प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

प्रधानमंत्री मोदी बोले- वैश्विक संकटों के बीच भारत अपना रहा अलग रास्ता,तकनीक और सुधारों से मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली,13 अक्टूबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लगातार सामने आ रही वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत अपनी अलग सोच और नीतिगत दिशा के साथ आगे बढ़ रहा है। महामारी, युद्ध, व्यापार में बाधाओं और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं ने अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के सामने नई मुश्किलें खड़ी की हैं। ऐसे माहौल में भारत तकनीक, आर्थिक सुधारों, नवीकरणीय ऊर्जा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के जरिए विकास का एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत कर रहा है, जिससे देश के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों को भी लाभ मिल सकता है।

प्रधानमंत्री मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति, डिजिटल व्यवस्था, ऊर्जा परिवर्तन, वित्तीय मजबूती और सुधारों की प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनके बीच भारत का अनुभव और उसकी पहल महत्वपूर्ण हैं। देश का जोर ऐसी व्यवस्थाएँ बनाने पर है,जो विकास को गति देने के साथ आम नागरिकों के जीवन को भी आसान बनाएँ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इक्कीसवीं सदी का वर्तमान दशक अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियों का साक्षी रहा है। दुनिया ने कोरोना महामारी का सामना किया और इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध तथा संघर्ष की स्थितियाँ पैदा हुईं। व्यापार,महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा की आपूर्ति में भी रुकावटें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एक संकट से उबरने का प्रयास करता है,तभी कोई नई चुनौती खड़ी हो जाती है। इन परिस्थितियों ने देशों के बीच आर्थिक संबंधों और आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि जिन संसाधनों और व्यवस्थाओं ने कभी देशों को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी,उनका इस्तेमाल अब दबाव बनाने के साधन के रूप में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार,आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा, खनिज, भुगतान व्यवस्था और तकनीक जैसे क्षेत्र अब केवल सहयोग और विकास तक सीमित नहीं रह गए हैं,बल्कि कई बार इनका उपयोग दूसरे देशों पर प्रभाव स्थापित करने के लिए भी किया जा रहा है। ऐसे समय में स्थिरता, भरोसे और सहयोग पर आधारित वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में तकनीक के इस्तेमाल को शासन व्यवस्था में बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिसके माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँचाई जा सकती है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिली है। साथ ही,नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना अधिक सुविधाजनक हुआ है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था ने सरकार और आम नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है। सरकारी सहायता के वितरण में तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ाने और योजनाओं का लाभ लक्षित लोगों तक पहुँचाने का अवसर मिला है। भारत में डिजिटल माध्यमों का विस्तार केवल तकनीकी बदलाव नहीं है,बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और नागरिकों का भरोसा मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 75 गीगावाट थी,जो बढ़कर करीब 300 गीगावाट तक पहुँच गई है। इस तरह भारत ने लगभग चार गुना क्षमता जोड़ी है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में हो रहा यह बदलाव पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक अवसरों के नए रास्ते भी खोल रहा है।

नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन,नई तकनीकों और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है। ऊर्जा के स्रोतों में विविधता आने से भविष्य की जरूरतों को पूरा करने और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी सहायता मिलती है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत के ऊर्जा परिवर्तन को देश की विकास यात्रा का अहम हिस्सा बताया।

उन्होंने पर्यावरण और वैश्विक सहयोग से जुड़ी भारत की विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया। इनमें अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन, बिग कैट एलायंस, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा और मिशन लाइफ जैसी पहल शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य ऐसे समाधान विकसित करना है,जिनसे विभिन्न देशों और जीवन के अलग-अलग स्वरूपों को लाभ मिल सके।

भारत की वित्तीय स्थिति पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है। उन्होंने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को भी मजबूत स्थिति में बताया और कहा कि वित्तीय क्षेत्र की मजबूती का सकारात्मक प्रभाव देश की साख पर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार,भारत की सॉवरेन रेटिंग में हो रहे सुधार इस बात का संकेत हैं कि देश की आर्थिक स्थिति और नीतिगत दिशा को लेकर भरोसा बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का आत्मविश्वास पहले की तुलना में काफी ऊँचे स्तर पर है। सरकार स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ सुधारों को आगे बढ़ा रही है। आर्थिक व्यवस्था को अधिक सरल और प्रभावी बनाने के लिए किए गए बदलावों का उद्देश्य कारोबार,निवेश और विकास के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।

प्रधानमंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से देश की जटिल कर व्यवस्था को एकीकृत राष्ट्रीय बाजार में बदलने की दिशा में काम किया गया है। उन्होंने दिवालियापन कानून को भी आर्थिक सुधारों का अहम हिस्सा बताया। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि पहले मौजूद 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समाहित किया गया है,ताकि श्रम संबंधी नियमों को अधिक व्यवस्थित और सरल बनाया जा सके।

प्रधानमंत्री के अनुसार, कारोबार से जुड़ी सैकड़ों छोटी प्रक्रियाओं और समस्याओं को आसान बनाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। सरकार की सुधार प्रक्रिया केवल कुछ बड़े फैसलों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें लगातार बदलाव और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के लिए सुधार केवल परिस्थितियों के कारण उठाया गया कदम नहीं,बल्कि एक दीर्घकालिक संकल्प है। सरकार का उद्देश्य नीतियों और प्रक्रियाओं को इस तरह विकसित करना है,जिससे देश की आर्थिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सके और विकास की रफ्तार बनी रहे।

प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत तकनीक,आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा परिवर्तन और नीतिगत सुधारों के सहारे अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। उन्होंने सहयोग और विकास को प्राथमिकता देने वाली पहलों पर जोर देते हुए कहा कि भारत की कोशिश ऐसे रास्ते पर आगे बढ़ने की है,जो केवल देश की प्रगति तक सीमित न रहे,बल्कि व्यापक वैश्विक हितों में भी योगदान दे।