डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ट्रंप ने अमेरिका से डीजल निर्यात पर रोक की संभावना खारिज की,बोले- यूरोप की अतिरिक्त सप्लाई से घटेंगी कीमतें

वॉशिंगटन,3 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका से डीजल के निर्यात पर रोक लगाने की संभावना को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों ने बाजार में अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है, जिससे वैश्विक ईंधन आपूर्ति को बढ़ाने और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है,जब मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल तथा परिष्कृत ईंधन की आपूर्ति में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों और उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने खुद यूरोपीय देशों से बाजार में अधिक डीजल उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। उनके मुताबिक,यूरोप के पास डीजल का पर्याप्त भंडार है और वह वैश्विक बाजार के लिए बड़ी मात्रा में ईंधन उपलब्ध करा सकता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भी अपनी भूमिका निभाएगा और डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा।

ट्रंप ने कहा कि यूरोप के पास काफी डीजल है और यूरोपीय देश दुनिया के लिए महत्वपूर्ण योगदान करने की स्थिति में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और यूरोप के बीच मजबूत संबंध हैं और बाजार में अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने को लेकर उनकी अपील का यूरोपीय देशों ने सकारात्मक जवाब दिया है।

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या यूरोप की ओर से अतिरिक्त डीजल बाजार में लाने के फैसले के बाद अमेरिका से डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का विकल्प पूरी तरह खत्म हो गया है,तो ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने ऐसा प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका ने कभी डीजल निर्यात रोकने का फैसला किया था। ट्रंप ने यूरोप की ओर से बाजार में अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराने के कदम की भी सराहना की।

दरअसल,पिछले कुछ समय से अमेरिका में डीजल की कीमतों और उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ा हुआ है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बाधित होने का असर परिष्कृत ईंधन पर भी पड़ा है। डीजल परिवहन, कृषि, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण ईंधन है। इसलिए इसकी कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर केवल उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहता,बल्कि माल ढुलाई से लेकर उत्पादन लागत तक पर पड़ सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, मौजूदा ऊर्जा संकट में कच्चे तेल की तुलना में परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर दबाव अधिक गंभीर बना हुआ है। एजेंसी ने सितंबर की अपनी रिपोर्ट में बताया था कि मध्य पूर्व से कच्चे तेल के निर्यात में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही अभी भी बुरी तरह प्रभावित है। खाड़ी क्षेत्र और रूस से डीजल तथा गैस ऑयल के निर्यात में भी भारी कमी दर्ज की गई है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक,अगस्त में खाड़ी देशों से डीजल और गैस ऑयल का शुद्ध निर्यात औसतन करीब 3.9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा,जो युद्ध से पहले के स्तर के एक चौथाई से थोड़ा अधिक था। एजेंसी ने कहा कि रूस की रिफाइनरियों से जुड़ी बाधाओं ने भी वैश्विक डीजल बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला। इन घटनाक्रमों के कारण दुनिया के कई हिस्सों में रिफाइंड ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

ट्रंप ने बाजार में आपूर्ति बढ़ने की संभावना को ईरान से जुड़े संघर्ष और मध्य पूर्व की स्थिति से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि जैसे ही ईरान से संबंधित मौजूदा स्थिति खत्म होगी,तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में अमेरिका के पास पर्याप्त तेल उपलब्ध होगा और कीमतें पहले के स्तर पर लौट सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि कीमतें उनके कार्यकाल की शुरुआत में मौजूद स्तर से भी नीचे चली जाएं।

हालाँकि,तेल की कीमतों का भविष्य केवल किसी एक क्षेत्र की स्थिति पर निर्भर नहीं करता। वैश्विक उत्पादन, समुद्री परिवहन, रिफाइनिंग क्षमता, भंडार, भू-राजनीतिक तनाव और विभिन्न देशों की ऊर्जा नीतियाँ भी कीमतों को प्रभावित करती हैं। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने हालिया आकलन में कहा है कि मध्य पूर्व में संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और भंडार पर भारी दबाव पड़ा है। एजेंसी के अनुसार,फरवरी से अगस्त के बीच वैश्विक स्तर पर देखे गए तेल भंडार में लगभग 50.7 करोड़ बैरल की कमी आई।

इसी बीच,दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह जी-7 ने ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को हुए जी-7 नेताओं के फैसले के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के समन्वय से चार महीनों के दौरान आपातकालीन भंडार से कुल 10 करोड़ बैरल तक तेल और ईंधन बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना में डीजल की आपूर्ति को शुरुआती चरण में प्राथमिकता दी जाएगी।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बताया कि शुरुआती 20 दिनों में डीजल की पर्याप्त मात्रा बाजार में लाने की योजना है। एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने जी-7 नेताओं की बैठक में कहा कि होर्मुज संकट का असर ऊर्जा बाजारों पर अब भी गंभीर है,खासकर डीजल बाजार में। उन्होंने यह भी बताया कि 11 मार्च को घोषित 40 करोड़ बैरल की पिछली सामूहिक कार्रवाई के तहत करीब 32.5 करोड़ बैरल पहले ही बाजार में जारी किए जा चुके हैं।

जी-7 के इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में तत्काल आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों में अस्थिरता को कम करना है। समूह ने ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता भी जताई है और अन्य देशों से भी इसी तरह का रुख अपनाने का आग्रह किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है,जब कई देशों में ईंधन की कीमतों को लेकर दबाव बढ़ रहा है।

यूरोप की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण हो गई है। ट्रंप के अनुसार,यूरोपीय देशों के पास पर्याप्त डीजल भंडार है और वे अतिरिक्त ईंधन बाजार में उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। यूरोप के कई देशों में परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए डीजल की माँग अधिक है,लेकिन मौजूदा संकट के बीच वहां उपलब्ध भंडार को वैश्विक बाजार को राहत देने के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है।

अमेरिका की ओर से डीजल निर्यात पर रोक नहीं लगाने का फैसला वैश्विक बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि किसी बड़े निर्यातक देश की ओर से प्रतिबंध लगाने पर अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता था। इसके विपरीत,अमेरिका और यूरोप की ओर से बाजार में अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराने की कोशिश आपूर्ति संबंधी दबाव को कम करने में योगदान दे सकती है।

फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आपूर्ति बाधाओं के बीच पर्याप्त डीजल और अन्य परिष्कृत ईंधन की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जाए। जी-7 देशों की आपातकालीन भंडार जारी करने की योजना और अमेरिका की ओर से डीजल निर्यात प्रतिबंध से पीछे हटने का फैसला इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। आने वाले हफ्तों में बाजार पर इन अतिरिक्त आपूर्तियों का कितना असर पड़ता है,यह तेल की कीमतों,समुद्री परिवहन और मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भी चेतावनी दी है कि जब तक परिष्कृत उत्पादों की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, डीजल बाजार पर दबाव बना रह सकता है।