नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन (तस्वीर क्रेडिट@TahirsaifiRe)

नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन,अभिनय के साथ समाजसेवा की विरासत भी छोड़ गए दिग्गज कलाकार

मुंबई,8 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने गोवा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उन्हें हृदयाघात आया था। घर पर बेहोश पाए जाने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया,जहाँ चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की,लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही हिंदी और मराठी फिल्म जगत के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी शोक की लहर दौड़ गई।

नाना पाटेकर के निधन की खबर ने उनके प्रशंसकों को गहरा सदमा दिया है। अपने चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर भारतीय सिनेमा में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी दमदार आवाज,तीखे संवाद बोलने का अंदाज,चेहरे के भाव और किरदार में पूरी तरह उतर जाने की क्षमता ने उन्हें अपने दौर के सबसे अलग अभिनेताओं में शामिल किया। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य और नकारात्मक किरदारों तक उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का प्रभाव छोड़ा।

नाना पाटेकर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था और उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत रंगमंच से की। थिएटर ने उनके अभिनय को गहराई दी और बाद में यही अनुभव फिल्मों में उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने हिंदी के साथ मराठी सिनेमा में भी महत्वपूर्ण काम किया। शुरुआती दौर में उन्होंने ऐसी फिल्मों में अभिनय किया जिनमें उनके किरदारों को केवल संवादों के सहारे नहीं, बल्कि भावनाओं और व्यक्तित्व की गहराई के साथ प्रस्तुत करना जरूरी था। यही वजह रही कि धीरे-धीरे उनका नाम गंभीर और प्रभावशाली अभिनेताओं की सूची में मजबूती से स्थापित होता गया।

फिल्म ‘परिंदा’ ने उनके फिल्मी करियर में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। इसके बाद ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘खामोशी’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘नटसम्राट’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। इन भूमिकाओं में उनका अभिनय इतना प्रभावशाली रहा कि कई किरदार उनकी पहचान का हिस्सा बन गए। दूसरी ओर, ‘वेलकम’ जैसी लोकप्रिय फिल्म में उनके हास्य और अलग अंदाज वाले किरदार ने उन्हें नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय बनाया।

उनके अभिनय की खासियत यह थी कि वह किरदार को केवल निभाते नहीं थे,बल्कि उसकी मानसिकता और भावनात्मक स्थिति को पर्दे पर जीवंत करने की कोशिश करते थे। उनकी आवाज और संवाद अदायगी को भी भारतीय सिनेमा में अलग पहचान मिली। गंभीर दृश्यों में उनका संयम और भावनात्मक दृश्यों में उनकी तीव्रता दर्शकों पर गहरा असर छोड़ती थी। यही कारण है कि उनके निभाए कई किरदार आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार पात्रों में गिने जाते हैं।

नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2013 में उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। अभिनय के अलावा उन्होंने निर्देशन और रंगमंच के क्षेत्र में भी अपनी सक्रियता बनाए रखी। उन्होंने ‘प्रहार’ जैसी फिल्म का निर्देशन किया, जिसमें सैनिकों के जीवन और संघर्ष को केंद्र में रखा गया था।

हालाँकि,नाना पाटेकर की पहचान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही। वह सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। किसानों और ग्रामीण समुदायों से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने कई बार अपनी चिंता व्यक्त की। सामाजिक क्षेत्र में उनके काम को विशेष रूप से किसानों की सहायता और ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में याद किया जाता है। नाम फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए कई सामाजिक पहल में योगदान दिया।

उनके निधन की खबर सामने आने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से नेताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें प्रख्यात अभिनेता, रंगमंच के सशक्त कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी बताते हुए उनके निधन को कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने अपने अभिनय से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि अभिनेता ने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों से हिंदी सिनेमा में विशिष्ट पहचान बनाई। उनके अनुसार,नाना पाटेकर का निधन फिल्म और कला जगत के लिए बड़ी क्षति है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अभिनेता के असाधारण हुनर, दमदार पर्दे की मौजूदगी और किसानों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को याद किया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने अपने यादगार अभिनय से भारतीय सिनेमा को कई महत्वपूर्ण किरदार दिए। उन्होंने अभिनेता के सामाजिक कार्यों और किसानों के प्रति उनके समर्पण का भी उल्लेख किया।

महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने नाना पाटेकर को अभिनय की दुनिया का दिग्गज बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर सच्ची अभिव्यक्ति और सामाजिक जागरूकता का बेहतरीन संगम थे। उन्होंने ‘नटसम्राट’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों में उनके योगदान को याद किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की सांसद कनिमोझी, झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल, दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा, पंजाब कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रोहित पवार समेत कई अन्य नेताओं ने भी अभिनेता के निधन पर दुख जताया। रोहित पवार ने विशेष रूप से किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों को याद किया।

नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है जिसकी पहचान केवल उसकी लोकप्रिय फिल्मों से नहीं,बल्कि अभिनय की एक विशिष्ट शैली से बनी थी। उन्होंने पर्दे पर ऐसे किरदारों को जीवंत किया जिनमें गुस्सा, दर्द, संवेदना, संघर्ष और हास्य जैसी अलग-अलग भावनाएँ दिखाई देती थीं। उनकी आवाज और संवाद बोलने की शैली लंबे समय तक दर्शकों के बीच चर्चा का विषय रही।

उनका जाना इसलिए भी एक बड़ी क्षति है क्योंकि उन्होंने अभिनय के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाया। किसानों और ग्रामीण समाज से जुड़े उनके प्रयासों ने उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष सामने रखा जो फिल्मों में दिखाई देने वाले कलाकार से अलग था। यही वजह है कि उनके निधन पर फिल्म जगत के साथ सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी व्यापक शोक व्यक्त किया जा रहा है।

नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं,लेकिन उनके निभाए किरदार,संवाद और अभिनय की छाप लंबे समय तक भारतीय सिनेमा के इतिहास में बनी रहेगी। ‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ तक और ‘नटसम्राट’ से ‘वेलकम’ तक, उन्होंने दर्शकों को अभिनय के कई अलग रंग दिखाए। एक अभिनेता के रूप में उनकी विरासत फिल्मों में सुरक्षित है,जबकि एक संवेदनशील समाजसेवी के रूप में किए गए उनके काम उन्हें पर्दे से बाहर भी यादगार बनाए रखेंगे।