अभिजीत दिपके (तस्वीर क्रेडिट@Nargis_Bano78)

अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप,हिरासत का पूरा वीडियो जारी करने की माँग

हिंगोली,12 अक्टूबर (युआईटीवी)- सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए हिरासत के दौरान अपने बुनियादी और कानूनी अधिकारों से वंचित किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस से संबंधित घटनाक्रम का पूरा और बिना संपादन वाला वीडियो सार्वजनिक करने की माँग की है। दिपके का कहना है कि पुलिस की ओर से जारी वीडियो में पूरी घटना सामने नहीं आई है। उनके अनुसार,यदि पूरा वीडियो सार्वजनिक किया जाता है,तो लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि हिरासत के दौरान क्या हुआ और उन्होंने पुलिस से क्या अनुरोध किए थे।

दिपके ने आरोप लगाया कि हिरासत में रहने के दौरान उन्होंने बार-बार अपने चचेरे भाई से बात करने, कुछ समय के लिए अपना मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति माँगी थी। उनका दावा है कि इन अनुरोधों के बावजूद उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई और उसके बाद जारी किए गए वीडियो पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के चुनिंदा हिस्से दिखाने के बजाय पूरा घटनाक्रम सामने रखा जाना चाहिए,ताकि जनता स्वयं स्थिति को समझ सके।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिपके ने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस को अपनी कार्रवाई पर भरोसा है,तो उसे पूरा वीडियो जारी करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अभी तक सामने आया वीडियो संपादित है और उससे घटना की संपूर्ण तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। दिपके के मुताबिक,पूरी रिकॉर्डिंग सामने आने से यह पता चल सकेगा कि उन्होंने अपने अधिकारों को लेकर पुलिस से क्या कहा था और उस समय अधिकारियों का व्यवहार कैसा था।

उन्होंने पुलिस से सवाल किया कि यदि वीडियो घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकता है,तो उसे पूरी तरह सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है। दिपके का कहना है कि किसी भी कार्रवाई का आकलन अधूरी रिकॉर्डिंग के आधार पर करने के बजाय सभी उपलब्ध तथ्यों को सामने रखकर किया जाना चाहिए। हालाँकि,वीडियो को लेकर उनके आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अभिजीत दिपके ने हिरासत के दौरान कानूनी सहायता प्राप्त करने के अधिकार का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि उन्होंने अपने वकील से बात करने की अनुमति माँगी,लेकिन उन्हें ऐसा करने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने की स्थिति में कानूनी सहायता तक उसकी पहुँच महत्वपूर्ण होती है और संबंधित अधिकारियों को इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।

दिपके ने यह भी दावा किया कि उनके माता-पिता और वकीलों को इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें कहाँ रखा गया है और किस पुलिस थाने में ले जाया गया है। उनके अनुसार,एक तरफ पुलिस उनसे परिवार के सदस्यों से संपर्क करने के लिए कह रही थी,वहीं दूसरी ओर उनके परिजनों को उनकी हिरासत के स्थान के बारे में जानकारी नहीं मिल रही थी। उन्होंने इस स्थिति को विरोधाभासी बताते हुए पुलिस से जवाब माँगा है।

उनका कहना है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति और उसके परिवार के बीच संवाद की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। परिवार को यह पता होना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति कहाँ है और उससे संपर्क करने की प्रक्रिया क्या है। दिपके ने आरोप लगाया कि उनके मामले में इस तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई,जिससे उन्हें और उनके परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा।

हालाँकि,इस संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिरासत के दौरान संपर्क की अनुमति,वकील तक पहुँच और परिवार को सूचना देने के मामले में वास्तव में क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।

दिपके ने पुलिस की कार्रवाई के समय और परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार,पुलिसकर्मी सुबह करीब साढ़े तीन बजे गिरफ्तारी से संबंधित कागजात लेकर उनके पास पहुँचे थे। उन्होंने कहा कि उस समय उनका परिवार पहले से ही एक कठिन दौर से गुजर रहा था,क्योंकि उनकी दादी का निधन हो चुका था और परिजन शोक में थे।

दिपके ने आरोप लगाया कि पुलिस को उनके परिवार की परिस्थितियों की जानकारी थी। इसके बावजूद उनसे अपने माता-पिता को फोन करने के लिए कहा गया। उन्होंने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवार पहले ही एक गहरे दुख से गुजर रहा था और ऐसे समय में माता-पिता को अपनी गिरफ्तारी की जानकारी देना उनके लिए बेहद कठिन था।

उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी परिस्थिति में अपने माता-पिता को यह बताना उचित होता कि उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है और उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है। दिपके के अनुसार,परिवार के सदस्य पहले ही एक निजी दुख का सामना कर रहे थे, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पुलिस उनसे माता-पिता से बात करने के लिए कह रही थी,तो उनके परिवार को उनकी हिरासत के स्थान की जानकारी क्यों नहीं दी गई। दिपके का दावा है कि परिजनों को यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें किस थाने में रखा गया है या आगे उन्हें कहाँ ले जाया जा सकता है। उन्होंने इस अनुभव को अपने और अपने परिवार के लिए मानसिक प्रताड़ना बताया।

दिपके की ओर से लगाए गए इन आरोपों के केंद्र में गिरफ्तारी की परिस्थितियाँ,परिवार को सूचना देने की प्रक्रिया और कानूनी सहायता तक पहुँच जैसे मुद्दे हैं। इन सभी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस का पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई में महिला पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आशंका जताई कि पुरुष पुलिस अधिकारियों पर छेड़छाड़ से संबंधित आरोपों की संभावना के कारण पुलिस को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा होगा। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या इसी वजह से महिला अधिकारियों को आगे किया गया या उनकी मौजूदगी का इस्तेमाल कार्रवाई का बचाव करने के लिए किया गया।

दिपके ने कहा कि पुलिस को इस संबंध में स्पष्ट करना चाहिए कि महिला अधिकारियों को आगे लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। हालाँकि,उनकी ओर से व्यक्त की गई यह आशंका फिलहाल एक आरोप है और इसके समर्थन में स्वतंत्र रूप से पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस पहलू पर किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले संबंधित तथ्यों और पुलिस के स्पष्टीकरण को देखना जरूरी होगा।

उन्होंने महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की बात करते हुए अपने और अपने सहयोगियों के आचरण का भी उल्लेख किया। दिपके ने कहा कि वह और उनके साथी शिक्षित तथा सभ्य लोग हैं और महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आना जानते हैं। उनके अनुसार,किसी भी कार्रवाई के दौरान सभी पक्षों के साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए।

इस बयान के जरिए दिपके ने पुलिस की कार्रवाई में महिला अधिकारियों की भूमिका और उसके पीछे के संभावित कारणों पर सवाल उठाए हैं। हालाँकि,इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है,ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अधिकारियों की तैनाती किन परिस्थितियों और प्रक्रियाओं के तहत की गई थी।

अभिजीत दिपके की माँग है कि दिल्ली पुलिस संबंधित घटना का पूरा वीडियो सार्वजनिक करे और हिरासत के दौरान उनके साथ हुए व्यवहार पर उठाए गए सवालों का जवाब दे। उन्होंने विशेष रूप से अपने चचेरे भाई से बात करने,मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और वकील से संपर्क करने की अनुमति से जुड़े मुद्दों को सामने रखा है। इसके अलावा,उन्होंने परिवार को हिरासत के स्थान की जानकारी नहीं दिए जाने के आरोप को भी गंभीर बताया है।

इस मामले में अब मुख्य सवाल यह है कि क्या पुलिस पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध कराएगी और हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी देगी। यदि पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक होती है,तो उससे संबंधित परिस्थितियों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। साथ ही,परिवार और वकील को सूचना देने तथा कानूनी सहायता तक पहुँच से जुड़े आरोपों पर भी स्पष्टता आवश्यक होगी।

फिलहाल,इस पूरे मामले में अभिजीत दिपके के आरोप सामने आए हैं,लेकिन दिल्ली पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। इसलिए घटनाक्रम से जुड़े निष्कर्षों पर पहुँचने के लिए सभी संबंधित पक्षों की बात,उपलब्ध रिकॉर्ड और आवश्यक तथ्यों का परीक्षण जरूरी होगा।