सुंदर पिचाई

ट्रंप और टेक दिग्गजों का एआई समझौता,सुंदर पिचाई समेत कंपनियों ने सुरक्षा और स्वतंत्र ऑडिट का लिया संकल्प

वाशिंगटन,30 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने व्हाइट हाउस में उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर एक स्वैच्छिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत अत्याधुनिक एआई मॉडल विकसित करने वाली कंपनियाँ अपने सिस्टम में मजबूत आंतरिक नियंत्रण लागू करने, जोखिमों की नियमित समीक्षा कराने,स्वतंत्र बाहरी ऑडिट कराने और कंपनी के बोर्ड स्तर पर निगरानी की व्यवस्था करने पर सहमत हुई हैं। समझौते को ‘व्हाइट हाउस अकॉर्ड ऑन सुपरइंटेलिजेंस: जॉइंट कमिटमेंट ऑन फ्रंटियर एसआई रिस्पॉन्सिबिलिटी’ नाम दिया गया है।

यह समझौता 29 सितंबर को व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद सामने आया। इसमें गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, एंथ्रॉपिक के सीईओ डारियो अमोदेई, मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, ओपनएआई के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन, एक्सएआई के संस्थापक एलन मस्क और एनवीडिया के सीईओ जेनसेन हुआंग ने हिस्सा लिया और समझौते पर हस्ताक्षर किए। दस्तावेज का उद्देश्य फ्रंटियर यानी सबसे उन्नत एआई मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों के लिए सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़ी साझा अपेक्षाएँ तय करना है।

समझौते की खास बात यह है कि इसे किसी नए सरकारी नियामक कानून के रूप में पेश नहीं किया गया है। यह कंपनियों की स्वैच्छिक प्रतिबद्धता है। ट्रंप ने इसे ‘नैतिक रूप से बाध्यकारी’ बताया और कहा कि कंपनियाँ काफी हद तक अपनी निगरानी खुद करेंगी। व्हाइट हाउस की ओर से जारी विवरण में भी इसे उद्योग की स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं वाला दस्तावेज बताया गया है। इसका अर्थ है कि समझौते में बताए गए सुरक्षा उपायों को लागू करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से संबंधित कंपनियों पर होगी और यह अपने आप में ऐसा कानूनी मानक नहीं बनाता,जिसके उल्लंघन पर किसी कंपनी पर सीधे सरकारी दंड लगाया जा सके।

समझौते में एआई सुरक्षा के लिए कई स्तरों वाली व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। सबसे पहले कंपनियों को अपने अत्याधुनिक मॉडल की ट्रेनिंग और तैनाती के दौरान मजबूत आंतरिक नियंत्रण स्थापित करने होंगे। इन नियंत्रणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मॉडल तय उद्देश्य और सुरक्षा सीमाओं के भीतर काम करें। कंपनियों को संभावित साइबर सुरक्षा, जैव सुरक्षा और रासायनिक खतरों जैसे जोखिमों की पहचान और निगरानी पर भी ध्यान देना होगा। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि एआई मॉडल अनजाने में किसी तकनीकी सिस्टम तक अनधिकृत पहुँच बनाने या उसमें घुसपैठ करने जैसी गतिविधि न करें।

इसके बाद कंपनियों को ऐसी आंतरिक टीमों और प्रक्रियाओं की व्यवस्था करनी होगी जो इन सुरक्षा नियंत्रणों की निगरानी करें। इन टीमों का काम यह देखना होगा कि जोखिमों की पहचान करने,मॉडल के व्यवहार पर नजर रखने और किसी संभावित समस्या को पकड़ने वाली व्यवस्थाएँ सही ढंग से काम कर रही हैं या नहीं। यदि किसी तरह की कमी सामने आती है,तो उसे दूर करने की प्रक्रिया भी इसी ढाँचे का हिस्सा होगी।

समझौते में बाहरी निगरानी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। कंपनियों से स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर या मूल्यांकनकर्ता नियुक्त करने की अपेक्षा की गई है। ये बाहरी विशेषज्ञ कंपनी की आंतरिक सुरक्षा प्रक्रियाओं और नियंत्रणों का मूल्यांकन करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सुरक्षा को लेकर कंपनियों की अपनी आंतरिक समीक्षा के अलावा एक स्वतंत्र जाँच भी मौजूद रहे। समझौते के मुताबिक,आंतरिक नियंत्रण और बाहरी समीक्षा मिलकर यह भरोसा मजबूत करने के लिए काम करेंगे कि अत्याधुनिक तकनीक को जिम्मेदारी के साथ विकसित और तैनात किया जा रहा है।

एआई सुरक्षा की निगरानी को कंपनी के शीर्ष स्तर तक ले जाने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की भूमिका भी तय की गई है। समझौते में कंपनियों से अपने निदेशक मंडल के भीतर एक स्वतंत्र समिति बनाने की अपेक्षा की गई है। यह समिति आंतरिक टीमों और बाहरी ऑडिटरों से मिलने वाली रिपोर्ट की समीक्षा करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जाँच में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं या नहीं। इस तरह एआई सुरक्षा केवल इंजीनियरिंग या तकनीकी टीम की जिम्मेदारी न रहकर कंपनी के कॉर्पोरेट प्रशासन का हिस्सा बनती है।

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने समझौते को लेकर कहा कि एआई तकनीक के असाधारण फायदे हैं,लेकिन उद्योग को इसके संभावित जोखिमों पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियों से तकनीक के विकास में अधिक जिम्मेदारी लेने को कहा गया है। पिचाई के मुताबिक,उद्योग में कुछ ऐसी प्रक्रियाएँ अपनाई जा रही हैं,जो बड़ी कंपनियों में वित्तीय नियंत्रण की व्यवस्था जैसी हैं। उनका कहना था कि एआई के लाभों को आगे बढ़ाते हुए जोखिमों पर भी पर्याप्त ध्यान देना जरूरी है।

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनियाँ जनता को यह भरोसा दिलाना चाहती हैं कि उनके उत्पाद निर्धारित उद्देश्य के अनुसार काम करेंगे। उन्होंने समझौते को एक शुरुआत के रूप में बताया। उनके अनुसार,इसमें मजबूत आंतरिक नियंत्रण, समस्याओं का पता लगाने वाली व्यवस्थाएँ, आंतरिक जोखिम समीक्षा, बाहरी ऑडिट और निदेशक मंडल की स्वतंत्र जाँच जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं। जुकरबर्ग ने यह भी कहा कि यह ऐसी व्यवस्था नहीं है,जिसे उद्योग भविष्य में होने वाले हर काम के लिए अंतिम ढाँचे के रूप में देखता है,बल्कि यह एक साझा शुरुआती कदम है।

एनवीडिया के सीईओ जेनसेन हुआंग ने एआई सुरक्षा और तकनीकी प्रगति के बीच टकराव की धारणा को खारिज किया। उन्होंने कहा कि नवाचार, तकनीक और सुरक्षा के बीच कोई विरोधाभास नहीं है। उनके मुताबिक,यह तकनीक मानवता और अमेरिका की भविष्य की आर्थिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है और इसे जिम्मेदारी तथा सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

वहीं,एंथ्रॉपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने एआई से जुड़े जोखिमों को लेकर अधिक सावधानी की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई के संभावित लाभों में चिकित्सा क्षेत्र में प्रगति जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ शामिल हैं,लेकिन तकनीक से वास्तविक जोखिम भी जुड़े हुए हैं। उनके मुताबिक,इन जोखिमों से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका क्या होगा,इस पर अभी चर्चा जारी है।

ट्रंप ने समझौते को उन्नत एआई के संभावित दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा व्यवस्था के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि कंपनियों के पास अपनी प्रणालियों में गंभीर विफलताओं को रोकने के लिए व्यावसायिक कारण भी हैं,क्योंकि किसी बड़े सुरक्षा संकट की स्थिति में उनकी प्रतिष्ठा और कारोबार प्रभावित हो सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगी जो तकनीक का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए करते हैं।

व्हाइट हाउस में ट्रंप ने एआई उद्योग की निगरानी के लिए लगभग 10 लोगों की एक समिति बनाने की संभावना का भी उल्लेख किया। हालाँकि,इस प्रस्तावित समिति की अंतिम सदस्यता,अधिकार क्षेत्र और काम करने की औपचारिक व्यवस्था की घोषणा उस समय तक नहीं की गई थी। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रस्तावित समिति समझौते के तहत कंपनियों की आंतरिक निगरानी व्यवस्था से किस तरह अलग होगी।

इस समझौते का समय भी महत्वपूर्ण है। दुनिया भर की सरकारें इस बात पर चर्चा कर रही हैं कि तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीक के जोखिमों से निपटने के लिए कंपनियों की स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएं पर्याप्त हैं या नहीं। रोजगार,साइबर सुरक्षा, सूचना तक पहुँच, चुनाव और समाज पर तकनीक के प्रभाव जैसे मुद्दों को लेकर अलग-अलग देशों में नियामकीय दृष्टिकोण विकसित हो रहे हैं। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने एआई विकास को तेज करने और सरकारी इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ-साथ उद्योग की स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं पर भी जोर दिया है।

अमेरिकी प्रशासन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उन्नत एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए नीतिगत कदम उठा चुका है। जून 2026 में जारी एक राष्ट्रीय सुरक्षा निर्देश में सरकार ने उन्नत एआई प्रणालियों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कामों में तेजी से अपनाने, निजी कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने और भविष्य की अत्याधुनिक प्रणालियों के लिए सुरक्षित कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने पर जोर दिया था। उस नीति में मॉडल को मजबूत,नियंत्रित और जवाबदेह बनाए रखने की जरूरत भी बताई गई थी।

इसी व्यापक नीति के बीच ट्रंप प्रशासन ने सरकारी स्तर पर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की जगह ‘सुपर इंटेलिजेंस’ और ‘एसआई’ शब्द के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का फैसला किया है। 29 सितंबर को जारी कार्यकारी आदेश में संघीय कार्यपालिका के आधिकारिक संचार और गैर-कानूनी दस्तावेजों में नए शब्दों के इस्तेमाल का निर्देश दिया गया। प्रशासन ने इसे तेजी से विकसित हो रही तकनीकी क्षमता को दर्शाने वाला नाम बताया है।

इसी दिन अमेरिका डॉट जीओवी नाम का नया सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया। व्हाइट हाउस के अनुसार,इसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों को संघीय सरकार की विभिन्न सेवाओं और सूचनाओं तक सरल तरीके से पहुँच उपलब्ध कराना है। आदेश में यह भी कहा गया है कि इस प्लेटफॉर्म से जुड़े सुपर इंटेलिजेंस सिस्टम को सटीक, भरोसेमंद और पारदर्शी होना चाहिए। साथ ही व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और डेटा को कम से कम रखने जैसे उपायों पर भी जोर दिया गया है।

एआई नियमन के मामले में अमेरिका और यूरोप का दृष्टिकोण भी अलग दिखाई देता है। यूरोपीय संघ ने जोखिम आधारित बाध्यकारी एआई नियमों का ढांचा विकसित किया है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने नवाचार को तेज करने के साथ उद्योग की स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं, कार्यकारी आदेशों और सरकारी दिशा-निर्देशों पर ज्यादा जोर दिया है। नए व्हाइट हाउस समझौते में भी इसी स्वैच्छिक मॉडल की झलक दिखाई देती है।

हालाँकि,समझौते में आंतरिक नियंत्रण, स्वतंत्र ऑडिट और बोर्ड स्तर की समीक्षा जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं,लेकिन इनके क्रियान्वयन की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां इन्हें किस स्तर तक लागू करती हैं, बाहरी मूल्यांकनकर्ताओं की स्वतंत्रता किस तरह सुनिश्चित होती है और ऑडिट में सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी नियामकीय व्यवस्था नहीं है। दस्तावेज में भविष्य में ऐसे सुरक्षा उपायों को कानून या नियमों का हिस्सा बनाए जाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।

इस तरह व्हाइट हाउस का नया समझौता अत्याधुनिक एआई के विकास को रोकने के बजाय उसके साथ सुरक्षा और जवाबदेही की अतिरिक्त परतें जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आया है। टेक कंपनियों ने आंतरिक नियंत्रण से लेकर स्वतंत्र ऑडिट और बोर्ड निगरानी तक कई स्तरों पर जिम्मेदारी लेने की प्रतिबद्धता जताई है। अब इस व्यवस्था का अगला चरण इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन,स्वतंत्र जाँच और सामने आने वाले जोखिमों पर कंपनियों की प्रतिक्रिया से तय होगा।