नई दिल्ली,26 अक्टूबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि देश के प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना अनुचित है और इससे सार्वजनिक जीवन की गरिमा प्रभावित होती है। हालाँकि,शिकायत दर्ज होने के आधार पर किसी आरोप को साबित नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस के निर्णय पर निर्भर करेगी।
यह शिकायत हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को दी है। उन्होंने अपनी शिकायत में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यक्तिगत टिप्पणी की थी। इसी बयान को आधार बनाकर उन्होंने पुलिस से मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है।
विष्णु गुप्ता की ओर से दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल ही में एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के संबंध में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। शिकायत में विशेष रूप से ‘मोदी का बाप’ जैसे कथित शब्दों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे सार्वजनिक जीवन में स्वीकार नहीं किए जाने योग्य भाषा बताया है।
शिकायत के मुताबिक,किसी राजनीतिक नेता द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी करना उचित नहीं है। विष्णु गुप्ता का दावा है कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक पर आसीन हैं और उनके प्रति सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्त करने के लिए आलोचना और बहस के कई तरीके हो सकते हैं,लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
हालाँकि,शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित बयान के पूरे संदर्भ की जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा। किसी सार्वजनिक टिप्पणी का कानूनी मूल्यांकन करते समय उसके वास्तविक शब्दों,संदर्भ और लागू कानूनों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।
हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा से देश के करोड़ों नागरिकों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस प्रकार की टिप्पणियों से सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की स्थिति पैदा हो सकती है।
शिकायतकर्ता के अनुसार,सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अपने बयानों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं की टिप्पणियों का व्यापक प्रभाव पड़ता है,इसलिए सार्वजनिक मंचों पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
विष्णु गुप्ता ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को उसके पद या राजनीतिक पहचान के आधार पर कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की टिप्पणी कानून का उल्लंघन करती है,तो संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
विष्णु गुप्ता ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को संबोधित शिकायत में मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कथित अपमानजनक टिप्पणी और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका का उल्लेख करते हुए मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने खुद को एक जिम्मेदार नागरिक और हिंदू सेना का प्रमुख बताते हुए कहा कि संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़े इस मामले को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस से आग्रह किया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जाए और कानून के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएं।
फिलहाल, इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है और मामले में आगे किस तरह की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है,यह स्पष्ट होना बाकी है।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों और उनकी भाषा को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों के बीच नीतियों,फैसलों और नेतृत्व की आलोचना आम बात है। हालाँकि,व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर विवाद होने पर उनके संदर्भ और कानूनी पहलुओं की जाँच महत्वपूर्ण हो जाती है।
मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ की गई शिकायत में फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप और माँग सामने आए हैं। पुलिस की जाँच या किसी सक्षम अदालत के निर्णय के बिना इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दिल्ली पुलिस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती है और कथित बयान के संबंध में जाँच के दौरान कौन-से तथ्य सामने आते हैं।
