रूस में लैब कर्मी की मौत पर प्लेग का दावा खारिज,डब्ल्यूएचओ ने माँगी और जानकारी (तस्वीर क्रेडिट@GoldySrivastav)

रूस में लैब कर्मी की मौत पर प्लेग का दावा खारिज,डब्ल्यूएचओ ने माँगी और जानकारी

नई दिल्ली,8 अक्टूबर (युआईटीवी)- रूस ने साइबेरिया में एक प्रयोगशाला कर्मी की मौत को प्लेग से जोड़कर लगाए जा रहे दावों से इनकार किया है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि महिला की मौत प्लेग के कारण होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। हालाँकि,इस पूरे मामले को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास अभी भी कई सवाल हैं। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने रूस से घटना के बारे में अधिक जानकारी साझा करने की अपील की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर प्रयोगशाला में काम करने वाली महिला की मौत किस बीमारी के कारण हुई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की महामारी प्रबंधन निदेशक मारिया वान केरखोव ने बुधवार को कहा कि संगठन को अभी यह जानकारी नहीं है कि 2 अक्टूबर को हुई महिला की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था। उन्होंने कहा कि इस मामले को समझने के लिए रूस से और अधिक जानकारी की आवश्यकता है। उनके मुताबिक,उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि महिला किस तरह संक्रमित हुई थीं और उनकी बीमारी की वास्तविक प्रकृति क्या थी।

इस मामले को लेकर इसलिए भी चिंता बढ़ी है क्योंकि मृतक महिला जिस प्रयोगशाला में काम करती थीं,वह प्लेग से संबंधित शोध के लिए जानी जाती है। यह संस्थान ऐसे क्षेत्र में स्थित है,जहाँ प्लेग ऐतिहासिक रूप से स्थानिक बीमारी के रूप में मौजूद रहा है। इसी वजह से महिला की मौत के बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में यह अटकलें तेज हो गईं कि कहीं उनकी मौत प्लेग संक्रमण के कारण तो नहीं हुई। हालाँकि,इन दावों की अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।

रूस की सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी संस्था ने अपने बयानों में साफ किया है कि व्यापक चिकित्सकीय जाँच के दौरान महिला की बीमारी को प्लेग से जोड़ने वाला कोई प्रमाण नहीं मिला। संस्था ने प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं की है। रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, महिला की मौत निमोनिया के कारण हुई थी और इसे एक सामान्य तीव्र श्वसन वायरल संक्रमण से जोड़ा गया है। अधिकारियों ने यह भी बताया है कि हाल के समय में रूस में प्लेग का कोई मामला सामने नहीं आया है।

रूसी अधिकारियों की ओर से प्लेग के दावे को खारिज किए जाने के बावजूद घटना को लेकर पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है। महिला की मौत के बाद रूसी प्रशासन ने मामले से संबंधित जानकारी सीमित रखी है। इस वजह से घटना को लेकर गोपनीयता बनी हुई है और अलग-अलग तरह की अटकलों को जगह मिल रही है। रूस के सरकारी टेलीविजन और प्रमुख राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी इस मामले को प्रमुखता से नहीं उठाया है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी काफी सीमित है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि निमोनिया एक आम बीमारी है और केवल किसी व्यक्ति की निमोनिया से मौत होने के आधार पर इसे प्लेग से जोड़ना उचित नहीं होगा। हालाँकि,इस घटना की परिस्थितियों को देखते हुए संगठन यह जानना चाहता है कि महिला को संक्रमण कैसे हुआ और उनकी बीमारी की प्रकृति क्या थी। मारिया वान केरखोव ने कहा कि संगठन अभी यह समझने की स्थिति में नहीं है कि महिला संक्रमित कैसे हुईं। यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ रूस से अतिरिक्त जानकारी की माँग कर रहा है।

इस मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि प्लेग एक गंभीर संक्रामक बीमारी है,जो कुछ विशेष परिस्थितियों में जानलेवा हो सकती है। हालाँकि,आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में इसका उपचार संभव है और समय पर पहचान होने पर मरीज को उचित दवाओं से बचाया जा सकता है। प्लेग आम तौर पर संक्रमित जानवरों या उनके संपर्क में आने वाले पिस्सुओं के माध्यम से फैल सकता है। कुछ परिस्थितियों में संक्रमित व्यक्ति से भी संक्रमण फैलने का जोखिम होता है,खासकर बीमारी के कुछ विशेष रूपों में।

साइबेरिया और उसके आसपास के कुछ इलाकों में प्लेग का ऐतिहासिक और प्राकृतिक आधार मौजूद रहा है। यही कारण है कि वहाँ बीमारी की निगरानी और उससे जुड़े वैज्ञानिक शोध को महत्वपूर्ण माना जाता है। जिस संस्थान में मृतक महिला काम करती थीं,वह भी प्लेग के अध्ययन से जुड़ा रहा है। इसलिए किसी कर्मचारी की अज्ञात बीमारी से मौत होने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से अतिरिक्त जानकारी हासिल करने की कोशिश स्वाभाविक मानी जा रही है।

रूस की ओर से फिलहाल यही कहा गया है कि जाँच में प्लेग का कोई प्रमाण नहीं मिला। इसके साथ ही देश के स्वास्थ्य अधिकारियों ने हाल में प्लेग के किसी नए मामले की पुष्टि नहीं की है। इससे फिलहाल महामारी जैसी किसी स्थिति की पुष्टि नहीं होती। दूसरी ओर, डब्ल्यूएचओ का रुख यह है कि उपलब्ध जानकारी पर्याप्त नहीं है और घटना के कारणों को समझने के लिए और विवरण आवश्यक हैं।

इस घटना ने एक बार फिर उच्च जोखिम वाली संक्रामक बीमारियों पर शोध करने वाली प्रयोगशालाओं में सुरक्षा और निगरानी के महत्व को सामने ला दिया है। ऐसी जगहों पर काम करने वाले कर्मचारियों की स्वास्थ्य निगरानी, संक्रमण के संभावित स्रोत की पहचान और किसी असामान्य बीमारी की स्थिति में तत्काल सूचना साझा करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। खासकर तब,जब संबंधित प्रयोगशाला ऐसे रोग पर शोध करती हो जिसका क्षेत्रीय स्तर पर प्राकृतिक प्रसार पहले से मौजूद रहा हो।

फिलहाल रूस ने प्लेग से जुड़े दावों को खारिज कर दिया है और महिला की मौत को निमोनिया से जोड़कर बताया है,लेकिन डब्ल्यूएचओ के पास इस घटना को लेकर अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं। महिला को संक्रमण कैसे हुआ,उनकी बीमारी की पूरी चिकित्सकीय तस्वीर क्या थी और मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था,इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। तब तक यह मामला किसी नई प्लेग महामारी की पुष्टि नहीं,बल्कि एक ऐसी घटना के रूप में देखा जा रहा है,जिसकी परिस्थितियों को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां रूस से और जानकारी चाहती हैं।