वाशिंगटन,8 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर व्हाइट हाउस ने बड़ा बयान दिया है। अमेरिका ने भारत को अपने सबसे मजबूत सहयोगियों में शामिल बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों को दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण बताया है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे किए हैं। व्हाइट हाउस ने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए भारत को अमेरिका के मजबूत सहयोगियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालाँकि,इस बयान के साथ व्हाइट हाउस की ओर से किसी नई द्विपक्षीय पहल,समझौते या नीतिगत फैसले की घोषणा नहीं की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार सार्वजनिक पद की जिम्मेदारी सँभाली थी। इसके बाद उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 13 वर्ष तक काम किया। मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए लोकसभा चुनाव में जीत के बाद उन्होंने देश के प्रधानमंत्री का पद सँभाला। इस तरह 7 अक्टूबर 2026 को नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जनसेवा के 25 वर्ष पूरे किए।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति में अमेरिका के साथ संबंधों को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार, ऊर्जा, अंतरिक्ष, शिक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में रिश्ते व्यापक हुए हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा सहित कई साझा मुद्दों पर भी संवाद करते रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच औपचारिक पारस्परिक रक्षा संधि नहीं है,लेकिन पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग का विस्तार हुआ है। सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक, उपकरणों की खरीद और रणनीतिक संवाद के जरिए दोनों देशों ने अपने संबंधों को नई दिशा दी है। इसके अलावा महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख भी दोनों देशों के राजनीतिक संवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में करीबी दिखाई दी थी। अमेरिका में भारतीय समुदाय से जुड़े बड़े कार्यक्रमों में दोनों नेताओं की संयुक्त मौजूदगी ने भी भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा को जन्म दिया था।
ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद भी दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर संवाद जारी रहा है। हालाँकि,इस दौरान व्यापार और कुछ नीतिगत मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। दोनों देशों के बीच शुल्क,बाजार पहुँच और व्यापार संतुलन जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा रहे हैं। ऐसे समय में व्हाइट हाउस की ओर से भारत को अमेरिका के सबसे मजबूत सहयोगियों में शामिल करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मतभेदों के बावजूद व्यापक रणनीतिक संबंधों को महत्व दिया जा रहा है।
भारत ने पिछले वर्षों में अमेरिका के अलावा अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ भी अपने संबंधों को विस्तार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न देशों के साथ उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया है। साथ ही भारत ने विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के हितों से जुड़े मुद्दों को वैश्विक मंचों पर प्रमुखता से उठाया है। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत का संवाद भी इसी व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा रहा है।
भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। दोनों देश एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं और कई क्षेत्रों में आर्थिक संबंध लगातार बढ़े हैं। इसके बावजूद कुछ मुद्दों पर दोनों पक्षों के हित अलग रहे हैं। शुल्क और व्यापार नीतियों को लेकर मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इन मतभेदों के बीच दोनों सरकारें व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखने के लिए संवाद जारी रखे हुए हैं।
अमेरिका की ओर से प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों को महत्व दिए जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क को द्विपक्षीय रिश्तों के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाता है। हालाँकि,भारत-अमेरिका संबंध केवल दो नेताओं के व्यक्तिगत समीकरण पर निर्भर नहीं हैं। पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच संस्थागत स्तर पर भी रक्षा, व्यापार, तकनीक और कूटनीति से जुड़े व्यापक तंत्र विकसित हुए हैं।
व्हाइट हाउस का ताजा बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका अपने संबंधों को बदलती वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के सामने व्यापार से जुड़े मतभेदों के साथ-साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े कई साझा मुद्दे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को लगातार बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर,व्हाइट हाउस द्वारा भारत को अमेरिका के सबसे मजबूत सहयोगियों में शामिल करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों को रेखांकित करना भारत-अमेरिका साझेदारी के महत्व को दर्शाता है। आने वाले समय में व्यापार और अन्य नीतिगत मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने के साथ दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाना संबंधों की दिशा तय करने में अहम रहेगा।
