ओटावा,5 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को लेकर बातचीत का पाँचवां दौर सोमवार से शुरू हो रहा है। दोनों देश 5 से 9 अक्टूबर तक ओटावा में होने वाली इस बातचीत के जरिए प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। दोनों सरकारों ने इस वार्ता को ऐसे समय में तेज किया है,जब लंबे समय तक चले राजनयिक तनाव के बाद भारत और कनाडा के आर्थिक संबंधों में दोबारा सुधार दिखाई दे रहा है। दोनों पक्षों का लक्ष्य इस साल के अंत तक एक व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ना है।
कनाडा के ग्लोबल अफेयर्स विभाग के अनुसार, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के लिए बातचीत का पाँचवां दौर 5 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान दोनों देशों के वार्ताकार व्यापार और निवेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे तथा अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए बाकी बचे मतभेदों को दूर करने की कोशिश करेंगे। बातचीत का यह दौर दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है।
इस बातचीत से ठीक पहले भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के बीच मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान मुलाकात हुई थी। दोनों मंत्रियों ने प्रस्तावित समझौते को लेकर हुई प्रगति की समीक्षा की और ओटावा में होने वाली वार्ता के अगले चरण पर चर्चा की। कनाडा के ग्लोबल अफेयर्स विभाग के मुताबिक,इस बैठक के दौरान सिद्धू ने 2026 के अंत तक दोनों देशों के लिए लाभकारी समझौता करने की दिशा में लगातार काम करने के महत्व पर जोर दिया।
भारत और कनाडा के बीच आर्थिक रिश्तों में सुधार ऐसे समय में हो रहा है,जब दोनों देश व्यापार को तेजी से बढ़ाने की संभावनाएँ तलाश रहे हैं। पिछले कुछ समय में दोनों पक्षों ने ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, एयरोस्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरते क्षेत्रों को सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना है। दोनों देशों का मानना है कि इन क्षेत्रों में मौजूद पूरक क्षमताओं का इस्तेमाल करके व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
कनाडा के अनुसार, भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 30.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया था। दोनों देश आने वाले वर्षों में इस व्यापार को और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। कनाडा ने 2030 तक भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके सालाना 70 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को लेकर बातचीत के चार दौर पहले ही पूरे हो चुके हैं। इसका पिछला दौर 18 सितंबर को नई दिल्ली में समाप्त हुआ था। इसके बाद दोनों पक्षों ने बातचीत को आगे बढ़ाने और लंबित मुद्दों पर समाधान तलाशने की दिशा में काम जारी रखा। कनाडाई अधिकारियों के मुताबिक,दोनों देशों के वार्ताकारों के सामने साल के अंत से पहले बातचीत पूरी करने का साझा लक्ष्य है। इसके लिए बातचीत की गति बनाए रखने और बचे हुए मतभेदों को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत और कनाडा के आर्थिक संबंधों में व्यापार समझौते के अलावा कारोबारी संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के पाँचवें दौर के तुरंत बाद कनाडा की ओर से भारत में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा व्यापार मिशन आयोजित किया जाएगा। कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू 12 से 17 अक्टूबर तक भारत में ‘टीम कनाडा ट्रेड मिशन’ का नेतृत्व करेंगे।
इस व्यापार मिशन में कनाडा के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े करीब 300 कारोबारी प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य भारतीय बाजार में नए कारोबारी अवसर तलाशना और दोनों देशों की कंपनियों के बीच व्यावसायिक संपर्क बढ़ाना है। मिल्वौकी में हुई बैठक के दौरान पीयूष गोयल और मनिंदर सिद्धू ने इस व्यापार मिशन को लेकर भी चर्चा की थी।
कनाडा का कहना है कि व्यापार मिशन के जरिए दोनों देशों के कारोबारियों को एक-दूसरे के बाजारों को समझने,संभावित साझेदारों की पहचान करने और निवेश के नए अवसर तलाशने का मौका मिलेगा। ऐसे समय में जब दोनों देश आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं,इस तरह के कारोबारी संपर्क को व्यापार समझौते की बातचीत के समानांतर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कनाडा भारत की बढ़ती ऊर्जा और संसाधन संबंधी जरूरतों को देखते हुए खुद को दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता के रूप में भी पेश कर रहा है। कनाडाई पक्ष का विशेष जोर ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर है। वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की माँग बढ़ने के बीच कनाडा के पास उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन भारत के लिए संभावित महत्व रखते हैं। वहीं भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था कनाडाई कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराती है।
मनिंदर सिद्धू ने भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर हाल में कहा था कि पीयूष गोयल के साथ हुई बातचीत में ऐसे समझौते की दिशा में वास्तविक प्रगति हुई है,जिससे 2030 तक दोनों देशों के आपसी व्यापार को 70 अरब डॉलर तक पहुँचाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और ऊर्जा,महत्वपूर्ण खनिजों, एयरोस्पेस तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में कनाडा की क्षमताओं को दोनों देशों के कारोबारियों और कामगारों के लिए संभावनाओं से जोड़ा था।
कनाडा के लिए भारत के साथ आर्थिक संबंधों का महत्व उसकी व्यापक व्यापार विविधीकरण रणनीति से भी जुड़ा है। कनाडा लंबे समय से अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए अन्य बाजारों में पहुँच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कनाडाई सरकार का लक्ष्य अगले दशक में अमेरिका के बाहर के बाजारों में अपने निर्यात को दोगुना करना है। इस रणनीति में भारत जैसे तेजी से बढ़ते बड़े बाजार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत भी अपनी व्यापार साझेदारियों में विविधता बढ़ाने और प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में भारत-कनाडा व्यापार समझौता दोनों देशों की अलग-अलग आर्थिक प्राथमिकताओं को एक साझा मंच दे सकता है। हालाँकि,समझौते के अंतिम स्वरूप तक पहुँचाने के लिए कई जटिल व्यापारिक मुद्दों पर सहमति बनाना अभी बाकी है।
दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार आँकड़े इस आर्थिक रिश्ते की व्यापकता को दिखाते हैं। कनाडा सरकार के आँकड़ों के मुताबिक,2025 में भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार 13.6 अरब डॉलर रहा। इसमें कनाडा का भारत को निर्यात लगभग 3.9 अरब डॉलर था। कनाडा से भारत भेजी जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में सब्जियाँ,खनिज ईंधन, तेल और लकड़ी की लुगदी शामिल थीं। इन क्षेत्रों के अलावा भी कई उत्पाद दोनों देशों के बीच व्यापार का हिस्सा हैं।
वहीं भारत से कनाडा को वस्तुओं का आयात 2025 में करीब 9.7 अरब डॉलर रहा। भारत से कनाडा जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में कीमती पत्थर और धातुएं, मशीनरी तथा दवाएं शामिल थीं। इससे पता चलता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार कई अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हुआ है और प्रस्तावित समझौते के जरिए इन क्षेत्रों में बाजार पहुंच और कारोबारी अवसरों को और बढ़ाया जा सकता है।
सेवाओं का व्यापार भारत-कनाडा आर्थिक रिश्ते का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2025 में कनाडा के सेवा निर्यात का मूल्य लगभग 15.2 अरब डॉलर रहा। इसमें शिक्षा से संबंधित यात्रा का महत्वपूर्ण योगदान था। कनाडा में भारतीय विद्यार्थियों की बड़ी संख्या लंबे समय से दोनों देशों के बीच लोगों के संपर्क और सेवा क्षेत्र के रिश्तों का एक प्रमुख आधार रही है। शिक्षा के अलावा पेशेवर सेवाएँ, वित्तीय सेवाएँ, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य सेवा क्षेत्र भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में भूमिका निभाते हैं।
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते में वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के साथ-साथ निवेश और कारोबारी गतिविधियों से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण होंगे। दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने के लिए बेहतर कारोबारी वातावरण, बाजार पहुँच और नियमों को लेकर स्पष्टता जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा हो सकते हैं। साथ ही, दोनों पक्ष उन क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रहे हैं, जहाँ उनकी अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकती हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में कनाडा भारत के लिए दीर्घकालिक आपूर्ति का विकल्प बनना चाहता है। भारत की बढ़ती ऊर्जा माँग को देखते हुए कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों की स्थिर आपूर्ति दोनों देशों के आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। वहीं महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और उनकी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना भी भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
एयरोस्पेस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। तकनीकी विशेषज्ञता,अनुसंधान और नवाचार में सहयोग के जरिए कंपनियों और संस्थानों के बीच नई साझेदारियां विकसित हो सकती हैं। भारत के बड़े तकनीकी बाजार और कनाडा की अनुसंधान एवं तकनीकी क्षमता को एक साथ लाने से इन क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
हालाँकि,व्यापार समझौते की बातचीत में कई संवेदनशील और जटिल मुद्दे भी शामिल होते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में बाजार पहुँच, व्यापार नियम, निवेश, सेवाएँ और अन्य आर्थिक विषयों पर दोनों देशों की प्राथमिकताएँ अलग हो सकती हैं। ऐसे में वार्ताकारों के सामने बचे हुए मतभेदों को कम करना और दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान तैयार करना महत्वपूर्ण चुनौती होगी। दोनों सरकारों ने बातचीत की गति बनाए रखने की बात कही है, जिससे संकेत मिलता है कि साल के अंत तक समझौते को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी जा रही है।
भारत और कनाडा के बीच लंबे समय तक चले राजनयिक तनाव का असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ा था। अब आर्थिक और कारोबारी संपर्क को फिर से मजबूत करने की कोशिशें ऐसे समय में हो रही हैं,जब दोनों पक्ष संबंधों को व्यावहारिक आधार पर आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। व्यापार समझौते की बातचीत और उच्चस्तरीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही इस बदलाव के महत्वपूर्ण संकेत हैं।
ओटावा में शुरू होने वाला पाँचवां दौर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बातचीत के अगले चरण को आगे बढ़ाएगा और साल के अंत तक समझौता पूरा करने के साझा लक्ष्य की दिशा में प्रगति का अवसर देगा। चार दौर की बातचीत पूरी होने के बाद अब दोनों पक्ष उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे,जिन पर अभी सहमति बनना बाकी है। इसके साथ ही कनाडा का व्यापार मिशन भारत में कारोबारी संपर्क को जमीनी स्तर पर बढ़ाने का प्रयास करेगा।
भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों का आकार पहले ही महत्वपूर्ण स्तर पर पहुँच चुका है,लेकिन दोनों सरकारें इसे और व्यापक बनाने की कोशिश कर रही हैं। 2030 तक 70 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य इस महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। यदि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर समयसीमा के भीतर सहमति बनती है,तो इससे वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार,निवेश तथा नए क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक औपचारिक ढाँचा मिल सकता है।
फिलहाल दोनों देशों की नजर ओटावा में शुरू होने वाली बातचीत पर है। एक तरफ वार्ताकार समझौते से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करेंगे,वहीं दूसरी तरफ कनाडा का बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत में कारोबारी अवसर तलाशेगा। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, एयरोस्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं के बीच भारत-कनाडा आर्थिक संबंध एक नए चरण में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले महीनों में बातचीत की प्रगति यह तय करेगी कि दोनों देश साल के अंत तक प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप देने के अपने लक्ष्य के कितने करीब पहुँच पाते हैं।
