वाशिंगटन,21 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन देश की सैन्य ताकत को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने के लिए रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि प्रशासन सेना के आधुनिकीकरण,हथियारों के उत्पादन में तेजी लाने और नई सैन्य तकनीकों के विकास के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की माँग कर रहा है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा उपकरणों के निर्माण में घरेलू उद्योग की भूमिका बढ़ाना और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता कम करना है। योजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, मानवरहित हथियार प्रणालियों, उन्नत संचार तकनीक और अंतरिक्ष आधारित सैन्य क्षमताओं को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
ओहियो और विस्कॉन्सिन की यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े कर्मचारियों और निर्माताओं को संबोधित करते हुए हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन अपनी पारंपरिक खरीद व्यवस्था में व्यापक बदलाव कर रहा है। उनका कहना है कि आधुनिक युद्धों की प्रकृति तेजी से बदल रही है और अमेरिका को ऐसी सैन्य क्षमताओं की जरूरत है, जिन्हें विकसित करने और सेना में शामिल करने में वर्षों के बजाय महीनों या कुछ साल का समय लगे। प्रशासन का मानना है कि यदि अमेरिका को भविष्य के संघर्षों में अपनी सैन्य बढ़त बनाए रखनी है, तो उसे हथियारों के उत्पादन,तकनीकी नवाचार और रक्षा विनिर्माण की क्षमता को एक साथ मजबूत करना होगा।
ओहियो के डेटन स्थित सिएरा नेवादा कॉर्पोरेशन में अपने संबोधन के दौरान हेगसेथ ने प्रस्तावित निवेश को आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जोड़कर पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन 1.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की माँग कर रहा है,ताकि अमेरिका दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना के रूप में अपनी स्थिति बनाए रख सके। उनके मुताबिक,यह निवेश केवल मौजूदा हथियार प्रणालियों को बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा,बल्कि भविष्य में इस्तेमाल होने वाली सैन्य तकनीकों और उत्पादन क्षमताओं के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हेगसेथ ने अमेरिकी कांग्रेस से रक्षा क्षेत्र की प्राथमिकताओं के लिए कम से कम 350 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने वाले पैकेज को मंजूरी देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रक्षा निर्माताओं को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए वित्तीय निश्चितता की जरूरत है। यदि कंपनियों को यह भरोसा हो कि आने वाले वर्षों में उनके उत्पादों की माँग बनी रहेगी,तो वे नई फैक्ट्रियां स्थापित करने,आधुनिक मशीनें खरीदने और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में अधिक निवेश कर सकती हैं।
प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश और अतिरिक्त 350 अरब डॉलर के पैकेज का वास्तविक वित्तीय स्वरूप,समयसीमा और स्वीकृति की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल हेगसेथ के बयान से यह स्पष्ट है कि प्रशासन रक्षा क्षेत्र के लिए बड़े स्तर पर संसाधन जुटाना चाहता है। हालाँकि,इस तरह के बड़े व्यय को लागू करने में कांग्रेस की मंजूरी,बजट संबंधी प्राथमिकताओं और वित्तीय जवाबदेही की भूमिका भी अहम होगी।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने मौजूदा हथियार खरीद प्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि पेंटागन ऐसी व्यवस्था को लंबे समय तक जारी नहीं रख सकता,जिसमें किसी महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण को हासिल करने में दस साल या उससे भी अधिक समय लग जाए। उनके मुताबिक,तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल में तकनीक विकसित होने और उसके सेना तक पहुँचने के बीच बहुत अधिक अंतर होना रणनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है।
पारंपरिक रक्षा परियोजनाओं में डिजाइन, परीक्षण, उत्पादन और तैनाती की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इस दौरान तकनीक बदल जाती है और सेना की जरूरतें भी अलग हो सकती हैं। हेगसेथ का कहना है कि अब ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें सैन्य आवश्यकताओं के अनुसार नए उपकरणों को तेजी से तैयार किया जा सके। इसके लिए पेंटागन खरीद प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने और नए निर्माताओं को अवसर देने पर काम कर रहा है।
प्रशासन की प्राथमिकताओं में ऐसे हथियार और उपकरण शामिल हैं, जिन्हें कम समय में विकसित करके सैन्य इकाइयों तक पहुँचाया जा सके। इसमें मानवरहित विमान, रोबोटिक प्रणालियाँ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित तकनीकें और आधुनिक संचार उपकरण शामिल हैं। इनका इस्तेमाल निगरानी, सूचना साझा करने, लक्ष्य की पहचान करने और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
हेगसेथ ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों, लड़ाकू विमानों और जमीनी सैनिकों की क्षमता पर निर्भर नहीं रहेंगे। अंतरिक्ष, समुद्र के नीचे के क्षेत्र, साइबरस्पेस और स्वायत्त सैन्य प्रणालियाँ भी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के महत्वपूर्ण हिस्से बनेंगी। इस कारण अमेरिका अपनी सैन्य योजना में नई तकनीकों को प्रमुख स्थान देना चाहता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में सूचनाओं का विश्लेषण करने, संभावित खतरों की पहचान करने और कमांडरों को निर्णय लेने में सहायता देने के लिए किया जा सकता है। वहीं,रोबोटिक्स और मानवरहित प्रणालियाँ उन क्षेत्रों में काम आ सकती हैं,जहाँ सैनिकों की तैनाती जोखिम भरी हो। हालाँकि,इन तकनीकों के सैन्य उपयोग के साथ सुरक्षा, नियंत्रण और जवाबदेही से जुड़े सवाल भी जुड़े हुए हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीकी श्रेष्ठता हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा,यदि अमेरिका के पास इन प्रणालियों के निर्माण के लिए सुरक्षित घरेलू आपूर्ति शृंखला और विश्वसनीय औद्योगिक आधार नहीं है। उनका तर्क है कि महत्वपूर्ण पुर्जों,कच्चे माल और उन्नत उपकरणों के लिए विदेशी स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता सैन्य तैयारियों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रशासन घरेलू विनिर्माण क्षमता और आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करना चाहता है।
हेगसेथ ने समुद्र के नीचे के क्षेत्र और चंद्रमा के आसपास के अंतरिक्ष को भविष्य की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उनके अनुसार,इन क्षेत्रों में संचालन और नियंत्रण की क्षमता भविष्य के संघर्षों में किसी देश की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी सैन्य रणनीति पृथ्वी की सतह तक सीमित नहीं रहना चाहती,बल्कि अंतरिक्ष और समुद्री गहराइयों में भी अपनी क्षमताओं का विस्तार करना चाहती है।
अमेरिकी रक्षा विभाग सैन्य प्रणालियों के बीच संपर्क और समन्वय बेहतर बनाने के लिए नई पहल पर काम कर रहा है। हेगसेथ ने ‘प्रोजेक्ट मेरिडियन’ का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्मों के बीच कनेक्टिविटी सुधारना और नई तकनीकों को तेजी से शामिल करना है। आधुनिक युद्ध में अलग-अलग इकाइयों के बीच समय पर सूचना साझा करना महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि विमान,जहाज, जमीनी इकाइयाँ और मानवरहित प्रणालियाँ एक-दूसरे से प्रभावी ढंग से जुड़ी हों, तो कमांडरों को परिस्थितियों का अधिक व्यापक आकलन करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, रक्षा विभाग एक अलग ‘स्वायत्त युद्ध कमान’ विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। हेगसेथ ने इसे चार सितारा स्तर की कमान बताया, जिसके दायरे में संयुक्त रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवरहित सैन्य प्रणालियों से जुड़े कार्य होंगे। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य सेना के विभिन्न अंगों में स्वायत्त तकनीकों की तैनाती को बेहतर ढंग से समन्वित करना है।
ऐसी कमान के माध्यम से नई प्रणालियों के विकास, परीक्षण और इस्तेमाल से जुड़ी जिम्मेदारियों को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा सकती है। इससे यह भी तय करना आसान होगा कि अलग-अलग सैन्य इकाइयों की जरूरतों के अनुसार तकनीकों को कैसे अपनाया जाए। हालाँकि, स्वायत्त हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण रहेगा कि उनके संचालन पर मानवीय नियंत्रण कैसे सुनिश्चित किया जाएगा और किसी गलती या अप्रत्याशित स्थिति की जिम्मेदारी किसकी होगी।
ओहियो में सिएरा नेवादा कॉर्पोरेशन के दौरे के दौरान हेगसेथ ने एक नई पीढ़ी के सुरक्षित हवाई संचालन केंद्र के विकास का भी जिक्र किया। इस सैन्य विमान को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति की कमान और नियंत्रण व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। इसमें परमाणु संकट जैसी गंभीर परिस्थितियाँ भी शामिल हैं।
अमेरिका जैसे देश के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व और सैन्य कमान के बीच संपर्क बनाए रखना उसकी रक्षा योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी बड़े हमले या आपातकाल के दौरान यदि सामान्य संचार व्यवस्था बाधित हो जाए,तो वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है। इसी संदर्भ में ऐसे विमानों को महत्वपूर्ण माना जाता है,जिनसे संकट की स्थिति में भी सैन्य संचालन और आदेशों का समन्वय जारी रखा जा सके।
हेगसेथ ने ‘ब्रॉलर’ और ‘मॉलर’ नाम की वायु रक्षा प्रणालियों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, अमेरिकी कमांडर अलग-अलग युद्ध क्षेत्रों में इन प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं,ताकि अमेरिकी सैनिकों को असममित हमलों से बचाया जा सके। असममित हमलों में अपेक्षाकृत कम लागत वाले या अलग तरीके से संचालित हथियारों का इस्तेमाल करके अधिक शक्तिशाली सैन्य बलों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा सकती है। ऐसी परिस्थितियों में प्रभावी वायु रक्षा प्रणालियाँ सैनिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
अमेरिकी प्रशासन की योजना केवल बड़ी रक्षा कंपनियों को अधिक काम देने तक सीमित नहीं है। हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन छोटे निर्माताओं और नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों के लिए भी खरीद प्रक्रिया में अवसर बढ़ाना चाहता है। उनका मानना है कि रक्षा उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से नए विचार सामने आएँगे और सैन्य उपकरणों के विकास में तेजी आ सकती है।
वर्तमान रक्षा उद्योग में कुछ बड़ी कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका है,लेकिन आधुनिक हथियारों के लिए हजारों छोटी कंपनियाँ विशेष पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सेंसर और तकनीकी समाधान तैयार करती हैं। यदि इन कंपनियों को लंबे समय तक काम मिलने का भरोसा हो,तो वे उत्पादन बढ़ाने और अपनी सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए निवेश कर सकती हैं।
हेगसेथ के मुताबिक,प्रशासन ऐसे अनुबंधों की व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहता है,जिनके तहत उत्पादन करने वाली कंपनियों को पाँच से सात साल तक के लिए काम मिलने की संभावना हो। इस तरह के दीर्घकालिक समझौते निर्माताओं को नई फैक्ट्रियों,उपकरणों और कर्मचारियों पर खर्च करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। साथ ही सरकार को भी पहले से तय कीमतों पर उपकरण हासिल करने में मदद मिल सकती है।
विस्कॉन्सिन के दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने आधुनिक हथियारों,विमानों और रडार प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों के निर्माण में छोटे व्यवसायों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि रक्षा उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए केवल अंतिम हथियार बनाने वाली कंपनियों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। पूरी आपूर्ति शृंखला में शामिल छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारों को भी मजबूत करना होगा।
अमेरिकी लघु व्यवसाय प्रशासन की प्रमुख केली लोफ्लर ने बताया कि पेंटागन के साथ मिलकर एक संयुक्त पहल छोटे रक्षा निर्माताओं की मदद कर रही है। इस पहल के तहत महत्वपूर्ण खनिजों और औद्योगिक कच्चे माल से जुड़े लगभग 175 मिलियन डॉलर के संभावित सौदों की दिशा में काम किया जा रहा है।
रक्षा उपकरणों के निर्माण में कई तरह के विशेष खनिजों,धातुओं और औद्योगिक सामग्रियों की जरूरत होती है। इनकी आपूर्ति बाधित होने पर हथियारों और सैन्य प्रणालियों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसलिए अमेरिकी प्रशासन घरेलू विनिर्माण के साथ-साथ आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दे रहा है।
यह पहल छोटी कंपनियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है,क्योंकि सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण उन्हें कच्चा माल खरीदने और नियमित आपूर्ति बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। यदि उन्हें विश्वसनीय आपूर्ति और कारोबार बढ़ाने के अवसर मिलते हैं, तो रक्षा उत्पादन के व्यापक नेटवर्क को लाभ हो सकता है।
रक्षा बजट बढ़ाने की योजना के बीच हेगसेथ ने वित्तीय पारदर्शिता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेंटागन मौजूदा प्रशासन का कार्यकाल 2028 में समाप्त होने से पहले पूरा वित्तीय ऑडिट कराने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने स्वीकार किया कि रक्षा विभाग पहले कई बार कांग्रेस की ऑडिट संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सफल नहीं रहा है।
अमेरिकी रक्षा विभाग का बजट बहुत बड़ा है और उसका खर्च दुनिया भर में सैन्य ठिकानों, सैनिकों,उपकरणों और अभियानों पर होता है। ऐसे में धन का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। हेगसेथ के मुताबिक,सैन्य खर्च में बढ़ोतरी के साथ वित्तीय जवाबदेही को भी मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने रक्षा उद्योग के आधुनिकीकरण को प्रशासन की व्यापक सैन्य रणनीति से भी जोड़ा। इसमें मध्य पूर्व में चल रहे अभियान और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अमेरिकी प्रयास शामिल हैं। हेगसेथ ने बताया कि उन्होंने हाल में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के उन कर्मियों से मुलाकात की थी,जो इन प्रयासों से जुड़े हैं।
कुल मिलाकर,ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित योजना अमेरिकी सेना के आधुनिकीकरण,घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। 1.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की माँग के साथ सरकार हथियारों की खरीद व्यवस्था बदलना,छोटे निर्माताओं को अवसर देना और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना चाहती है। हालाँकि,इस योजना की वास्तविक दिशा और प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि प्रस्तावित धनराशि को किस तरह मंजूरी मिलती है,उसका आवंटन कैसे होता है और नई सैन्य क्षमताएँ कितनी तेजी से विकसित होकर सेना में शामिल की जाती हैं।
