ओकाजाकी,3 अक्टूबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 में भारतीय तीरंदाजी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 17 साल की भारतीय तीरंदाज कुमकुम मोहोद ने शनिवार को महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में दक्षिण कोरिया की येजिन ओह को रोमांचक शूट-ऑफ में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ कुमकुम एशियन गेम्स के इतिहास में व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में कोई भी पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। उन्होंने इसके साथ ही व्यक्तिगत रिकर्व का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव भी हासिल किया।
स्वर्ण पदक के लिए खेला गया फाइनल बेहद रोमांचक रहा। पाँच सेट के बाद दोनों तीरंदाजों का स्कोर 5-5 से बराबर था,जिसके बाद मुकाबले का फैसला शूट-ऑफ से हुआ। इस एक तीर वाले निर्णायक चरण में दोनों खिलाड़ियों पर जबरदस्त दबाव था। दक्षिण कोरिया की येजिन ओह ने 8 अंक का निशाना लगाया,लेकिन कुमकुम ने अपने धैर्य और आत्मविश्वास का शानदार परिचय देते हुए 10 अंक का निशाना साध दिया। उनका सटीक तीर सीधे निशाने के केंद्र के करीब लगा और इसी के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
कुमकुम की इस जीत ने न सिर्फ उन्हें एशियन गेम्स चैंपियन बनाया,बल्कि भारत को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक खेलों के लिए व्यक्तिगत कोटा भी दिलाया। फाइनल में पहुँचने वाली कुमकुम और येजिन ओह दोनों ने अपने-अपने देशों के लिए एक-एक व्यक्तिगत ओलंपिक कोटा हासिल किया। इस तरह कुमकुम की उपलब्धि का महत्व एशियन गेम्स के पदक से कहीं आगे बढ़ गया है।
फाइनल में कुमकुम की शुरुआत हालाँकि,उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। येजिन ओह ने पहले सेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 29-27 से जीत दर्ज की और 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। सेट 29-29 की बराबरी पर समाप्त हुआ,जिसके बाद दक्षिण कोरियाई तीरंदाज ने 3-1 की बढ़त बरकरार रखी। शुरुआती दो सेट के बाद कुमकुम के सामने वापसी की चुनौती थी,लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने दबाव में बिखरने के बजाय अपने प्रदर्शन को और बेहतर किया।
तीसरे सेट में कुमकुम ने मुकाबले का रुख ही बदल दिया। उन्होंने लगातार तीन तीरों से 10-10-10 का स्कोर हासिल करते हुए परफेक्ट 30 बनाया। येजिन ओह इस सेट में 29 अंक ही हासिल कर सकीं। इस शानदार प्रदर्शन के साथ कुमकुम ने सेट अपने नाम किया और स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया। उनकी सटीकता ने फाइनल में रोमांच को और बढ़ा दिया।
चौथे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए संघर्ष देखने को मिला। येजिन ओह ने 28-27 से यह सेट जीत लिया और 5-3 की बढ़त हासिल कर ली। वह अब स्वर्ण पदक जीतने से सिर्फ एक सेट दूर थीं। ऐसे समय में कुमकुम के लिए पाँचवां सेट बेहद महत्वपूर्ण हो गया था। उन्हें मुकाबला शूट-ऑफ तक ले जाने के लिए हर तीर पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था।
निर्णायक पाँचवें सेट में भारतीय तीरंदाज ने असाधारण संयम दिखाया। कुमकुम ने 10 अंक के साथ शुरुआत की और इसके बाद लगातार दो और 10 अंक हासिल किए। इस तरह उन्होंने एक और परफेक्ट 30 स्कोर किया। येजिन ओह 28 अंक ही बना सकीं। कुमकुम ने सेट जीतकर स्कोर 5-5 से बराबर कर दिया और मुकाबला शूट-ऑफ में पहुँच गया। इसके बाद एक ही तीर से पूरे मुकाबले का फैसला होना था।
शूट-ऑफ में कुमकुम ने जिस तरह दबाव का सामना किया,वह उनके प्रदर्शन की सबसे खास बात रही। येजिन ओह के 8 अंक के बाद भारतीय तीरंदाज के सामने स्वर्ण जीतने का स्पष्ट मौका था। कुमकुम ने कोई गलती नहीं की और 10 अंक का निशाना साधते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली। निर्णायक तीर के साथ ही भारतीय खेमे में जश्न शुरू हो गया और कुमकुम ने एशियन गेम्स में अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया।
कुमकुम का यह स्वर्ण पदक उनके पूरे टूर्नामेंट में किए गए शानदार प्रदर्शन का नतीजा है। उन्होंने रैंकिंग राउंड में 10वें स्थान पर रहते हुए क्वालीफाई किया था। इसके बाद नॉकआउट दौर में उनका सामना बेहद मजबूत खिलाड़ियों से हुआ। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया की मौजूदा विश्व चैंपियन और ओलंपिक टीम स्पर्धा की स्वर्ण पदक विजेता कांग चाएयंग को हराकर बड़ा उलटफेर किया। इस जीत ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
क्वार्टर फाइनल की बड़ी जीत के बाद कुमकुम ने सेमीफाइनल में चीन की 2025 विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता जिंगी झू को 6-2 से हराया। इस जीत के साथ वह एशियन गेम्स की व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा के फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज बनीं। फाइनल में येजिन ओह के खिलाफ उनकी जीत ने इस ऐतिहासिक अभियान को स्वर्ण पदक के साथ पूरा कर दिया।
महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में चीन की युवेई हुआंग ने हमवतन जिंगी झू को 6-4 से हराकर कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह पदक तालिका में कुमकुम का नाम सबसे ऊपर रहा।
17 साल की कुमकुम मोहोद की यह उपलब्धि भारतीय तीरंदाजी के लिए एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता है। उन्होंने न केवल एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया,बल्कि बेहद दबाव भरे फाइनल में वापसी करते हुए अपनी मानसिक मजबूती और सटीक निशानेबाजी का भी परिचय दिया। लॉस एंजिल्स 2028 के लिए हासिल किया गया व्यक्तिगत कोटा इस सफलता को और महत्वपूर्ण बनाता है। एशियन गेम्स में कुमकुम का यह प्रदर्शन भारतीय तीरंदाजी के लिए आने वाले वर्षों की उम्मीदों को भी मजबूत करता है।
