मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी

मुकेश अंबानी फिर बने भारत के सबसे अमीर व्यक्ति,गौतम अडाणी को पछाड़ा; एशिया में झांग यिमिंग सबसे आगे

नई दिल्ली,13 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बनने की दौड़ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने एक बार फिर गौतम अडाणी को पीछे छोड़ दिया है। फोर्ब्स की रियल टाइम अरबपतियों की सूची के अनुसार,मुकेश अंबानी की अनुमानित कुल संपत्ति 78.8 अरब डॉलर हो गई है। इसके साथ ही उन्होंने भारत के सबसे अमीर उद्योगपति का स्थान हासिल कर लिया है। दूसरी ओर,अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी 74.9 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ देश के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। दोनों उद्योगपतियों की संपत्ति में अंतर दिखाता है कि भारत के शीर्ष कारोबारियों के बीच पहले स्थान को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बनी हुई है।

हालाँकि,भारत में सबसे अमीर व्यक्ति बनने के मामले में आगे रहने वाले मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति नहीं हैं। इस क्षेत्र में चीन की प्रौद्योगिकी कंपनी बाइटडांस के संस्थापक झांग यिमिंग ने दोनों भारतीय उद्योगपतियों को पीछे छोड़ रखा है। उनकी अनुमानित संपत्ति 84 अरब डॉलर बताई गई है। बाइटडांस दुनिया भर में लोकप्रिय वीडियो मंच टिकटॉक की मूल कंपनी है। इस तरह एशिया के अरबपतियों की सूची में झांग पहले स्थान पर हैं,जबकि मुकेश अंबानी दूसरे और गौतम अडाणी तीसरे स्थान पर हैं।

फोर्ब्स की इस सूची में अरबपतियों की संपत्ति का आकलन कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी, शेयर बाजार में होने वाले बदलाव और उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के आधार पर किया जाता है। चूँकि,इन कारोबारियों की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा कंपनियों के शेयरों से जुड़ा होता है,इसलिए बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ उनकी नेटवर्थ और रैंकिंग में भी बदलाव आता रहता है।

फोर्ब्स की रियल टाइम सूची में मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी के बाद भारत के सबसे अमीर लोगों में सावित्री जिंदल का नाम आता है। उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 36.6 अरब डॉलर है। वैश्विक अरबपतियों की सूची में वह 64वें स्थान पर बताई गई हैं। उद्योग जगत में जिंदल परिवार की कारोबारी हिस्सेदारी के कारण सावित्री जिंदल देश के प्रमुख धनाढ्य व्यक्तियों में शामिल हैं।

भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में चौथे स्थान पर लक्ष्मी मित्तल हैं। उनकी कुल संपत्ति 30.6 अरब डॉलर आंकी गई है। इस्पात उद्योग में उनकी कारोबारी गतिविधियों ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख उद्योगपति के रूप में पहचान दिलाई है। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनी एचसीएल के संस्थापक शिव नादर 27.4 अरब डॉलर की अनुमानित संपत्ति के साथ पाँचवें स्थान पर हैं।

इन आँकड़ों से पता चलता है कि भारत के सबसे धनी व्यक्तियों की सूची में अलग-अलग उद्योगों से जुड़े कारोबारी शामिल हैं। ऊर्जा, दूरसंचार, बुनियादी ढाँचे,इस्पात और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में कारोबार करने वाले उद्योगपतियों की संपत्ति का मूल्य उनकी कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार में निवेशकों के भरोसे से प्रभावित होता है।

मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी के बीच संपत्ति का अंतर भी शेयर बाजार की चाल के साथ बदल सकता है। दोनों कारोबारी समूहों का कारोबार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, खुदरा कारोबार और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। वहीं, अडाणी समूह का कारोबार बंदरगाह, हवाई अड्डे, ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और अन्य संबंधित क्षेत्रों तक फैला हुआ है। इन कंपनियों के शेयरों में होने वाली तेजी या गिरावट का असर संबंधित उद्योगपतियों की अनुमानित संपत्ति पर पड़ सकता है।

वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की सूची में एलन मस्क पहले स्थान पर बने हुए हैं। दिए गए आँकड़ों के अनुसार,उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 1.007 ट्रिलियन डॉलर है। इस आँकड़े के मुताबिक,उनकी संपत्ति एक ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर चुकी है। मुकेश अंबानी वैश्विक अरबपतियों की सूची में 25वें स्थान पर हैं,जबकि गौतम अडाणी उनसे नीचे हैं।

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए केवल किसी एक कंपनी का बड़ा कारोबारी होना पर्याप्त नहीं है। उनकी संपत्ति का आकलन करते समय कंपनियों में हिस्सेदारी, अन्य निवेश, निजी संपत्तियों और उपलब्ध वित्तीय जानकारियों को भी ध्यान में रखा जाता है। इस कारण अलग-अलग कारोबारियों की संपत्ति में अंतर उनकी कंपनियों के बाजार मूल्य और हिस्सेदारी के आकार से जुड़ा होता है।

मुकेश अंबानी का भारत में पहले स्थान पर आना और एशिया में झांग यिमिंग का उनसे आगे रहना वैश्विक कारोबार की बदलती तस्वीर को भी सामने लाता है। भारत में अंबानी और अडाणी के बीच संपत्ति को लेकर मुकाबला जारी है,जबकि एशिया की व्यापक सूची में चीन के प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े उद्यमी ने दोनों को पीछे छोड़ दिया है।

झांग यिमिंग की संपत्ति का बड़ा संबंध बाइटडांस से है। टिकटॉक की वैश्विक लोकप्रियता ने इस कंपनी को डिजिटल मनोरंजन और सोशल मीडिया उद्योग में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। डिजिटल मंचों के विस्तार और प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन में होने वाले बदलावों का असर इस क्षेत्र के संस्थापकों की संपत्ति पर भी पड़ सकता है। हालाँकि, किसी कारोबारी की अनुमानित नेटवर्थ को सीधे उसकी नकदी या बैंक खाते में मौजूद रकम के बराबर नहीं माना जा सकता।

अरबपतियों की संपत्ति में होने वाले बदलाव को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि उनकी कुल नेटवर्थ का बड़ा हिस्सा अक्सर कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी से बनता है। जब किसी कंपनी के शेयरों का बाजार मूल्य बढ़ता है,तो उसमें हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्ति की संपत्ति का अनुमानित मूल्य भी बढ़ जाता है। इसके विपरीत,शेयरों की कीमत गिरने पर उस हिस्सेदारी का मूल्य कम हो सकता है।

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि किसी कारोबारी के पास किसी कंपनी के 10 करोड़ शेयर हैं और हर शेयर का बाजार मूल्य 1,000 रुपये है। इस स्थिति में उसकी हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य 10,000 करोड़ रुपये होगा। यदि शेयर का भाव बढ़कर 1,100 रुपये हो जाता है,तो उसी हिस्सेदारी का मूल्य 11,000 करोड़ रुपये पहुँच जाएगा। यानी शेयर की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से हिस्सेदारी के मूल्य में 1,000 करोड़ रुपये का इजाफा हो जाएगा।

यह बढ़ोतरी कारोबारी के बैंक खाते में नकदी जमा होने के कारण नहीं होती,बल्कि उसके पास मौजूद शेयरों के बाजार मूल्य में बदलाव की वजह से होती है। यदि वह अपने शेयर बेचता है,तो बिक्री से मिलने वाली रकम अलग-अलग परिस्थितियों,करों और अन्य लागतों से प्रभावित हो सकती है। इसलिए अनुमानित संपत्ति और तुरंत उपलब्ध नकदी के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है।

फोर्ब्स की रियल टाइम अरबपतियों की सूची का उद्देश्य दुनिया के प्रमुख धनाढ्य व्यक्तियों की अनुमानित संपत्ति और उनकी रैंकिंग में होने वाले बदलावों को लगातार सामने लाना है। सूची में सार्वजनिक कंपनियों में अरबपतियों की हिस्सेदारी का मूल्य शेयर बाजार के आँकड़ों के आधार पर अपडेट किया जाता है। दिए गए विवरण के अनुसार, बाजार खुला रहने के दौरान सार्वजनिक कंपनियों से जुड़ी हिस्सेदारी के मूल्य का आकलन हर पाँच मिनट में किया जाता है। हालाँकि,शेयरों के भाव से जुड़े आँकड़ों में लगभग 15 मिनट तक की देरी हो सकती है।

इस व्यवस्था के कारण किसी कारोबारी की संपत्ति का अनुमान दिन के दौरान भी बदल सकता है। उदाहरण के लिए,यदि रिलायंस इंडस्ट्रीज या अडाणी समूह की किसी प्रमुख कंपनी के शेयरों में तेजी आती है,तो संबंधित कारोबारी की अनुमानित नेटवर्थ में वृद्धि दर्ज हो सकती है। इसी तरह,शेयरों में गिरावट आने पर संपत्ति का अनुमान घट सकता है। दूसरे उद्योगपतियों की कंपनियों के शेयरों में बड़े बदलाव भी रैंकिंग को प्रभावित कर सकते हैं।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि रियल टाइम सूची में दर्ज संपत्ति के आँकड़े अनुमान होते हैं। अलग-अलग समय पर बाजार की स्थिति बदलने के कारण सूची में दिखाई देने वाले आँकड़े स्थायी नहीं रहते। इसलिए किसी व्यक्ति के पहले या दूसरे स्थान पर पहुँचने को उस समय उपलब्ध वित्तीय अनुमानों के संदर्भ में देखना चाहिए।

मुकेश अंबानी का 78.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ भारत में शीर्ष स्थान पर पहुँचना और गौतम अडाणी का 74.9 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहना दोनों उद्योगपतियों के बीच जारी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। वहीं, सावित्री जिंदल,लक्ष्मी मित्तल और शिव नादर का शीर्ष पाँच में शामिल होना बताता है कि भारत के धनाढ्य कारोबारियों की संपत्ति विभिन्न उद्योगों से जुड़ी हुई है।

एशिया में झांग यिमिंग की 84 अरब डॉलर की अनुमानित संपत्ति उन्हें मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी से आगे रखती है। दूसरी ओर,वैश्विक स्तर पर एलन मस्क शीर्ष स्थान पर हैं। इन रैंकिंग से स्पष्ट होता है कि अरबपतियों की संपत्ति का मूल्यांकन लगातार बदलता रहता है और इसका सीधा संबंध कंपनियों के प्रदर्शन तथा वित्तीय बाजारों से होता है।

फिलहाल,फोर्ब्स की बताई गई रैंकिंग के अनुसार मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति हैं,जबकि गौतम अडाणी दूसरे स्थान पर हैं। एशिया में झांग यिमिंग दोनों से आगे हैं। आने वाले समय में शेयर बाजार की दिशा,कंपनियों के मूल्यांकन और कारोबारी गतिविधियों के आधार पर इन आँकड़ों और स्थानों में बदलाव संभव है।