सना,5 अक्टूबर (युआईटीवी)- यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। यमन सरकार ने हूती समूह के कब्जे वाले शेष इलाकों को वापस लेने के लिए बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत का ऐलान किया है। दूसरी ओर,हूती लड़ाकों ने दक्षिण-पश्चिमी यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ताइज प्रांत में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। हूती की हालिया सैन्य बढ़त और सरकार की जवाबी कार्रवाई की घोषणा के बाद देश में कई वर्षों से अपेक्षाकृत स्थिर रहे मोर्चों पर फिर से बड़े स्तर पर सैन्य गतिविधियाँ बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक,हूती लड़ाके दक्षिणी ताइज प्रांत के महत्वपूर्ण शहर अत तुरबाह में प्रवेश कर चुके हैं। बताया गया कि सरकारी सैनिक दिन के समय ही शहर से पीछे हट गए थे,जिसके कारण हूती लड़ाकों को शहर में दाखिल होने के लिए किसी बड़े संघर्ष का सामना नहीं करना पड़ा। सरकारी सेना और उसके साथ लड़ रहे अन्य लड़ाके शहर के बाहर स्थित पहाड़ी इलाकों की ओर चले गए। कुछ सैनिक कथित तौर पर लड़ाई में हुए नुकसान और सैन्य असफलता के बाद दक्षिण की दिशा में पड़ोसी लहज प्रांत की ओर भी पीछे हट गए।
सरकारी बलों के पीछे हटने के बाद हूती लड़ाकों ने अत तुरबाह शहर में प्रवेश किया और वहां के प्रमुख स्थानों पर अपनी तैनाती शुरू कर दी। उन्होंने शहर के मुख्य प्रवेश और निकास मार्गों के साथ-साथ महत्वपूर्ण ठिकानों पर भी नियंत्रण स्थापित किया। स्थानीय लोगों के अनुसार,हूती लड़ाके प्रमुख सड़कों और सरकारी इमारतों के आसपास नजर आए। उनके शहर में पहुँचने से पहले ही कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक,हूती समूह की ओर से मस्जिदों के लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से विरोध नहीं करने की अपील भी की गई।
अत तुरबाह पर कब्जा हूती समूह के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 2014 के अंत में यमन में संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है,जब समूह ने इस शहर पर नियंत्रण हासिल किया है। शहर पर कब्जे के साथ दक्षिण-पश्चिमी यमन में हूती की सैन्य स्थिति और मजबूत हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है,जब सरकारी बल भी हूती के खिलाफ बड़े अभियान की तैयारी पूरी करने का दावा कर रहे हैं।
इससे पहले रविवार को एक यमनी सैन्य अधिकारी ने बताया था कि हूती लड़ाके अश-शमायातीन और उसके पड़ोसी अल-माफर जिलों के कुछ हिस्सों में आगे बढ़े हैं। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा कर लिया,जिसके बाद सरकारी सैनिकों को अपने मोर्चों से पीछे हटना पड़ा। ताइज प्रांत में लगातार हो रही हूती की प्रगति ने सरकारी बलों के सामने सैन्य और रणनीतिक चुनौती बढ़ा दी है।
हूती की इस बढ़त के बीच यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के अध्यक्ष और सेना के कमांडर-इन-चीफ राशद अल-अलीमी ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद से बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य हूती के कब्जे वाले बाकी इलाकों को वापस लेना है। टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में अल-अलीमी ने कहा कि कई सप्ताह की सैन्य तैयारियों के बाद सरकार अब तैयारी के चरण से कार्रवाई के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
सरकार की ओर से सैन्य अभियान की घोषणा ऐसे समय में हुई है,जब यमन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई मोर्चों पर अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति बनी हुई थी। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से लागू हुए संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई काफी हद तक कम हो गई थी। हालाँकि,संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था और देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक तथा सैन्य विभाजन बना रहा। अब हूती की नई सैन्य बढ़त और सरकार की जवाबी कार्रवाई के ऐलान ने संघर्ष को नए चरण में पहुँचा दिया है।
सितंबर की शुरुआत से हूती समूह ने ताइज और उसके पड़ोसी लहज प्रांत के कई हिस्सों में अपना प्रभाव बढ़ाया है। इस अभियान के दौरान समूह ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों और सैन्य ठिकानों पर कब्जा किया। हूती की लगातार आगे बढ़ती गतिविधियों ने दक्षिण-पश्चिमी यमन की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है और सरकारी बलों के सामने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों की रक्षा करने के साथ-साथ खोए इलाकों को वापस लेने की चुनौती खड़ी कर दी है।
हूती की हालिया सैन्य गतिविधियां केवल ताइज तक सीमित नहीं हैं। समूह ने लाल सागर के किनारे स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा पर भी कब्जा किया था। इसके अगले दिन उसने मय्यून द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने का दावा किया। इस द्वीप को पेरिम के नाम से भी जाना जाता है और इसका स्थान बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। बाब अल-मंदेब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है,जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है।
मोचा और मय्यून जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में हूती की गतिविधियाँ यमन के संघर्ष को केवल घरेलू सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रखतीं। लाल सागर और बाब अल-मंदेब के आसपास का क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव बढ़ने से इसका प्रभाव यमन की सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है। हालाँकि,मौजूदा घटनाक्रम का व्यापक प्रभाव आगे होने वाली सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
यमन का मौजूदा संघर्ष 2014 के आखिर में गंभीर रूप से उभरा था। उस समय हूती समूह ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से में अपना प्रभाव स्थापित कर लिया। इसके बाद देश की राजनीतिक और सैन्य स्थिति तेजी से बदल गई। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार को देश के कई हिस्सों से पीछे हटना पड़ा और संघर्ष धीरे-धीरे व्यापक गृहयुद्ध का रूप लेता गया।
मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया। इसके बाद कई वर्षों तक यमन में हवाई हमले,जमीनी संघर्ष और अलग-अलग सैन्य मोर्चों पर लड़ाई जारी रही। संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा और देश गंभीर मानवीय संकट की चपेट में आ गया।
हालाँकि,वर्षों की लड़ाई के बाद 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से संघर्षविराम लागू हुआ। इस संघर्षविराम के बाद देश में बड़े पैमाने की सैन्य गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई। कई प्रमुख मोर्चों पर स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रही और राजनीतिक समाधान की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत होती रही। इसके बावजूद यमन में सत्ता और क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर मूल विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
अब ताइज और लहज में हूती की नई बढ़त ने उस अपेक्षाकृत शांत सैन्य स्थिति को चुनौती दी है। ताइज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है,क्योंकि यह देश के उत्तर और दक्षिण के बीच संपर्क वाले क्षेत्र में स्थित है और लंबे समय से संघर्ष के महत्वपूर्ण केंद्रों में रहा है। अत तुरबाह पर नियंत्रण हासिल करने से हूती समूह को क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
दूसरी ओर,यमन सरकार के लिए हूती के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेने का ऐलान एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत का संकेत है। सरकार यदि अपने अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाती है तो आने वाले दिनों में ताइज,लहज और आसपास के इलाकों में संघर्ष तेज हो सकता है। इससे पहले से अस्थिर क्षेत्र में नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय स्थिति को लेकर भी चिंताएँ बढ़ सकती हैं।
सरकार की सैन्य घोषणा और हूती की हालिया प्रगति के बीच यमन में राजनीतिक समाधान की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है। वर्षों से जारी संघर्ष का कोई स्थायी समाधान केवल सैन्य माध्यमों से हासिल करना कठिन रहा है। ऐसे में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
वर्तमान घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि यमन में लंबे समय से बनी सैन्य स्थिरता कमजोर पड़ रही है। हूती समूह दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में अपनी पकड़ बढ़ा रहा है,जबकि सरकार ने अब खोए हुए इलाकों को वापस लेने के लिए व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की है। अत तुरबाह पर कब्जे और ताइज के अन्य इलाकों में हूती की बढ़त ने संघर्ष के मोर्चे को एक बार फिर सक्रिय कर दिया है।
यमन में आने वाले दिनों की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकारी बल घोषित सैन्य अभियान को किस स्तर तक आगे बढ़ाते हैं और हूती समूह अपनी मौजूदा बढ़त को बनाए रखने के लिए किस तरह प्रतिक्रिया देता है। यदि दोनों पक्षों के बीच व्यापक सैन्य टकराव शुरू होता है,तो इसका असर केवल ताइज और लहज तक सीमित रहने के बजाय देश के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकता है।
फिलहाल यमन एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है,जहाँ कई वर्षों से अपेक्षाकृत शांत रहे मोर्चे फिर सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं। हूती की लगातार सैन्य बढ़त,रणनीतिक इलाकों पर उसका नियंत्रण और सरकार की जवाबी कार्रवाई की घोषणा ने देश के संघर्ष को एक नए चरण में पहुँचा दिया है। अत तुरबाह पर कब्जा इस बदलती सैन्य स्थिति का ताजा संकेत है, जबकि सरकार का बड़ा सैन्य अभियान आने वाले समय में यमन के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
