महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने राजघाट पर अर्पित की श्रद्धांजलि (तस्वीर क्रेडिट@Kpgour72)

महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने राजघाट पर अर्पित की श्रद्धांजलि,बोले- बापू के विचार हमेशा देते रहेंगे प्रेरणा

नई दिल्ली,2 अक्टूबर (युआईटीवी)- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पहुँचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके सत्य,अहिंसा और मानवता के संदेश को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी समाज और देश को बेहतर दिशा देने की प्रेरणा देते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर महात्मा गांधी को याद करते हुए लिखा कि बापू का कालजयी संदेश एक बेहतर समाज और विकसित भारत की दिशा में देशवासियों को लगातार प्रेरित करता रहे। उन्होंने गांधी जी के जीवन और उनके विचारों को मानवता के लिए सदैव प्रासंगिक बताया।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के साथ महात्मा गांधी के विचारों और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को दर्शाने वाला एक वीडियो भी साझा किया। इसमें उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर का महत्व देश का हर बच्चा जानता है। महात्मा गांधी के विचारों ने केवल भारत ही नहीं,बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित और प्रेरित किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ऐसे व्यक्तित्व थे,जो सत्ता से दूर रहते हुए भी आज करोड़ों लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि गांधी जी का प्रभाव किसी पद या सत्ता की ताकत पर आधारित नहीं था,बल्कि उनके विचारों और जीवन मूल्यों की ताकत ने उन्हें लोगों के बीच विशेष स्थान दिया।

उन्होंने कहा कि जब तक मानवता के साथ गांधी जी के विचारों का प्रवाह बना रहेगा,तब तक उनकी प्रेरणा और प्रासंगिकता भी समाज में बनी रहेगी। प्रधानमंत्री ने गांधी जी के विचारों को वर्तमान समय में भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके संदेश मानवता को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं।

महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री ने स्वदेशी और खादी को बढ़ावा देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने हमेशा स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर जोर दिया और खादी उनके विचारों में विशेष स्थान रखती थी।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया कि 2 अक्टूबर के दिन कम से कम एक खादी उत्पाद जरूर खरीदें। उन्होंने कहा कि लोगों को गर्व के साथ यह कहना चाहिए कि यह स्वदेशी है। प्रधानमंत्री की इस अपील का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों और भारतीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने के साथ स्वदेशी वस्तुओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।

गांधी जी के लिए खादी केवल कपड़ा नहीं,बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशी भावना का प्रतीक थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने देशवासियों से विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल का आह्वान किया था। चरखा और खादी उनके सामाजिक और आर्थिक विचारों से भी जुड़े रहे।

प्रधानमंत्री ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से भी महात्मा गांधी के जीवन मूल्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि पूज्य बापू का संपूर्ण जीवन सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा का ऐसा प्रकाशस्तंभ है,जो हर युग में मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा।

इस संदेश के साथ प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया। इसमें सभी प्राणियों के प्रति द्वेष से दूर रहने, मैत्री और करुणा का भाव रखने, अहंकार और ममता से मुक्त रहने तथा सुख-दुख में समान भाव रखने की बात कही गई है।

इस श्लोक का भावार्थ है कि जो व्यक्ति किसी भी प्राणी से द्वेष नहीं करता और सभी के प्रति मित्रता तथा करुणा का भाव रखता है,जो ममता और अहंकार से मुक्त रहता है, सुख और दुख में समान रहता है तथा क्षमाशील होता है,वही श्रेष्ठ साधक माना जाता है।

महात्मा गांधी के जीवन में सत्य और अहिंसा का विशेष महत्व रहा। उन्होंने इन्हीं सिद्धांतों को सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष का माध्यम बनाया। उनका मानना था कि किसी भी संघर्ष का समाधान हिंसा के बजाय सत्य और अहिंसा के रास्ते से हासिल किया जा सकता है। उनके विचारों का प्रभाव भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य आंदोलनों पर भी पड़ा।

राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री के संदेश में गांधी जी के विचारों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुँचाने और उनके मूल्यों को जीवन में अपनाने पर जोर दिया गया। 2 अक्टूबर का दिन देश में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है और इस अवसर पर उनके जीवन,संघर्ष तथा मानवता के प्रति उनके संदेश को याद किया जाता है। प्रधानमंत्री ने भी अपने संदेश के माध्यम से सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और स्वदेशी के गांधीवादी विचारों को देशवासियों के सामने रखा।