आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)

एआई से हर साल 2.52 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक कमाई संभव,लेकिन बढ़ती लागत घटा सकती है कंपनियों का मुनाफा

नई दिल्ली,26 अक्टूबर (युआईटीवी)- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता दुनिया की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। कंपनियों में कामकाज को स्वचालित बनाने,कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर करने के माध्यम से एआई हर साल खरबों डॉलर का आर्थिक मूल्य पैदा कर सकता है। हालाँकि,इस तकनीक को लागू करने और लगातार इस्तेमाल करने पर आने वाला खर्च इसके संभावित लाभ को काफी हद तक कम भी कर सकता है। एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि एआई मौजूदा कार्य प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाकर वैश्विक स्तर पर सालाना 2.52 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक मूल्य पैदा करने में सक्षम है,लेकिन यदि इसके इस्तेमाल की प्रभावी लागत में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है,तो यह मूल्य घटकर 1.67 ट्रिलियन डॉलर रह सकता है।

यह आकलन कंसल्टिंग कंपनी मैकिन्से की रिपोर्ट ‘द एआई वैल्यू कर्व: द इकोनॉमिक्स ऑफ अप्लाइंग एआई टू एग्जिस्टिंग वर्क’ में सामने आया है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि एआई तकनीक को तेजी से अपनाना और उससे वास्तविक आर्थिक लाभ हासिल करना दो अलग-अलग बातें हैं। कई संगठन एआई आधारित उपकरणों और प्रणालियों को अपने कामकाज में शामिल तो कर रहे हैं,लेकिन यह सुनिश्चित करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे कि इन पर किए गए निवेश से अपेक्षित रिटर्न मिल रहा है या नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार, एआई की संभावनाएँ काफी व्यापक हैं,लेकिन इनका पूरा लाभ हासिल करने के लिए कंपनियों को तकनीक पर होने वाले खर्च और उससे मिलने वाले परिणामों के बीच संतुलन बनाना होगा। यदि एआई को लागू करने की प्रभावी लागत में 30 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो वैश्विक स्तर पर इससे पैदा होने वाले अनुमानित सालाना आर्थिक मूल्य में 850 अरब डॉलर तक की कमी आ सकती है। इस परिदृश्य में संभावित आर्थिक लाभ 2.52 ट्रिलियन डॉलर से घटकर 1.67 ट्रिलियन डॉलर रह जाएगा।

अमेरिका के लिए भी रिपोर्ट में इसी तरह का आकलन किया गया है। यदि वहाँ एआई के इस्तेमाल की लागत में समान अनुपात में बढ़ोतरी होती है,तो इस तकनीक से मिलने वाला अनुमानित सालाना आर्थिक मूल्य 960 अरब डॉलर से घटकर 640 अरब डॉलर रह सकता है। हालाँकि,रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ये आँकड़े भविष्य में होने वाले बदलावों की निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं। इन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में संभावित आर्थिक प्रभाव को समझने के लिए तैयार किए गए मॉडल पर आधारित परिदृश्य के रूप में देखा जाना चाहिए।

इस आकलन का मुख्य संदेश यह है कि एआई से मिलने वाला लाभ केवल तकनीक की क्षमता पर निर्भर नहीं करेगा। कंपनियों को यह भी देखना होगा कि उसे अपनाने,संचालित करने और अपने मौजूदा कामकाज के साथ जोड़ने में कितना खर्च आ रहा है।

दुनियाभर में कंपनियाँ एआई से जुड़ी तकनीकों पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। इसमें डेटा सेंटर,कंप्यूटिंग क्षमता,सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म,स्वचालन प्रणालियाँ और अन्य तकनीकी संसाधन शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक,2030 तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक निवेश लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है।

इतने बड़े निवेश के बाद कंपनियों और निवेशकों के सामने यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस खर्च से कितनी अतिरिक्त उत्पादकता,आय और आर्थिक उपयोगिता पैदा होगी। रिपोर्ट में निवेश को उचित ठहराने के लिए आवश्यक संभावित मुनाफे का भी आकलन किया गया है। ऐसे बड़े पैमाने के निवेश के लिए पर्याप्त आर्थिक लाभ हासिल करना जरूरी होगा,ताकि एआई से जुड़ी परियोजनाएँ लंबे समय तक टिकाऊ बनी रह सकें।

एआई पर खर्च बढ़ने के साथ कंपनियों को अपने निवेश की प्राथमिकताएँ तय करनी होंगी। केवल नई तकनीक अपनाना सफलता की गारंटी नहीं है। यदि एआई किसी प्रक्रिया को तेज तो कर देता है,लेकिन उसके संचालन की लागत बहुत अधिक है,तो कुल आर्थिक फायदा अपेक्षा से कम हो सकता है। इसलिए कंपनियों के लिए तकनीक के उपयोग के साथ उसके वास्तविक परिणामों का आकलन करना भी जरूरी होगा।

मैकिन्से की रिपोर्ट में अलग-अलग उद्योगों में एआई से पैदा होने वाले संभावित आर्थिक मूल्य का भी आकलन किया गया है। इसमें वित्तीय सेवा क्षेत्र को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। इस क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल से सालाना लगभग 530 अरब डॉलर का आर्थिक मूल्य पैदा हो सकता है।

बैंकिंग,बीमा और वित्तीय सेवाओं से जुड़े अन्य कारोबार में बड़ी मात्रा में आँकड़ों का विश्लेषण करना,जोखिमों का आकलन करना और ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार सेवाएँ उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होता है। एआई इन प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता कर सकता है। इससे कामकाज की गति बढ़ाने और निर्णय लेने में लगने वाले समय को कम करने की संभावनाएँ पैदा होती हैं।

शिक्षा क्षेत्र को संभावित लाभ के मामले में दूसरा स्थान दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में एआई से सालाना करीब 410 अरब डॉलर का आर्थिक मूल्य पैदा हो सकता है। इसके बाद प्रौद्योगिकी,मीडिया और दूरसंचार क्षेत्र का स्थान है,जहाँ संभावित सालाना लाभ लगभग 360 अरब डॉलर आंका गया है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एआई आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से सालाना करीब 310 अरब डॉलर का आर्थिक मूल्य पैदा होने की संभावना है।

इन अनुमानों से पता चलता है कि एआई का प्रभाव केवल किसी एक उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। अलग-अलग क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल कामकाज की प्रकृति और जरूरतों के अनुसार उत्पादकता बढ़ाने के अवसर पैदा कर सकता है।

रिपोर्ट में इस आम धारणा को भी चुनौती दी गई है कि एआई का सबसे बड़ा आर्थिक फायदा कम वेतन वाले कर्मचारियों की जगह मशीनों का इस्तेमाल करने से मिलेगा। इसके बजाय, इसमें कानून,स्वास्थ्य सेवा, प्रबंधन और कंप्यूटर से जुड़े क्षेत्रों में उच्च कौशल वाले पेशेवरों की सहायता करने को एआई के महत्वपूर्ण अवसरों में शामिल किया गया है।

इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को अक्सर बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण करना,जटिल समस्याओं को समझना और कई विकल्पों के बीच निर्णय लेना पड़ता है। एआई इन प्रक्रियाओं में सहायता देकर काम की गति और गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकता है। हालाँकि,अंतिम निर्णय, विशेषज्ञता और जिम्मेदारी की जरूरत कई मामलों में बनी रहेगी।

कुल मिलाकर,रिपोर्ट यह संकेत देती है कि एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा आर्थिक मूल्य पैदा करने की क्षमता रखता है,लेकिन इसके लाभ अपने आप हासिल नहीं होंगे। कंपनियों को तकनीक पर होने वाले खर्च, कर्मचारियों की भूमिका और उत्पादकता में वास्तविक सुधार का लगातार मूल्यांकन करना होगा। एआई में निवेश तभी अधिक प्रभावी साबित होगा,जब उससे मिलने वाला लाभ उसकी लागत के अनुरूप हो और तकनीक को कारोबार की वास्तविक जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल किया जाए।