संजय राउत

500 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन और वायरल ऑडियो की जाँच की माँग,संजय राउत ने अमित शाह को लिखा पत्र

मुंबई,26 अक्टूबर (युआईटीवी)- महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से जुड़े 500 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन और वायरल ऑडियो क्लिप को लेकर नया विवाद सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मामले की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर महाराष्ट्र पुलिस और ईडी को मामले की गहन जाँच करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। राउत का कहना है कि कथित लेनदेन से जुड़े आरोप गंभीर हैं और यदि इनमें मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिलते हैं,तो इसकी जाँच धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत की जानी चाहिए।

संजय राउत ने अपने पत्र में मनोज जरांगे पाटिल की ओर से लगाए गए आरोपों और कथित ऑडियो क्लिप का उल्लेख किया है। उनके मुताबिक,इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 500 करोड़ रुपये की इतनी बड़ी रकम किसने दी, किसके माध्यम से भेजी जानी थी और यदि यह रकम जरांगे तक नहीं पहुँची,तो आखिर इसका क्या हुआ। हालाँकि,ये आरोप और दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र जाँच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, पत्र के माध्यम से राउत ने केंद्र सरकार से मामले में जल्द कार्रवाई करने की माँग की है।

संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में 20 अक्टूबर को मनोज जरांगे पाटिल की ओर से किए गए कथित खुलासों का उल्लेख किया। राउत के अनुसार,जरांगे ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भारतीय जनता पार्टी की कोर टीम के वरिष्ठ नेताओं से 500 करोड़ रुपये लिए थे। कथित तौर पर यह रकम एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से जरांगे तक पहुँचाई जानी थी, लेकिन उनके अनुसार,पैसा उन तक नहीं पहुँचा।

राउत ने पत्र में दावा किया कि कथित लेनदेन का संबंध 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की घटनाओं से था। उन्होंने आरोपों के आधार पर यह सवाल उठाया कि क्या जरांगे पाटिल को मराठा आरक्षण आंदोलन से पीछे हटाने या उनकी आवाज दबाने के उद्देश्य से इस तरह की रकम देने की कोशिश की गई थी।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि पत्र में जिन लोगों के नाम और कथित लेनदेन का उल्लेख किया गया है,उनसे जुड़े आरोपों की सत्यता अभी जाँच का विषय है। केवल आरोप लगाए जाने या किसी ऑडियो क्लिप के सामने आने से किसी व्यक्ति की संलिप्तता अपने आप साबित नहीं हो जाती। मामले में वास्तविक तथ्यों की पुष्टि संबंधित जाँच एजेंसियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है।

संजय राउत ने अपने पत्र में कथित 500 करोड़ रुपये के स्रोत और उसके संभावित रास्ते की जाँच पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी रकम का लेनदेन वास्तव में हुआ था,तो पैसा कहाँ से आया और उसे किन माध्यमों से भेजने की योजना बनाई गई थी। यदि यह रकम मनोज जरांगे पाटिल तक नहीं पहुँची,तो उसके गायब होने या किसी दूसरे स्थान पर जाने की संभावना की भी जाँच होनी चाहिए।

राउत के मुताबिक,मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने माँग की कि जाँच एजेंसियाँ कथित लेनदेन के स्रोत, संभावित बिचौलियों,पैसों के हस्तांतरण और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल करें। उन्होंने यह भी कहा कि जाँच के निष्कर्ष महाराष्ट्र और देश की जनता के सामने रखे जाने चाहिए।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद ने इस मामले को संभावित मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हुए धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत जाँच की माँग की है। हालाँकि,किसी मामले में इस कानून का इस्तेमाल करने के लिए संबंधित कानूनी शर्तों और जाँच में सामने आने वाले तथ्यों का महत्व होता है। इसलिए यह तय करना जाँच एजेंसियों और सक्षम कानूनी प्राधिकारियों का काम होगा कि मामले में इस कानून के तहत कार्रवाई का आधार बनता है या नहीं।

अमित शाह को लिखे पत्र में संजय राउत ने ईडी की कार्यप्रणाली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के नेतृत्व में ईडी ने देश में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जाँच में प्रमुख भूमिका निभाई है। राउत ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि जब इस मामले में 500 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम और कथित ऑडियो क्लिप का जिक्र किया जा रहा है, तो इसकी जाँच भी प्राथमिकता के आधार पर क्यों नहीं होनी चाहिए।

राउत ने गृह मंत्री से महाराष्ट्र पुलिस और ईडी को जल्द-से-जल्द जाँच शुरू करने का निर्देश देने का आग्रह किया। उनका कहना है कि मामले से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आने चाहिए और यदि जाँच में किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका साबित होती है, तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

अपने पत्र में उन्होंने यह भी माँग की कि कथित घोटाले में शामिल लोगों की पहचान की जाए और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। हालाँकि,गिरफ्तारी या अन्य दंडात्मक कार्रवाई का फैसला जाँच के दौरान उपलब्ध सामग्री और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही किया जा सकता है।

संजय राउत ने अपने पत्र में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने मार्च 2021 की उस घटना का हवाला दिया,जब मुंबई के तत्कालीन पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने उनसे हर महीने 100 करोड़ रुपये इकट्ठा करके देने के लिए कहा था।

राउत ने इस प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय लगाए गए आरोपों के बाद भी ईडी ने तेजी से कार्रवाई की थी और अनिल देशमुख को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने दोनों मामलों की तुलना करते हुए दावा किया कि जरांगे पाटिल से जुड़े मौजूदा मामले में कथित तौर पर ऑडियो क्लिप भी सामने आई है और रकम भी बहुत बड़ी बताई जा रही है। इसलिए उनके अनुसार,इस मामले की भी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए।

हालाँकि,दोनों मामलों की कानूनी परिस्थितियाँ,उपलब्ध साक्ष्य और जाँच की स्थिति अलग-अलग हो सकती हैं। किसी पुराने मामले में हुई कार्रवाई अपने आप दूसरे मामले में समान कार्रवाई का आधार नहीं बनती। प्रत्येक प्रकरण में जांच एजेंसियों को तथ्यों,साक्ष्यों और संबंधित कानून के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेना होता है।

मनोज जरांगे पाटिल महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की माँग को लेकर आंदोलन करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। मराठा आरक्षण का मुद्दा राज्य की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों,सामाजिक संगठनों और सरकारों के बीच कई दौर की चर्चा और आंदोलन हो चुके हैं।

ऐसे में जरांगे पाटिल से जुड़े कथित लेनदेन के आरोप राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। संजय राउत ने अपने पत्र में इस मामले को 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले की कथित गतिविधियों से जोड़ते हुए जाँच की माँग की है। उनका आरोप है कि कथित रकम का उद्देश्य आंदोलन को प्रभावित करना हो सकता था,लेकिन इस दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जाँच और ठोस साक्ष्यों की जरूरत होगी।

फिलहाल,संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप करने और महाराष्ट्र पुलिस तथा ईडी को जाँच के निर्देश देने का अनुरोध किया है। पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल कथित 500 करोड़ रुपये के स्रोत,उसके संभावित हस्तांतरण और वायरल ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता से जुड़े हैं। यदि जाँच होती है,तो इन पहलुओं की पड़ताल से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी कानून का उल्लंघन हुआ है। तब तक इस मामले में सामने आए दावों को आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।