मुंबई,3 अक्टूबर (युआईटीवी)- मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में शुक्रवार को सीजेपी की ओर से आयोजित विरोध-प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई,जब भगवा रंग के मफलर पहने कुछ लोग प्रदर्शन स्थल के पास पहुँचकर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने लगे। अचानक हुई नारेबाजी के बाद कुछ देर के लिए प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हालाँकि,मौके पर तैनात मुंबई पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को सँभाल लिया और संभावित टकराव को बढ़ने से रोक दिया। घटना के दौरान किसी बड़ी हिंसक झड़प की सूचना नहीं है।
शिवाजी पार्क में आयोजित यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। सीजेपी ने इस विरोध-प्रदर्शन के जरिए चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी मांगें सामने रखीं। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। कई प्रमुख सार्वजनिक हस्तियां भी प्रदर्शन स्थल पर पहुँचीं। शुक्रवार को मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों लोगों के जुटने की खबर सामने आई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया की विस्तृत जांच और चुनाव आयोग अधिनियम, 2023 को वापस लेने की माँग शामिल थी। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल भी उठाए। सीजेपी की ओर से इन मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।
इसी दौरान भगवा मफलर पहने कुछ लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और धार्मिक नारे लगाने लगे। इससे प्रदर्शन में मौजूद लोगों के बीच तनाव पैदा हो गया। दोनों समूहों के बीच कुछ समय के लिए आमने-सामने की स्थिति बन गई। अचानक बढ़े तनाव को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने तत्काल दोनों पक्षों के बीच दूरी बनाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने नारे लगाने वाले समूह को घेरकर प्रदर्शन स्थल से अलग किया। इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग-अलग रखा और वहाँ मौजूद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति सामान्य हो गई और प्रदर्शन दोबारा व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ा।
रिपोर्टों के अनुसार,प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान शिवाजी पार्क तथा दादर इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में लोगों के पहुँचने को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने भीड़ की आवाजाही को नियंत्रित करने और अलग-अलग समूहों के बीच दूरी बनाए रखने पर ध्यान दिया।
शिवाजी पार्क में प्रदर्शन को लेकर पहले से ही पुलिस और स्थानीय स्तर पर कई तरह की आपत्तियाँ सामने आई थीं। मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति देने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी और वैकल्पिक स्थल का सुझाव दिया था। इसके बावजूद शुक्रवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क में जुटे।
प्रदर्शन में युवाओं के अलावा फिल्म और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कुछ चर्चित चेहरे भी नजर आए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तिरंगा और विभिन्न संदेशों वाली तख्तियाँ लेकर अपनी मांगें उठाईं। कार्यक्रम के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों को लेकर नारे भी लगाए गए।
शिवाजी पार्क में नारेबाजी करने वाले लोगों के बारे में फिलहाल किसी राजनीतिक दल या संगठन से उनके सीधे तौर पर जुड़े होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस समूह की पहचान और उसके उद्देश्य को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर व्यवस्था बनाए रखी और दोनों समूहों को अलग-अलग रखा। इस वजह से तनाव बढ़ने की स्थिति पर समय रहते नियंत्रण पा लिया गया। प्रदर्शन समाप्त होने तक सुरक्षा व्यवस्था जारी रही। बाद में दादर इलाके में प्रदर्शन से लौट रहे कुछ लोगों के बीच अलग से धक्का-मुक्की की घटना की भी रिपोर्ट सामने आई, जिसमें पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया।
शिवाजी पार्क की घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान अलग-अलग विचार रखने वाले समूहों के आमने-सामने आने पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण हो जाती है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद मुख्य प्रदर्शन स्थल पर स्थिति नियंत्रण में रही और किसी बड़े टकराव को टाल दिया गया।
