नई दिल्ली,8 अगस्त (युआईटीवी)- भारत और इजरायल के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क लगातार जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुरुवार को टेलीफोन पर हुई बातचीत के एक दिन बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताते हुए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री मोदी के संदेश का जवाब देते हुए उन्हें अपना मित्र बताया और कहा कि दोनों देश मिलकर भारत-इजरायल संबंधों को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पोस्ट में लिखा, “धन्यवाद, मेरे दोस्त, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। हम मिलकर इजरायल और भारत के बीच संबंधों को लगातार और मजबूत बना रहे हैं।” नेतन्याहू की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री मोदी के उस संदेश के बाद आई,जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर हुई बातचीत की जानकारी दी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया था कि उन्हें इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का फोन आया। दोनों नेताओं ने भारत और इजरायल के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं में हुई प्रगति की समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और आगे बढ़ रही है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी अपने विचार साझा किए।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार,प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी में हो रही लगातार प्रगति की समीक्षा की और पारस्परिक हितों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर भी दोनों नेताओं ने विचारों का आदान-प्रदान किया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक,दोनों प्रधानमंत्रियों ने आगे भी एक-दूसरे के संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। इससे संकेत मिलता है कि बदलती क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच भारत और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रमों का प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा,व्यापार और वैश्विक कूटनीति पर पड़ रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क का अपना अलग रणनीतिक महत्व है।
भारत और इजरायल के संबंध पिछले तीन दशकों में काफी गहरे हुए हैं। दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है। आज भारत और इजरायल के रिश्ते केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं,बल्कि रक्षा,सुरक्षा,आतंकवाद रोधी सहयोग,खुफिया जानकारी साझा करने,कृषि,जल प्रबंधन, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।
रक्षा सहयोग भारत-इजरायल संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। दोनों देश रक्षा तकनीक,सैन्य उपकरण और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग करते रहे हैं। भारत के लिए इजरायल एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार है,जबकि इजरायल भी भारत के साथ रणनीतिक सहयोग को काफी महत्व देता है। बदलते सुरक्षा वातावरण में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग की भूमिका और बढ़ी है।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग भी दोनों देशों के संबंधों का अहम हिस्सा है। भारत और इजरायल दोनों आतंकवाद को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानते हैं। इसी वजह से दोनों देशों के बीच आतंकवाद रोधी गतिविधियों,सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़े सहयोग को लगातार मजबूत किया गया है। दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा संबंधों में बढ़ते भरोसे ने रणनीतिक साझेदारी को अधिक मजबूत आधार दिया है।
कृषि और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी भारत और इजरायल ने कई संयुक्त प्रयास किए हैं। इजरायल ने कम पानी में अधिक उत्पादन,आधुनिक सिंचाई,कृषि तकनीक और जल प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विशेषज्ञता विकसित की है। भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए इजरायली तकनीक का उपयोग कई परियोजनाओं में किया गया है। इस क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के व्यापक संबंधों का एक सकारात्मक पहलू है।
हालाँकि,राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों की तुलना में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में अभी भी काफी संभावनाएँ मौजूद हैं। पिछले वर्षों में व्यापार और निवेश में वृद्धि हुई है,लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार दोनों देशों की आर्थिक क्षमता के मुकाबले यह सहयोग अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँचा है। इसी संदर्भ में भारत और इजरायल के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-इजरायल मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही है। यदि दोनों देश इस दिशा में ठोस प्रगति करते हैं,तो इससे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। व्यापार बाधाओं को कम करने और विभिन्न क्षेत्रों में बाजार तक पहुँच आसान बनाने से दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का नया दौर शुरू हो सकता है।
मुक्त व्यापार समझौते से कृषि तकनीक, रक्षा उद्योग, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन,स्टार्टअप और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं। दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी भी इससे मजबूत हो सकती है। ऐसे में भारत-इजरायल संबंधों के अगले चरण में आर्थिक सहयोग को सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के बराबर महत्व देने की कोशिश की जा सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच लगातार होने वाली बातचीत इसी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत संवाद देखने को मिलता रहा है। नेतन्याहू का प्रधानमंत्री मोदी को ‘मेरे मित्र’ कहकर संबोधित करना दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत समीकरणों को भी दर्शाता है।
हालाँकि,पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति भारत और इजरायल दोनों के लिए एक जटिल कूटनीतिक परिस्थिति है। भारत क्षेत्र में अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के साथ-साथ सभी संबंधित देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। वहीं इजरायल के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दे प्राथमिकता में रहते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच संवाद का महत्व और बढ़ जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच हुई ताजा बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रम पर अपने विचार साझा किए और आगे भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश बदलती परिस्थितियों पर एक-दूसरे के साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहते हैं।
भारत और इजरायल की साझेदारी पिछले तीन दशकों में रणनीतिक भरोसे पर आधारित मजबूत संबंधों में बदल चुकी है। रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में हासिल प्रगति के बाद अब आर्थिक,तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग को और व्यापक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। नेतन्याहू का प्रधानमंत्री मोदी के प्रति सार्वजनिक रूप से आभार जताना और दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की बात कहना इस साझेदारी की निरंतरता का संकेत है। आने वाले समय में रक्षा और सुरक्षा के साथ आर्थिक सहयोग,व्यापार और तकनीकी साझेदारी को नई गति देने पर दोनों देशों का ध्यान केंद्रित रहने की उम्मीद है।
