मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी

दिवाली से पहले कांग्रेस की रैली टालने की माँग,दिल्ली के व्यापारियों ने खड़गे से लगाई गुहार

नई दिल्ली,26 अक्टूबर (युआईटीवी)- दिल्ली के व्यापारियों ने रामलीला मैदान में एक नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने की माँग फिर से उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के इस महत्वपूर्ण समय में राजधानी के प्रमुख बाजारों में बड़ी संख्या में ग्राहकों की आवाजाही होती है। ऐसे में रैली के कारण यातायात प्रभावित होने, रास्तों पर जाम लगने और बाजारों तक पहुँचने में परेशानी होने की आशंका है। इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान का स्वागत किया है,जिसमें उन्होंने रैली के आयोजन को लेकर पार्टी और विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों से चर्चा करने के बाद अंतिम निर्णय लेने की बात कही थी।

सीटीआई का कहना है कि खड़गे के बयान से दिल्ली के व्यापारियों को उम्मीद मिली है कि उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। संगठन ने कांग्रेस अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि त्योहारों के दौरान कारोबार की अहमियत को देखते हुए रैली की तारीख दिवाली के बाद तय की जाए। व्यापारियों के मुताबिक,यह केवल कुछ दुकानदारों का मामला नहीं है,बल्कि राजधानी के कई बड़े थोक और खुदरा बाजारों से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका का सवाल है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रैली को लेकर कहा है कि वह कांग्रेस पार्टी और विपक्षी गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेंगे। उनके इस बयान के बाद व्यापारिक संगठनों ने अपनी माँग दोहराई है और उम्मीद जताई है कि रैली के कार्यक्रम पर दोबारा विचार किया जाएगा।

सीटीआई ने कहा कि खड़गे का रुख व्यापारियों की समस्याओं को सुनने की संभावना पैदा करता है। संगठन ने उनके बयान का स्वागत करते हुए कहा कि दिवाली के आसपास कारोबार अपने सबसे व्यस्त दौर में पहुँच जाता है। इस दौरान बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ती है और व्यापारियों के लिए बिक्री का यह समय पूरे साल के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि संगठन ने कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। उन्होंने आग्रह किया है कि अगली बैठक में रैली की तारीख पर विचार करते समय दिल्ली के लाखों व्यापारियों की रोजी-रोटी को ध्यान में रखा जाए। उनका कहना है कि रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने से व्यापारियों को त्योहार के दौरान अपना कारोबार सामान्य रूप से चलाने का अवसर मिलेगा।

व्यापारियों ने अपनी माँग के समर्थन में दिवाली से जुड़े प्रमुख त्योहारों और बाजारों में होने वाली बिक्री का हवाला दिया है। उनके अनुसार,इस वर्ष धनतेरस छह नवंबर को पड़ रहा है। धनतेरस के अवसर पर दिल्ली के विभिन्न बाजारों में बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है। सीटीआई का अनुमान है कि इस दिन राजधानी के अलग-अलग कारोबारी क्षेत्रों में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है।

धनतेरस के बाद आठ नवंबर को दिवाली और फिर 10 तथा 11 नवंबर को भाई दूज तक बाजारों में खरीदारी का सिलसिला जारी रहता है। इस अवधि में कपड़े, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान, सजावटी वस्तुओं और पूजा से जुड़ी सामग्री की माँग बढ़ जाती है। दुकानदारों के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है,क्योंकि त्योहारों के दौरान होने वाली बिक्री से उनके सालाना कारोबार को सहारा मिलता है।

व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों से पहले ग्राहक बाजारों में आसानी से पहुँच सकें, इसके लिए सामान्य यातायात व्यवस्था और दुकानों तक पहुँचने के रास्ते खुले रहना जरूरी है। यदि बड़े आयोजन के कारण सड़कों पर भीड़ बढ़ती है या वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है,तो ग्राहकों की संख्या घट सकती है। इसी आशंका के कारण व्यापारी चाहते हैं कि कांग्रेस की रैली को त्योहारों के व्यस्त समय के बाद आयोजित किया जाए।

सीटीआई के मुताबिक,रामलीला मैदान के आसपास लगभग पाँच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के कई प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, दरियागंज, कमला मार्केट, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, नया बाजार, आजाद मार्केट, दरीबा ज्वैलरी मार्केट, किनारी बाजार, नबी करीम, करोल बाग, झंडेवालान और जामा मस्जिद सहित कई कारोबारी क्षेत्र शामिल हैं।

संगठन का दावा है कि इन बाजारों में करीब तीन लाख व्यापारी कारोबार करते हैं। यदि उनके परिवार के सदस्यों और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी शामिल किया जाए,तो लगभग 15 लाख लोगों की आजीविका इन बाजारों से जुड़ी हुई है। ऐसे में व्यापारियों के अनुसार,किसी बड़े आयोजन का प्रभाव केवल कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं रहता,बल्कि आसपास के बाजारों और उनसे जुड़े कारोबार पर भी पड़ सकता है।

इन बाजारों में रोजाना बड़ी संख्या में खरीदार, दुकानदार,माल पहुँचाने वाले वाहन और दूसरे कारोबारी आते-जाते हैं। त्योहारों के दौरान यह गतिविधि और बढ़ जाती है। व्यापारियों का कहना है कि यदि सड़कों पर यातायात बाधित होता है,तो ग्राहकों को बाजारों तक पहुँचने में परेशानी हो सकती है। इससे बिक्री और माल की आपूर्ति दोनों प्रभावित होने की आशंका रहती है।

सीटीआई ने कहा कि प्रस्तावित रैली में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। संगठन का दावा है कि यदि करीब 10 लाख लोगों की महारैली होती है,तो इसका असर रामलीला मैदान के साथ-साथ आसपास के अन्य इलाकों और बाजारों पर भी पड़ सकता है। व्यापारियों को आशंका है कि बड़ी भीड़ के कारण यातायात का दबाव बढ़ेगा और बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

संगठन ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए धरने-प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। सीटीआई के अनुसार,उस दौरान राजधानी के कई हिस्सों में यातायात और सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ा था। संगठन का दावा है कि अक्टूबर में पहले ही लगभग तीन हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो चुका है। हालाँकि,इस नुकसान के आकलन और उसके कारणों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

व्यापारियों का कहना है कि वे दिवाली के व्यस्त कारोबारी समय में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं चाहते। उनके अनुसार,त्योहारों के दौरान कारोबार में किसी भी तरह की बाधा छोटे दुकानदारों और उन कारोबारियों के लिए ज्यादा मुश्किल पैदा कर सकती है,जो सीमित संसाधनों के साथ अपना व्यवसाय चलाते हैं।

सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से एक बार फिर अपील की है कि व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए रैली की तारीख दिवाली के बाद रखी जाए। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक कार्यक्रम का विरोध करना नहीं,बल्कि त्योहारों के दौरान कारोबार और लोगों की आजीविका पर संभावित असर को लेकर अपनी चिंता सामने रखना है।

दूसरी ओर,कांग्रेस अध्यक्ष ने इस विषय पर पार्टी और विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों से चर्चा के बाद निर्णय लेने की बात कही है। ऐसे में रैली की तारीख को लेकर अंतिम फैसला सामने आने का इंतजार है।

फिलहाल,दिल्ली के व्यापारियों की माँग का केंद्र त्योहारों के दौरान बाजारों की सामान्य गतिविधियों को बनाए रखना है। उनका मानना है कि रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने से राजनीतिक कार्यक्रम और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व व्यापारियों की अपील पर क्या निर्णय लेता है और प्रस्तावित रैली के कार्यक्रम में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।