बिमल पटेल ने आईटीएलओएस के जज के रूप में ली शपथ (तस्वीर क्रेडिट@IndiainHamburg)

बिमल पटेल ने आईटीएलओएस के जज के रूप में ली शपथ,नौ साल रहेगा कार्यकाल

संयुक्त राष्ट्र,2 अक्टूबर (युआईटीवी)- अंतर्राष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ बिमल पटेल ने गुरुवार को जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित समुद्र के कानून से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उनका कार्यकाल नौ वर्ष का होगा। इस नियुक्ति के साथ अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून से जुड़े इस महत्वपूर्ण न्यायिक संस्थान में भारत का प्रतिनिधित्व लगातार बना रहेगा।

बिमल पटेल ने इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी यानी आईटीएलओएस के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इससे एक दिन पहले भारतीय न्यायाधीश नीरू चड्ढा का कार्यकाल समाप्त हुआ था। नीरू चड्ढा आईटीएलओएस की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल के पूरा होने के बाद अब बिमल पटेल के न्यायाधीश बनने से इस संस्थान में भारत की मौजूदगी जारी रहेगी।

बिमल पटेल अंतर्राष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल लॉ कमीशन के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा वह गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड में भी सदस्य के तौर पर जिम्मेदारी निभाई है।

बिमल पटेल को पिछले साल संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि से जुड़े देशों ने आईटीएलओएस के न्यायाधीश के रूप में चुना था। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुए चुनाव में उन्हें 168 वैध मतों में से 115 वोट मिले थे। इस चुनाव में उन्हें पर्याप्त समर्थन हासिल हुआ और इसके बाद उन्हें समुद्र के कानून से जुड़े इस प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक संस्थान में न्यायाधीश के रूप में चुना गया।

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि को समुद्र और महासागरों से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय नियमों की महत्वपूर्ण आधारशिला माना जाता है। इस संधि से 172 देश जुड़े हुए हैं। इसी संधि के प्रावधानों के तहत आईटीएलओएस की स्थापना की गई थी। न्यायाधिकरण समुद्री क्षेत्र से जुड़े विवादों के निपटारे के साथ-साथ समुद्र के कानून की व्याख्या करने का काम करता है।

आईटीएलओएस में कुल 21 न्यायाधीश होते हैं। न्यायाधीशों का चयन अलग-अलग क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से किया जाता है। सभी न्यायाधीशों का कार्यकाल एक साथ समाप्त नहीं होता। इस व्यवस्था के कारण न्यायाधिकरण में एक साथ बड़े पैमाने पर बदलाव नहीं होता और संस्थान के कामकाज में निरंतरता बनी रहती है।

बिमल पटेल के साथ चार अन्य न्यायाधीशों ने भी अपने पद की शपथ ली। इनमें घाना की सिल्विया अमा अदुसु, ब्राजील के जॉर्ज रोड्रिगो बांदेइरा गैलिंडो, ट्यूनीशिया के स्लिम लघमानी और वियतनाम की लैन-अन्ह थी गुयेन शामिल हैं। इन नियुक्तियों के साथ न्यायाधिकरण में विभिन्न क्षेत्रों और देशों का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित हुआ है।

बिमल पटेल की नियुक्ति उनके अंतर्राष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में लंबे अनुभव को देखते हुए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून में उच्च शिक्षा हासिल की है और इस क्षेत्र में अकादमिक तथा प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

उन्होंने नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय कानून में पीएचडी की है। अंतर्राष्ट्रीय कानून के अलावा उनके कार्यक्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े विषय भी शामिल रहे हैं। विभिन्न संस्थानों में उनकी भूमिकाओं ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानून और सुरक्षा से जुड़े मामलों का व्यापक अनुभव दिया है।

जर्मनी के हैम्बर्ग में स्थित इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक संस्था है। इसका मुख्य काम समुद्र और महासागरों से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय विवादों का समाधान करना और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के प्रावधानों की व्याख्या करना है।

समुद्र से जुड़े विवादों में समुद्री सीमाओं का निर्धारण, समुद्री संसाधनों से जुड़े अधिकार, समुद्री पर्यावरण और समुद्र में विभिन्न गतिविधियों से संबंधित कानूनी प्रश्न शामिल हो सकते हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच समुद्री क्षेत्रों को लेकर विवाद होने पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रावधान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आईटीएलओएस ऐसे मामलों में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के आधार पर कानूनी निर्णय देने वाला प्रमुख संस्थान है। समुद्र और महासागरों का आर्थिक, सामरिक और पर्यावरणीय महत्व बढ़ने के साथ समुद्री कानून से जुड़े मामलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

बिमल पटेल का नौ वर्ष का कार्यकाल ऐसे समय में शुरू हुआ है जब समुद्री क्षेत्र से जुड़े कानूनी और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर दुनिया का ध्यान लगातार बढ़ रहा है। समुद्री संसाधनों, समुद्री सीमाओं और अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र से जुड़े मामलों में अंतर्राष्ट्रीय कानून की स्पष्ट व्याख्या की आवश्यकता रहती है।

भारत लंबे समय से समुद्री कानून और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। आईटीएलओएस में भारतीय न्यायाधीश की मौजूदगी इसी निरंतरता को दर्शाती है। नीरू चड्ढा के कार्यकाल के बाद बिमल पटेल का पद संभालना भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के क्षेत्र में प्रतिनिधित्व बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

बिमल पटेल की नई जिम्मेदारी में उन्हें समुद्र के कानून से जुड़े मामलों पर अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढाँचे के अनुरूप विचार करना होगा। उनका अकादमिक अनुभव,अंतर्राष्ट्रीय कानून की विशेषज्ञता और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में निभाई गई जिम्मेदारियाँ उनके नए कार्यकाल का महत्वपूर्ण आधार रहेंगी।