वॉशिंगटन,13 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले महीने अपने एशिया दौरे के दौरान वह उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन से मुलाकात कर सकते हैं। दोनों नेताओं के बीच संभावित बैठक को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हालाँकि,ट्रंप ने अभी तक इस मुलाकात की तारीख, स्थान या एजेंडे के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। न ही अमेरिका और उत्तर कोरिया की सरकारों की ओर से किसी आधिकारिक बैठक की पुष्टि की गई है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह अपनी आगामी एशिया यात्रा के दौरान किम जोंग-उन से मिलने की योजना बना रहे हैं। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “हाँ, हो सकता है।” ट्रंप के इस बयान से दोनों नेताओं के बीच संभावित मुलाकात की अटकलें फिर बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि यदि यह बैठक होती है,तो इससे लंबे समय से ठप पड़ी अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच उच्चस्तरीय बातचीत को दोबारा शुरू करने का अवसर मिल सकता है।
ट्रंप का आगामी एशिया दौरा क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वह 16 नवंबर को फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित होने वाले आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके बाद वह चीन के शेनझेन जाएँगे,जहाँ 17 से 19 नवंबर तक एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग यानी एपेक शिखर सम्मेलन आयोजित होना है।
इस यात्रा के दौरान ट्रंप की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात होने की उम्मीद है। इस साल दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बैठक हो सकती है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार,आर्थिक सहयोग तथा क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे पहले से ही अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं। ऐसे में ट्रंप की यह यात्रा एशिया में अमेरिकी कूटनीतिक गतिविधियों के लिहाज से अहम हो सकती है।
शेनझेन में होने वाला एपेक सम्मेलन संभावित रूप से ट्रंप और किम जोंग-उन की मुलाकात के लिए भी चर्चा में है। हालाँकि,अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उत्तर कोरिया के नेता इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे या नहीं। दोनों देशों के बीच किसी बैठक की औपचारिक घोषणा नहीं होने के कारण इसके कार्यक्रम और संभावित परिणामों को लेकर फिलहाल निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।
डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कई मौकों पर किम जोंग-उन से मुलाकात करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। अगस्त में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इस साल के अंत तक उनकी उत्तर कोरिया के नेता के साथ बैठक हो सकती है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह 2026 में किम से मिलेंगे,तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था, “हाँ, बिल्कुल मिलूँगा।”
इससे पहले अगस्त में आई एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया था कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से किम जोंग-उन के साथ जल्द से जल्द बैठक आयोजित करने की संभावनाएं तलाशने को कहा था। रिपोर्ट के अनुसार,अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते थे कि यदि संभव हो तो यह मुलाकात शरद ऋतु के दौरान ही हो जाए। इसमें चीन के शेनझेन में आयोजित होने वाले एपेक सम्मेलन को संभावित बैठक स्थल के रूप में भी देखा गया था।
हालाँकि,इन चर्चाओं के बावजूद अब तक कोई औपचारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है। उत्तर कोरिया की ओर से भी ट्रंप के ताजा बयान पर किसी संभावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के अधिकारी इस दिशा में कोई ठोस पहल करते हैं या नहीं।
डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग-उन के बीच पहले भी कई ऐतिहासिक मुलाकातें हो चुकी हैं। ट्रंप अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया के नेता से तीन बार मिले थे। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु तनाव कम करना और दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खोलना था।
जून 2018 में सिंगापुर में दोनों नेताओं की पहली शिखर वार्ता हुई थी। इस बैठक के साथ ट्रंप उत्तर कोरिया के किसी मौजूदा नेता से मुलाकात करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई थी। उस समय इस मुलाकात को अमेरिका और उत्तर कोरिया के संबंधों में संभावित बदलाव के रूप में देखा गया था।
हालाँकि,इस बैठक के बाद परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे। उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम,प्रतिबंधों में राहत और सुरक्षा संबंधी आश्वासनों जैसे मुद्दों पर दोनों पक्ष किसी व्यापक समझौते तक नहीं पहुंच सके।
फरवरी 2019 में ट्रंप और किम की दूसरी शिखर वार्ता वियतनाम की राजधानी हनोई में हुई। इस बैठक से दोनों देशों के बीच समझौते की उम्मीद की जा रही थी,लेकिन बातचीत बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई। परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बनने के कारण कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगा।
इसके बाद जून 2019 में ट्रंप ने दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया की सीमा पर स्थित पनमुनजोम के असैन्य क्षेत्र का दौरा किया। वहाँ उन्होंने उत्तर कोरिया की जमीन पर कदम रखा और किम जोंग-उन से मुलाकात की। ऐसा करने वाले वह पहले पद पर रहते हुए उत्तर कोरिया की धरती पर कदम रखने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति बने। इस मुलाकात ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया,लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया आगे चलकर ठप पड़ गई।
2019 के बाद अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच उच्चस्तरीय वार्ता में कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई। इस दौरान उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का विस्तार जारी रखा। इससे कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बनी रहीं। अमेरिका भी उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती मानता रहा है।
ऐसी स्थिति में ट्रंप और किम जोंग-उन के बीच संभावित बैठक को केवल दो नेताओं की मुलाकात के रूप में नहीं,बल्कि दोनों देशों के संबंधों में आगे की दिशा तय करने वाले अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। हालाँकि,बैठक होने की स्थिति में भी परमाणु निरस्त्रीकरण,प्रतिबंधों में राहत और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।
फिलहाल ट्रंप के बयान ने संभावित वार्ता को लेकर उम्मीदें बढ़ाई हैं,लेकिन किसी ठोस नतीजे तक पहुँचने के लिए दोनों देशों के बीच आधिकारिक संपर्क और तैयारी आवश्यक होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नवंबर में होने वाले एशिया दौरे के दौरान ट्रंप और किम जोंग-उन की मुलाकात वास्तव में हो पाती है या नहीं। यदि ऐसा होता है,तो यह 2019 के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली बैठक होगी और अमेरिका-उत्तर कोरिया संबंधों में नए कूटनीतिक प्रयासों की शुरुआत का अवसर बन सकती है।
