वॉशिंगटन,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यूक्रेन की नाटो सदस्यता को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि इस समय वॉशिंगटन का मुख्य ध्यान रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों पर है। रुबियो ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा हालात को लेकर अमेरिका चिंतित है, क्योंकि युद्ध जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है,उससे इसके जल्द समाप्त होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार संघर्ष की स्थिति और उसके रुझान पर नजर बनाए हुए है।
मार्को रुबियो ने ये टिप्पणियाँ आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक में आइसलैंड की विदेश मंत्री थोरगेरदुर कैट्रिन गुन्नार्सडॉटिर के साथ संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कीं। यूक्रेन की नाटो सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर फिलहाल कोई बातचीत नहीं हो रही है। उनके मुताबिक यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाने का फैसला केवल किसी एक देश के निर्णय से नहीं हो सकता,बल्कि इसके लिए गठबंधन के सदस्य देशों के बीच आम सहमति की आवश्यकता होती है।
रुबियो ने कहा कि यूक्रेन की नाटो सदस्यता के सवाल का सीधा जवाब हाँ या ना में देना संभव नहीं है। उन्होंने मौजूदा प्राथमिकता पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका का ध्यान इस समय युद्ध को समाप्त करने पर है। उन्होंने कहा कि युद्ध में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाना बेहद दुखद है और यदि अमेरिका संघर्ष को खत्म करने में कोई सकारात्मक भूमिका निभा सकता है,तो वह ऐसा करना चाहेगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है,जब रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष लगातार जारी है और दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों में कमी के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। रुबियो ने कहा कि वॉशिंगटन युद्ध के मौजूदा रुझान को ध्यान से देख रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका को यह चिंता है कि संघर्ष जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है,वह शांति की ओर जाती हुई नहीं दिखाई दे रही है। उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी संभावित कूटनीतिक भूमिका पर अपना ध्यान बनाए हुए है।
यूक्रेन की नाटो सदस्यता रूस और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से विवाद का प्रमुख मुद्दा रही है। यूक्रेन नाटो में शामिल होने की इच्छा लंबे समय से व्यक्त करता रहा है, जबकि रूस इसे अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखता है। युद्ध शुरू होने के बाद यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो गया है। ऐसे में रुबियो का यह कहना कि फिलहाल सदस्यता पर कोई चर्चा नहीं हो रही है, मौजूदा अमेरिकी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है।
हालाँकि,रेक्याविक में हुई बातचीत केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रही। अमेरिका और आइसलैंड के अधिकारियों के बीच आर्कटिक और ‘हाई नॉर्थ’ क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। रुबियो ने कहा कि पिछले दो दशकों में वैश्विक सुरक्षा का वातावरण काफी बदल चुका है और इसी वजह से अमेरिका का ध्यान भी नए रणनीतिक क्षेत्रों की ओर गया है। उन्होंने विशेष रूप से आर्कटिक क्षेत्र के बढ़ते महत्व का उल्लेख किया।
रुबियो ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में दुनिया की परिस्थितियाँ काफी बदल गई हैं। उन्होंने कहा कि अब आर्कटिक पर पहले की तुलना में कहीं अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उनके मुताबिक बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र केवल पर्यावरण या भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं रहा,बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का भी अहम क्षेत्र बन चुका है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने आइसलैंड को भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश बताया। उन्होंने कहा कि अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण आइसलैंड यूरोप और अमेरिका दोनों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। अटलांटिक महासागर के बीच स्थित होने के कारण आइसलैंड उत्तरी अटलांटिक और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र है। रुबियो ने संकेत दिया कि अमेरिका रेक्याविक के साथ सुरक्षा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत जारी रखने के लिए तैयार है।
आर्कटिक और हाई नॉर्थ क्षेत्र को लेकर अमेरिका की चिंता केवल पारंपरिक सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं है। रुबियो ने कहा कि इस क्षेत्र में कई तरह के नए और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे सामने आ रहे हैं। इनमें गुप्त गतिविधियाँ,समुद्र के नीचे मौजूद संचार और ऊर्जा से जुड़ी केबलों को संभावित खतरे तथा महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा शामिल है। इसके अलावा आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े सुरक्षा पहलू भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं।
समुद्र के नीचे बिछी केबलें आधुनिक वैश्विक संचार और आर्थिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनके जरिए इंटरनेट,वित्तीय लेनदेन और अंतर्राष्ट्रीय संचार का बड़ा हिस्सा संचालित होता है। ऐसे में इन बुनियादी ढांचों को होने वाला कोई भी नुकसान व्यापक स्तर पर प्रभाव डाल सकता है। इसी तरह आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री मार्गों के खुलने और शिपिंग गतिविधियों में संभावित वृद्धि ने भी सुरक्षा से जुड़े नए सवाल खड़े किए हैं।
रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण में अमेरिका आइसलैंड और अन्य उत्तरी अटलांटिक साझेदारों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। आर्कटिक में बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों के बीच अमेरिका के लिए इस क्षेत्र में सहयोग और समन्वय महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
कुल मिलाकर रेक्याविक में मार्को रुबियो की टिप्पणियों से दो प्रमुख बातें सामने आईं। पहली,फिलहाल अमेरिका यूक्रेन की नाटो सदस्यता पर किसी नई प्रक्रिया या चर्चा को प्राथमिकता नहीं दे रहा है और उसका मुख्य जोर रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर है। दूसरी,अमेरिका आर्कटिक और हाई नॉर्थ क्षेत्र को तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण मान रहा है। यूक्रेन युद्ध और आर्कटिक की सुरक्षा चुनौतियाँ अलग-अलग मुद्दे होने के बावजूद दोनों ने अमेरिका की विदेश और सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है। ऐसे में आने वाले समय में वॉशिंगटन की रणनीति इन दोनों क्षेत्रों में कूटनीतिक प्रयासों और सुरक्षा सहयोग के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित रह सकती है।
