध्यान देना कठिन हो जाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल नए नियम या योजनाएँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि स्कूलों में पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

इस बीच, आंदोलन को लेकर फ्रांस की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू और वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों के बीच प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके को लेकर सार्वजनिक मतभेद सामने आए हैं। सरकार जहाँ हिंसा और आगजनी की घटनाओं को लेकर सख्त रुख अपना रही है,वहीं विपक्षी खेमे से छात्रों और कर्मचारियों की शिकायतों पर ज्यादा ध्यान देने की माँग की जा रही है।

प्रदर्शन के विस्तार ने सरकार के सामने एक साथ कई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। एक तरफ स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें हैं,वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र में बजट कटौती को लेकर कर्मचारियों का विरोध जारी है। शिक्षकों के आंदोलन में शामिल होने से स्कूलों पर इसका असर और व्यापक हो गया है। ऐसे में सरकार के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र की मांगों पर बातचीत का रास्ता निकालना भी महत्वपूर्ण हो गया है।

फ्रांस में स्कूलों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन फिलहाल केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। देश के कई शहरों में छात्रों के प्रदर्शन और स्कूलों में व्यवधान की घटनाएँ सामने आने के बाद इसका दायरा काफी बढ़ गया है। मंगलवार को 400 से अधिक लोगों की हिरासत और कई पुलिसकर्मियों तथा छात्रों के घायल होने की घटनाओं ने आंदोलन की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

आने वाले दिनों में इस आंदोलन का रुख काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार छात्रों,शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की मांगों को लेकर क्या कदम उठाती है। प्रदर्शनकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाओं, पर्याप्त शिक्षकों और कम भीड़ वाली कक्षाओं की माँग पर जोर दे रहे हैं,जबकि सरकार हिंसा और आगजनी की घटनाओं को रोकने पर ध्यान दे रही है। फिलहाल फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा यह विवाद सड़क से लेकर राजनीति तक चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।