ओमान के तट के पास तेल टैंकर पर ड्रोन हमला (तस्वीर क्रेडिट@DeshbandhuMp)

ओमान के तट के पास तेल टैंकर पर ड्रोन हमला,दो भारतीय नाविक लापता; नौ को सुरक्षित बचाया गया

नई दिल्ली,12 अक्टूबर (युआईटीवी)- होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर एक और गंभीर घटना सामने आई है। ओमान के तट के नजदीक एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर ड्रोन से हमला किए जाने की खबर है। इस घटना के बाद जहाज पर सवार दो भारतीय नाविक लापता हो गए हैं,जबकि नौ अन्य भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। लापता नाविकों की तलाश के लिए स्थानीय तटरक्षक बल ने खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। भारतीय अधिकारी भी इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक,यह घटना रविवार, 11 अक्टूबर को उत्तरी ओमान में सोहर बंदरगाह के नजदीक हुई। निकारागुआ के झंडे वाला तेल टैंकर एमटी पेट्रो डॉल्फिन लंगर डालने के क्षेत्र में खड़ा था,तभी उसे ड्रोन से निशाना बनाया गया। हमले के बाद जहाज पर मौजूद दो भारतीय नाविकों का पता नहीं चल सका। हालाँकि,घटना में जहाज को कितना नुकसान हुआ और हमला किसने किया,इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता लापता नाविकों का पता लगाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यह घटना ऐसे समय हुई है,जब खाड़ी क्षेत्र में समुद्री परिवहन और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहाँ बढ़ती सैन्य गतिविधियों और व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों का असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री कारोबार पर पड़ सकता है।

केंद्रीय बंदरगाह,पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन हमले के बाद नौ भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है,जबकि दो अन्य भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार,लापता नाविकों का पता लगाने के लिए स्थानीय तटरक्षक बल की ओर से खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। भारतीय अधिकारी भी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहे हैं,ताकि तलाश अभियान को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है और नाविकों की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

समुद्र में किसी जहाज पर हमला होने के बाद लापता लोगों की तलाश चुनौतीपूर्ण हो सकती है। समुद्री परिस्थितियों,घटनास्थल की स्थिति और उपलब्ध बचाव संसाधनों के आधार पर अभियान की दिशा तय की जाती है। ऐसे में स्थानीय तटरक्षक बल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। भारतीय अधिकारियों के समन्वय से बचाव अभियान में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल दोनों लापता भारतीय नाविकों की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उनके बारे में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले बचाव दलों की तलाश और जाँच से मिलने वाली जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

ओमान की राजधानी मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने भी तेल टैंकर पर हुए हमले और दो भारतीय नाविकों के लापता होने की जानकारी दी है। दूतावास ने बताया कि वह घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहा है और इस मामले में स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है।

दूतावास की ओर से लापता नाविकों के बारे में जानकारी जुटाने तथा संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। विदेश में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस समय सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

भारतीय नाविक बड़ी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं। ऐसे में समुद्री मार्गों पर होने वाली किसी भी सुरक्षा संबंधी घटना का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ सकता है। तेल टैंकरों और अन्य वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ नाविकों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके परिवारों के लिए भी चिंता का कारण बनती हैं।

इस मामले में नौ भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया जाना राहत की बात है, लेकिन दो लोगों के लापता होने से चिंता बनी हुई है। भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारियों की ओर से आगे की जानकारी जुटाने तथा बचाव अभियान में सहयोग देने के प्रयास जारी हैं।

ओमान के तट के पास एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर हुआ हमला इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों से जुड़ी सुरक्षा घटनाओं की कड़ी में एक और मामला है। इससे पहले रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी वाल्थेरा पर भी एक प्रक्षेपास्त्र से हमला किए जाने की खबर सामने आई थी। हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी। हालाँकि,उस जहाज पर मौजूद भारतीय चालक दल के सदस्यों के सुरक्षित होने की जानकारी दी गई थी।

इससे पहले पिछले सप्ताह ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे पनामा के झंडे वाले एक अन्य जहाज को भी प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाया गया था। उस घटना पर भारत के विदेश मंत्रालय ने चिंता जताई थी और समुद्री जहाजों पर हमले रोकने की मांग की थी।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले जहाज अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि इस मार्ग पर सुरक्षा जोखिम बढ़ते हैं,तो जहाजों के संचालन,बीमा लागत और माल की समय पर आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

व्यापारिक जहाजों पर हमलों का प्रभाव केवल संबंधित जहाज या उसके चालक दल तक सीमित नहीं रहता। समुद्री मार्गों पर असुरक्षा बढ़ने से अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में अनिश्चितता पैदा हो सकती है। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्गों पर किसी भी तरह की बाधा का असर कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका रहती है।

खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई है,जब अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू होने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है। इस संघर्ष का प्रभाव सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ समुद्री परिवहन और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर भी दिखाई दे रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए यहाँ होने वाली किसी भी सैन्य घटना या जहाजों की आवाजाही में बाधा का प्रभाव अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच सकता है।

इस मार्ग के आसपास तनाव बढ़ने से जहाजों के संचालकों,समुद्री परिवहन कंपनियों और नाविकों के सामने सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ पैदा होती हैं। जहाजों को संभावित खतरों का आकलन करना पड़ता है और चालक दल की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

हालाँकि,एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर हुए ताजा हमले के पीछे किसका हाथ है,इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इस घटना को किसी विशेष देश या संगठन से जोड़ने से पहले जाँच के नतीजों का इंतजार करना आवश्यक है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार,जहाज पर ड्रोन हमला हुआ और इसके बाद दो भारतीय नाविक लापता हो गए।

समुद्री परिवहन क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की बड़ी भागीदारी के कारण खाड़ी क्षेत्र में होने वाली घटनाएँ भारत के लिए विशेष महत्व रखती हैं। शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के 3.20 लाख से अधिक सक्रिय नाविक थे। इनमें से कई अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर चलने वाले व्यापारिक जहाजों पर अपनी सेवाएं देते हैं।

ऐसे में समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है। किसी जहाज पर हमला होने की स्थिति में नाविकों को सुरक्षित निकालना, लापता लोगों की तलाश करना और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुँचाना महत्वपूर्ण हो जाता है।

भारत ने पहले भी व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की है। सरकार की ओर से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए हमलों को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार की निर्बाध आवाजाही के लिए यह जरूरी है कि वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल को सैन्य तनाव से सुरक्षित रखा जाए।

एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर हुए हमले के मामले में अब सभी की नजरें बचाव अभियान पर टिकी हैं। स्थानीय तटरक्षक बल लापता दोनों भारतीय नाविकों की तलाश कर रहा है, जबकि भारतीय अधिकारी और मस्कट स्थित दूतावास संबंधित एजेंसियों के संपर्क में हैं। नौ नाविकों को सुरक्षित निकाले जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि तलाश अभियान से दोनों लापता लोगों के बारे में जल्द जानकारी मिल सकेगी।

फिलहाल,हमले के कारणों,जहाज को हुए नुकसान और लापता नाविकों की स्थिति के संबंध में अधिकृत जानकारी का इंतजार है। इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय संघर्ष का असर समुद्र में काम करने वाले निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में लापता भारतीय नाविकों की सुरक्षित बरामदगी के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।