पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष परगट सिंह (तस्वीर क्रेडिट@AnilPra62477531)

पंजाब कांग्रेस की कमान सँभालते ही परगट सिंह ने टेका मत्था,बोले- पंजाब के लिए मिलकर करेंगे काम

चंडीगढ़,3 अक्टूबर (युआईटीवी)- पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सँभालने के बाद परगट सिंह ने शनिवार को दिल्ली स्थित गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में मत्था टेका और गुरु साहिब का आशीर्वाद लिया। उन्होंने यहाँ पंजाब और सभी लोगों की भलाई के लिए अरदास की। पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनकी नियुक्ति अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद हुई है। पार्टी में संगठनात्मक बदलाव के बीच मिली इस नई जिम्मेदारी के बाद परगट सिंह ने अपने शुरुआती संदेश में एकजुटता, संगठन को मजबूत करने और पंजाब को केंद्र में रखने की बात कही।

गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में मत्था टेकने के बाद परगट सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी भावनाएँ साझा कीं। उन्होंने लिखा कि पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने गुरु साहिब का शुक्रिया अदा किया और सबकी भलाई के लिए अरदास की। उन्होंने गुरु साहिब से प्रार्थना की कि वह इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी, विनम्रता और पंजाब की सेवा की भावना के साथ निभा सकें। उनके इस संदेश में धार्मिक आस्था के साथ-साथ नई जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखाई दी।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मीडिया से बातचीत में परगट सिंह ने पंजाब की राजनीतिक संस्कृति और राज्य की पहचान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं के नाम पर बसता है और पंजाबियों ने हमेशा नफरत की राजनीति को हराया है। उन्होंने कहा कि देशभर में जिस तरह की नफरत की राजनीति की जा रही है,उसे पंजाबी स्वीकार नहीं करेंगे। उनके बयान को प्रदेश कांग्रेस की आगे की राजनीतिक दिशा से जोड़कर भी देखा जा रहा है,जहाँ वह पंजाब से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की बात कर रहे हैं।

परगट सिंह ने पंजाब की ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य ने हमेशा आक्रमणकारियों और लुटेरों के खिलाफ खड़े होकर मुकाबला किया है। उन्होंने मौजूदा पंजाब सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि राज्य में मनमानी और लूटपाट हो रही है तथा घरों और संपत्तियों पर अवैध कब्जे तक करवाए जा रहे हैं। उन्होंने पंजाब के खजाने के कथित दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया और कहा कि पंजाबियों को अपने राज्य के लिए खड़ा होना चाहिए। ये आरोप परगट सिंह के राजनीतिक बयान हैं और इनके संबंध में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

नई जिम्मेदारी मिलने के साथ ही परगट सिंह के सामने पंजाब कांग्रेस संगठन को सँभालने और पार्टी नेताओं के बीच समन्वय बनाए रखने की चुनौती भी है। उनसे जब प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर सवाल किया गया,तो उन्होंने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में बिल्कुल भी गुटबाजी नहीं है और जब भी पंजाब की राजनीति या पंजाब की टीम की चर्चा होगी,वह सभी नेताओं के साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने खुद को टीम प्लेयर बताते हुए कहा कि सभी वरिष्ठ नेताओं का उनके दिल में सम्मान है और पार्टी हर फैसला सर्वसम्मति से लेने की कोशिश करेगी।

परगट सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है,जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने परगट सिंह को नई जिम्मेदारी सौंपी। आधिकारिक नियुक्ति के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं। राजा वड़िंग ने भी परगट सिंह को बधाई दी है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए संगठन में सामूहिक नेतृत्व और तालमेल को बनाए रखना अहम माना जा रहा है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर पूछे गए सवाल पर परगट सिंह ने भी सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राजा वड़िंग ने करीब चार से पाँच साल तक प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर सेवा की और कड़ी मेहनत के साथ काम किया। उन्होंने संगठन में जिम्मेदारियों को बदलाव की सामान्य प्रक्रिया बताया। परगट सिंह ने कहा कि कल वह सचिव या महासचिव के रूप में काम कर रहे थे और आज प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सँभाल रहे हैं। उनके मुताबिक पार्टी एक सामूहिक इकाई के रूप में काम करती है।

परगट सिंह ने राजा वड़िंग को अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि उनके बीच मतभेद या विभाजन का कोई सवाल नहीं है। उन्होंने कहा कि वह सभी वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करते हैं और वरिष्ठ नेता भी उनका सम्मान करते हैं। उनके अनुसार पार्टी की प्राथमिकता केवल पंजाब है। इस बयान के जरिए उन्होंने संगठन के भीतर पुराने मतभेदों की चर्चाओं के बीच सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का संदेश देने की कोशिश की।

मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर भी परगट सिंह ने किसी तरह की स्पष्टता देने के बजाय सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की बात कही। उन्होंने कहा कि सभी को निमंत्रण दिया जाएगा, उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा और उन्हें आगे बैठाया जाएगा। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि फिलहाल उनका जोर किसी एक चेहरे के बजाय संगठन के सभी प्रमुख नेताओं को साथ लेकर चलने पर है।

आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर भी परगट सिंह ने अपनी रणनीति के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अच्छी है और वे एक टीम के रूप में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय है। हालाँकि,उन्होंने दूसरी राजनीतिक टीमों को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए दावा किया कि वे ज्यादा देर तक टिक नहीं पाएँगी। उनके इस बयान से साफ है कि आने वाले समय में पंजाब की राजनीतिक गतिविधियों में कांग्रेस का हमला मौजूदा सरकार और अन्य राजनीतिक दलों पर तेज हो सकता है।

परगट सिंह की नियुक्ति ऐसे समय हुई है,जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने,वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल कायम रखने और स्थानीय मुद्दों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाने जैसी कई जिम्मेदारियाँ होंगी। पार्टी की ओर से भी संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर गतिविधियाँ बढ़ाने पर जोर दिए जाने की बात सामने आई है।

हॉकी के मैदान से राजनीति में आए परगट सिंह के लिए प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालना एक बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी है। वह जालंधर कैंट से विधायक हैं और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान भी रह चुके हैं। अब खेल के मैदान में टीम भावना और नेतृत्व का अनुभव रखने वाले परगट सिंह को उसी तरह की सामूहिक कार्यशैली को राजनीतिक संगठन में लागू करने की चुनौती है।

फिलहाल परगट सिंह ने अपनी नई जिम्मेदारी की शुरुआत धार्मिक आस्था और पंजाब की सेवा के संकल्प के साथ की है। उनके बयानों में वरिष्ठ नेताओं के सम्मान, संगठन की एकजुटता और पंजाब को प्राथमिकता देने की बात प्रमुखता से सामने आई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह इन संदेशों को संगठनात्मक स्तर पर किस तरह लागू करते हैं और पंजाब कांग्रेस को चुनावी तैयारी के लिए किस दिशा में आगे ले जाते हैं।