भोपाल,3 अक्टूबर (युआईटीवी)- एशियन गेम्स 2026 के आखिरी दो दिनों में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। शनिवार का दिन भारत के लिए कई खेलों में पदक की उम्मीद लेकर आया,लेकिन गोल्फ से आई खबर ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मैसूर की युवा गोल्फर प्रणवी शरथ उर्स ने महिला व्यक्तिगत गोल्फ स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियाई खेलों के इतिहास में गोल्फ की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। प्रणवी की इस उपलब्धि ने भारतीय महिला गोल्फ के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
महिला व्यक्तिगत स्ट्रोकप्ले स्पर्धा में प्रणवी उर्स ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार निरंतरता दिखाई। शुरुआती दौर से ही वह अपने खेल पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहीं। एशियन गेम्स में पदक की प्रमुख दावेदारों में उनका नाम पहले से नहीं लिया जा रहा था, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी समीकरण बदल दिए। दबाव भरे मुकाबले में धैर्य बनाए रखते हुए प्रणवी ने अंतिम दौर तक अपनी स्थिति मजबूत रखी और आखिरकार स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
प्रणवी की जीत इसलिए भी खास है क्योंकि एशियाई खेलों में भारतीय महिला गोल्फ को इससे पहले व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक नहीं मिला था। उनकी ऐतिहासिक सफलता ने न केवल उन्हें भारतीय महिला गोल्फ की पहली एशियन गेम्स व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता बनाया,बल्कि देश को इस खेल में एक बड़ी उपलब्धि भी दिलाई। उनकी जीत के साथ भारतीय गोल्फ ने एशियन गेम्स में एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
प्रणवी उर्स एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला गोल्फर बनने के साथ ही लंबे अंतराल के बाद व्यक्तिगत गोल्फ में भारत के लिए स्वर्ण जीतने वाली खिलाड़ी भी बन गई हैं। इससे पहले 2002 के एशियन गेम्स में शिव कपूर ने पुरुष व्यक्तिगत गोल्फ स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था। उसके बाद से भारतीय गोल्फ को व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण का इंतजार था। प्रणवी ने 24 साल बाद इस इंतजार को खत्म कर दिया।
प्रणवी की सफलता की एक और खास बात यह रही कि उन्होंने अपने खेल में निरंतरता को सबसे बड़ा हथियार बनाया। गोल्फ में एक छोटी सी गलती भी पूरे स्कोर को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में चारों राउंड के दौरान एकाग्रता बनाए रखना आसान नहीं होता। प्रणवी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखा और अंतिम चरण में भी दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। यही वजह रही कि वह शीर्ष स्थान तक पहुँचने में कामयाब रहीं।
भारत को महिला टीम गोल्फ स्पर्धा में भी पदक मिला। प्रणवी उर्स,अदिति अशोक और दीक्षा डागर की भारतीय तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। टीम स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे मुकाबले के दौरान पदक की दावेदारी बनाए रखी और अंत में दूसरा स्थान हासिल किया। एशियन गेम्स के इतिहास में टीम गोल्फ स्पर्धा में भारत का यह पहला पदक है। इस तरह शनिवार को भारतीय गोल्फ ने एक साथ दो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं।
महिला टीम में प्रणवी के साथ अदिति अशोक और दीक्षा डागर की मौजूदगी ने भारत की चुनौती को मजबूत बनाया। तीनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने टीम को रजत पदक तक पहुँचाया। खास बात यह है कि व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण जीतने के बाद प्रणवी ने टीम स्पर्धा में भी भारत के पदक अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रदर्शन ने भारतीय महिला गोल्फ में मौजूद प्रतिभा और गहराई को भी सामने रखा।
एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए गोल्फ का यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतियोगिता के अंतिम चरण में पदकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रणवी उर्स के स्वर्ण और महिला टीम के रजत के साथ भारत ने प्रतियोगिता में अपने पदकों का आंकड़ा और मजबूत कर लिया। प्रणवी का स्वर्ण भारत का 18वां स्वर्ण पदक रहा,जबकि कुल पदकों की संख्या 79 तक पहुँच गई।
एशियन गेम्स के आखिरी दो दिन भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। गोल्फ के बाद कुश्ती, तीरंदाजी, ताइक्वांडो, सेलिंग, रग्बी सेवन्स और वॉलीबॉल समेत कई खेलों में भारतीय खिलाड़ी पदक के लिए मैदान में उतर रहे हैं। ऐसे में भारतीय दल की नजरें प्रतियोगिता के अंतिम चरण में पदकों की संख्या और बढ़ाने पर होंगी।
प्रणवी उर्स की ऐतिहासिक जीत ने इन खेलों में भारतीय महिला गोल्फ के लिए एक नई मिसाल कायम की है। जिस खिलाड़ी को शुरुआत में पदक के प्रमुख दावेदारों में नहीं गिना जा रहा था,उसने अपने प्रदर्शन के दम पर सबसे बड़ा पदक हासिल कर लिया। उनका स्वर्ण न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है,बल्कि भारतीय महिला गोल्फ के लिए भी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गया है। अब एशियन गेम्स 2026 के अंतिम दौर में भारतीय खिलाड़ियों से इसी तरह के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
