काला सागर में भारतीय क्रू वाले तेल टैंकर पर ड्रोन हमला,23 लोगों को सुरक्षित बचाया गया (तस्वीर क्रेडिट@NewsNorthEast24)

काला सागर में भारतीय क्रू वाले तेल टैंकर पर ड्रोन हमला,23 लोगों को सुरक्षित बचाया गया

मॉस्को,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- रूस के काला सागर तट के पास एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। लाइबेरिया के झंडे वाला यह तेल टैंकर कच्चा तेल लेकर जा रहा था और उस पर सवार सभी 23 क्रू सदस्य भारतीय नागरिक थे। हमले के बाद जहाज में आग फैल गई,लेकिन राहत और बचाव अभियान के दौरान सभी क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। रूस के परिवहन मंत्रालय ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि टैंकर पर समुद्री ड्रोन से हमला किया गया था। आग इतनी भीषण थी कि शुरुआती प्रयास में दमकलकर्मी उस पर काबू नहीं पा सके।

यह घटना रूस के लोकप्रिय समुद्री शहर सोची के पास हुई। काला सागर के तट पर स्थित सोची रूस के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और यहाँ करीब पाँच लाख लोग रहते हैं। टैंकर में आग लगने के बाद समुद्र में तेज नारंगी रंग की लपटें उठती दिखाई दीं, जबकि तटीय इलाके के ऊपर काले धुएँ का घना गुबार नजर आया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए समुद्र तट और तटवर्ती इलाकों तक लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया।

रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक,टैंकर पर समुद्री ड्रोन से हमला किया गया। हमले के बाद कच्चे तेल में आग लग गई और देखते ही देखते आग की लपटें काफी तेज हो गईं। स्थिति इतनी गंभीर थी कि दमकलकर्मी शुरुआत में आग बुझाने में सफल नहीं हो सके। अधिकारियों ने बताया कि आग की तीव्रता कम होने के बाद इसे नियंत्रित करने के लिए दोबारा प्रयास किया जाएगा। इस दौरान प्राथमिकता जहाज पर मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी।

राहत अभियान के तहत टैंकर पर मौजूद सभी 23 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। सभी क्रू सदस्यों के भारतीय होने की जानकारी सामने आने के बाद इस घटना को लेकर भारत में भी चिंता पैदा हुई। हालाँकि,राहत की बात यह रही कि हमले के बावजूद किसी भारतीय क्रू सदस्य के हताहत होने की सूचना नहीं है। जहाज पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षित निकासी के बाद स्थानीय प्रशासन और बचाव दल ने आग और उसके संभावित प्रभाव को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित किया।

घटना के बाद सामने आए वीडियो में समुद्र के बीच टैंकर से उठती आग की ऊँची लपटें देखी गईं। आग की वजह से आसमान में धुएँ का बड़ा गुबार बन गया था। सोची के तटीय इलाके से भी इस घटना का असर दिखाई दे रहा था। स्थानीय प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समुद्र तटों तक पहुँच सीमित करने का फैसला किया। आग के कारण समुद्री क्षेत्र में पर्यावरणीय जोखिम को लेकर भी चिंता बढ़ी है,क्योंकि जहाज कच्चा तेल लेकर जा रहा था।

काला सागर में यह घटना ऐसे समय हुई है,जब रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण इस समुद्री क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। वर्ष 2022 में संघर्ष शुरू होने के बाद से काला सागर के आसपास समुद्री परिवहन और वाणिज्यिक जहाजों से जुड़े जोखिम बढ़े हैं। रूस और यूक्रेन दोनों ने इस क्षेत्र में एक-दूसरे के जहाजों,बंदरगाहों और समुद्री बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाए जाने के आरोप लगाए हैं।

इस घटना से एक दिन पहले रोमानिया के तट के पास भी एक अन्य जहाज में आग लगने और उसके बाद उसके डूबने की खबर सामने आई थी। उस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई थी,जबकि एक अन्य व्यक्ति के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। यूक्रेन ने उस घटना के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया था। हादसे में एक भारतीय क्रू सदस्य के घायल होने की बात भी सामने आई थी। लगातार दो घटनाओं ने काला सागर में काम कर रहे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

रूस और यूक्रेन के बीच समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर माल ढुलाई और ऊर्जा परिवहन पर भी पड़ रहा है। हाल के दिनों में रूस की ओर से रोमानिया के तट के पास यूक्रेनी सामान ले जा रहे अनाज के जहाजों को निशाना बनाए जाने के दावे सामने आए हैं। रोमानिया यूरोपीय संघ का सदस्य देश है और काला सागर के जरिए होने वाला समुद्री व्यापार उसके लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में समुद्री क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का प्रभाव केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहता,बल्कि आसपास के देशों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

दूसरी ओर,यूक्रेन का कहना है कि रूस के तेल ढांचे और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर किए जा रहे उसके हमले जवाबी कार्रवाई का हिस्सा हैं। यूक्रेन का आरोप है कि रूस लगातार रात के समय उसके शहरों और कस्बों को निशाना बना रहा है। इसी के जवाब में वह रूसी ऊर्जा ढाँचे को निशाना बना रहा है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला युद्ध के समुद्री क्षेत्र तक फैलता जा रहा है।

हाल के हफ्तों में दोनों पक्षों ने अपने सैन्य अभियानों को और तेज करने के संकेत दिए हैं। रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और वहाँ मौजूद महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने के लिए हमले बढ़ाए हैं। वहीं,यूक्रेन भी रूस के भीतर ऊर्जा और तेल से जुड़े ठिकानों पर ड्रोन हमले कर रहा है। दिन के समय किए जाने वाले ड्रोन हमलों से कीव में यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं।

काला सागर में तेल टैंकर में लगी आग ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच समुद्री व्यापार और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाए। तेल, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं को लेकर चलने वाले जहाज इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में समुद्री मार्गों के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ न केवल जहाजों पर सवार कर्मचारियों के लिए खतरा बढ़ाती हैं,बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डाल सकती हैं। भारतीय क्रू वाले इस टैंकर के सभी 23 सदस्यों का सुरक्षित बच जाना राहत की खबर है,लेकिन घटना ने काला सागर में बढ़ते समुद्री सुरक्षा संकट को एक बार फिर सामने ला दिया है।