वैभव सूर्यवंशी और गौतम गंभीर (तस्वीर क्रेडिट@TredaWala970)

वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया में मौका नहीं मिलने की क्या है वजह? पूर्व कोच आर. श्रीधर ने फील्डिंग पर उठाए सवाल

नई दिल्ली,13 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी इन दिनों वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज में खेलने के मौके का इंतजार कर रहे हैं। महज 15 साल की उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले इस बाएं हाथ के बल्लेबाज को सीरीज के शुरुआती तीन मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली है। ऐसे में उनके प्रशंसक मैदान पर उनके चौके-छक्के देखने के लिए इंतजार कर रहे हैं। इस बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर ने वैभव को लेकर अहम बात कही है। उनका मानना है कि युवा बल्लेबाज को टीम में नियमित अवसर मिलने की राह में उसकी फील्डिंग भी एक वजह हो सकती है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि टीम प्रबंधन ने वैभव को बाहर रखने के पीछे आधिकारिक तौर पर यही कारण बताया है।

आर. श्रीधर के अनुसार, वैभव अभी केवल 15 साल के हैं और इस उम्र में उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है। उनके खेल को बेहतर बनाने के लिए एक व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए,जिसमें बल्लेबाजी के साथ फील्डिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। श्रीधर का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में केवल बल्लेबाजी की प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती,बल्कि खिलाड़ी को मैदान के सभी क्षेत्रों में टीम के लिए योगदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए।

पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर ने वैभव सूर्यवंशी की उम्र और उनके विकास की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि 15 साल के खिलाड़ी को कई बार नियमित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। भले ही वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर के माहौल में खेल रहा हो,लेकिन उसे अभ्यास,फिटनेस और मैच की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना सिखाना जरूरी है।

श्रीधर के मुताबिक,वैभव के लिए ऐसा कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें वह अभ्यास सत्रों के दौरान पर्याप्त समय फील्डिंग की तैयारी में लगाए। उनके अनुसार,यदि इतनी कम उम्र में किसी खिलाड़ी को मैदान पर फील्डिंग के दौरान बार-बार स्थानापन्न करना पड़ता है,तो इस पहलू पर ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि वैभव अभी बच्चा है और उसके प्रशिक्षण की जिम्मेदारी किसी को गंभीरता से लेनी होगी। उसे यह समझाना जरूरी है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बल्लेबाजी के साथ फील्डिंग भी कितनी महत्वपूर्ण है। श्रीधर का मानना है कि वैभव को नियमित अभ्यास और सही योजना के जरिए इस क्षेत्र में बेहतर बनाया जा सकता है।

उनकी इस टिप्पणी के बाद वैभव की फील्डिंग चर्चा का विषय बन गई है। हालाँकि,यह ध्यान रखना जरूरी है कि श्रीधर ने अपनी राय और आकलन पेश किया है। भारतीय टीम प्रबंधन ने वैभव को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने की वजह के रूप में फील्डिंग को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है। किसी खिलाड़ी के चयन में टीम संयोजन, मौजूदा फॉर्म और मैच की परिस्थितियाँ भी भूमिका निभा सकती हैं।

आर. श्रीधर ने कहा कि वैभव को आने वाले वर्षों में एक अच्छे फील्डर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक,जब तक वैभव 18 या 19 साल के होंगे,तब तक उन्हें फील्डिंग के क्षेत्र में काफी सुधार कर लेना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि कोई उनकी प्रगति पर लगातार नजर रखे और रोजाना अभ्यास की आदत विकसित कराए।

श्रीधर ने यह भी कहा कि वैभव थोड़ी-बहुत स्पिन गेंदबाजी कर सकते हैं,लेकिन फिलहाल उनका मुख्य ध्यान फील्डिंग में सुधार पर होना चाहिए। उनके विचार में खिलाड़ी के कौशल का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए,ताकि वह अपनी उम्र के अनुरूप आगे बढ़ते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की अपेक्षाओं पर खरा उतर सके।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों से तेज प्रतिक्रिया, सटीक थ्रो, कैच पकड़ने की क्षमता और मैदान पर लगातार सक्रिय रहने की उम्मीद की जाती है। टी20 प्रारूप में ये पहलू और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं,क्योंकि कम समय में मैच का परिणाम बदल सकता है। एक अतिरिक्त रन रोकना,मुश्किल कैच लेना या तेजी से गेंद उठाकर सही निशाने पर फेंकना मुकाबले में निर्णायक साबित हो सकता है।

इसी कारण श्रीधर का मानना है कि वैभव की बल्लेबाजी की प्रतिभा के साथ उनकी फील्डिंग पर भी बराबर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक,सही प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास से युवा खिलाड़ी इस क्षेत्र में सुधार कर सकता है।

भारत और वेस्टइंडीज के बीच पाँच मैचों की टी20 सीरीज खेली जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार,शुरुआती तीन मुकाबलों के बाद भारतीय टीम सीरीज में 2-1 से आगे थी। सीरीज का चौथा मैच 14 अक्टूबर को रायपुर में शाम सात बजे से निर्धारित था। इस मुकाबले से पहले वैभव को प्लेइंग इलेवन में जगह मिलने को लेकर चर्चा तेज हो गई।

वैभव टीम के साथ होने के बावजूद मैदान पर खेलने का अवसर हासिल नहीं कर पाए हैं। मैचों के दौरान वह बेंच पर बैठे नजर आए और कभी-कभी मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों के लिए पानी ले जाते भी दिखाई दिए। इससे उनके प्रशंसकों में यह सवाल उठ रहा है कि टीम प्रबंधन उन्हें कब मौका देगा।

वैभव ने भारतीय टीम के लिए पिछला मुकाबला एशियन गेम्स 2026 में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। उसके बाद से उन्हें खेलने का अवसर नहीं मिला है। लगातार बाहर रहने के कारण उनके अंतर्राष्ट्रीय अनुभव में फिलहाल अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। हालाँकि,टीम में चयनित होने और प्लेइंग इलेवन में जगह मिलने के बीच अंतर होता है। अंतिम संयोजन तय करते समय कप्तान और टीम प्रबंधन को कई पहलुओं पर विचार करना पड़ता है।

वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें आगामी मैचों में मौका मिल सकता है। दूसरी ओर, टीम प्रबंधन के सामने सीरीज के बाकी मुकाबलों में जीत की लय बनाए रखने के साथ खिलाड़ियों को आजमाने का सवाल भी है।

वैभव सूर्यवंशी ने वर्ष 2026 में भारतीय टीम के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। कम उम्र में राष्ट्रीय टीम तक पहुँचना उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार,जुलाई से अब तक वह भारत के लिए आठ टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं। इन आठ मैचों की आठ पारियों में उन्होंने दो अर्धशतकों की मदद से कुल 246 रन बनाए हैं।

उनके खाते में 22 चौके और 18 छक्के दर्ज हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 30.75 और स्ट्राइक रेट 186.32 रहा है। ये आँकड़े बताते हैं कि वैभव कम समय में तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। टी20 क्रिकेट में उनका आक्रामक अंदाज टीम को तेज शुरुआत दिलाने या रन गति बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकता है।

हालाँकि,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय तक सफल बने रहने के लिए बल्लेबाजी के आँकड़ों के साथ दूसरे कौशलों पर भी काम करना जरूरी होता है। खिलाड़ियों को फिटनेस, फील्डिंग,मैच की समझ और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी पड़ती है। वैभव अभी करियर के शुरुआती चरण में हैं,इसलिए उनके पास इन क्षेत्रों में सुधार करने के लिए पर्याप्त समय है।

वैभव सूर्यवंशी के मामले में चर्चा केवल उन्हें अगले मैच में मौका देने तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि इतनी कम उम्र में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पहुँचने वाले खिलाड़ी को किस तरह तैयार किया जाए,ताकि वह लंबे समय तक भारतीय टीम का हिस्सा बन सके।

आर. श्रीधर की राय है कि वैभव के प्रशिक्षण में फील्डिंग को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार,नियमित अभ्यास और व्यक्तिगत मार्गदर्शन से इस क्षेत्र में सुधार किया जा सकता है। वहीं,वैभव की बल्लेबाजी की क्षमता पहले ही क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींच चुकी है। अब उनके खेल के अन्य पहलुओं को मजबूत करना उनके समग्र विकास के लिए उपयोगी हो सकता है।

फिलहाल,वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में वैभव को मौका मिलेगा या नहीं,इस पर अंतिम निर्णय टीम प्रबंधन को लेना है। श्रीधर की टिप्पणी ने युवा बल्लेबाज की फील्डिंग और प्रशिक्षण को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वैभव अपनी बल्लेबाजी के साथ फील्डिंग में कितना सुधार करते हैं और भारतीय टीम में नियमित जगह बनाने के लिए किस तरह आगे बढ़ते हैं।

वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारत का टी20 स्क्वाड

श्रेयस अय्यर (कप्तान),तिलक वर्मा (उपकप्तान),ईशान किशन (विकेटकीपर),संजू सैमसन (विकेटकीपर),अभिषेक शर्मा,वैभव सूर्यवंशी,शिवम दुबे,अक्षर पटेल, कुलदीप यादव,वॉशिंगटन सुंदर,रवि बिश्नोई,अर्शदीप सिंह,नीतीश कुमार रेड्डी,प्रिंस यादव, मयंक यादव।